बिजनेसमैन रतन टाटा को बिजनेस टिप्स देता है 28 साल का युवक, जानिए शांतनु नायडू के बारे में

बिजनेसमैन रतन टाटा को बिजनेस टिप्स देता है 28 साल का युवक, जानिए शांतनु नायडू के बारे में

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 13 Jun, 2021 02:24 pm सुनो सरकार देश और दुनिया लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर स्वस्थ जीवन शिक्षा व करियर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश,न्यूज़ डेस्क 

28 साल के शांतनु नायडू ने कम्र उम्र में बिजनेस इंडस्ट्री में एक नया मुकाम बनाया है। दिग्गज बिजनेसमैन रतन टाटा भी इनके आइडियाज के फैन हैं। रतन टाटा अपने पर्सनल निवेश वाले स्टार्टअप्स में शांतनु नायडू का ही दिमाग होता है।

शांतनु ने अपने काम से टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का दिल जीत लिया है। वो अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर हर रविवार को 'ऑन योर स्पार्क्स' के साथ लाइव आते हैं। उन्होंने अब तक सात सत्रों में भाग लिया है।

'ऑन योर स्पार्क्स' वेबिनार के लिए शांतनु हर इंसान से 500 ​​रुपये लेते हैं। उनकी कंपनी मोटोपॉज कुत्ते के कॉलर का निर्माण करती है जो अंधेरे में चमकते हैं ताकि कोई वाहन उन्हें ठोकर मारकर न चला जाए। इस कंपनी का कारोबार आज 20 से अधिक शहरों और चार देशों में फैला हुआ है।

कुत्तों के लिए बनाया चमकने वाला कॉलर
शांतनु का कहना है कि उन्होंने कई बार गाड़ियों के नीचे आकर कुत्तों को मरते देखा है। अंधेरे में ड्राइवर इन कुत्तों तो देख नहीं पाते हैं। इस वजह से उनके साथ हादसे होते रहते हैं। शांतनु के दिमाग में कुत्तों को बचाने के लिए एक कॉलर रिफलेक्टर बनाने का आइडिया आया और मेटापॉज नाम से कॉलर बना दी। इससे ड्राइवर रात में स्ट्रीट लाइट के बगैर भी कुत्तों को दूर से देख सकते हैं।

टाटा को पसंद आया शांतनु का अविष्कार
पिता के कहने पर शांतनु ने टाटा को पत्र लिखा था। पत्र के जवाब में उन्हें रतन टाटा से मिलने का न्योता मिला। शांतनु से पहले उनके परिवार की चार पीढ़ियां रतन टाटा के लिए काम कर चुकी थी, पर किसी को उनसे मिलने का मौका नहीं मिला था।

मीटिंग के दौरान टाटा ने स्ट्रीट डॉग्स प्रोजेक्ट की मदद के लिए पूछा लेकिन शांतनु ने मना कर दिया। टाटा ने जोर देकर निवेश किया और उसके बाद मोटोपॉज की पहुंच देश के 11 अलग-अलग शहरों तक हो गई है। इसी बहाने शांतनु लगातार टाटा से मिलते रहते हैं।

MBA पूरा करने के बाद रतन टाटा के साथ कर रहे काम
मोटोपॉज की शुरुआत करने के बाद शांतनु ने कॉर्नेल में एडमिशन लिया और एमबीए के दौरान उद्यमिता, निवेश, नए स्टार्टअप के साथ-साथ क्रेडिबल स्टार्टअप्स की खोज, इंटरेस्टिंग बिजनेस आइडियाज और मुख्य इंडस्ट्री ट्रेंड्स पर पूरा ध्यान लगाकर पढ़ाई की।

कोर्स खत्म करने के बाद साल 2018 में उन्हें टाटा के साथ काम करने का मौका मिला। शांतनु कहते हैं कि उनके लिए यह सम्मान की बात है।इस तरह का मौका जिंदगी में एक ही बार मिलता है। उनके साथ रहकर हर मिनट कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है।

कभी जेनरेशन गैप जैसी बात महसूस नहीं की। वह आपको कभी यह महसूस नहीं होने देते कि आप रतन टाटा के साथ काम कर रहे हैं।

स्टार्टअप्स में यकीन रखते हैं रतन टाटा
81 साल के रतन टाटा का देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में गहरा विश्वास रखते हैं। जून 2016 में रतन टाटा की प्राइवेट इनवेस्टमेंट कंपनी आरएनटी असोसिएट्स और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ने स्टार्टअप को मदद करने के लिए हाथ मिलाया था। स्टार्टअप के लिए आर्थिक मदद तो कई तरीके से मिल सकती है।लेकिन,रतन टाटा के साथ काम करने से उनका अनुभव भी नए उद्यमियों के बहुत काम आता है। यही वजह है कि जिन स्टार्टअप को टाटा का सपोर्ट मिलता है उनकी वैल्यू तुरंत बढ़ जाती है।

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