जनादेश विशेष:श्रेय लेना और ठीकरा फोड़ना राजनीति के दो विशेष गुण

जनादेश विशेष:श्रेय लेना और ठीकरा फोड़ना राजनीति के दो विशेष गुण

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 11 Apr, 2021 12:22 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा

हिमाचल जनादेश,संजीव थापर(स्वतंत्र लेखक)

श्रेय लेना और ठीकरा फोड़ना राजनीति के दो विशेष गुण हैं । यदि ये गुण राजनीतिज्ञों में नहीं हैं तो वे वास्तव में राजनीतिज्ञ नहीं हैं बल्कि मनमोहन सिंह  की मानिंद हैं । इसे अन्य शब्दों में लें तो श्रेय लेना और ठीकरा फोड़ने का अर्थ राजनीतिज्ञों की बेशर्म चालाकी से है अर्थात जो वस्तु , वाणी , घटना या दुर्घटना उनके अनुकूल होती है उसे झट से लपक लेते हैं और अपने पक्ष में राजनीतिकरण कर लेते हैं और जो प्रतिकूल होती है उससे मिनटों में पल्ला झाड़ लेते हैं । 

मैं तो सदियों से यही देखता आया हूं , देश की राजनीति का इतिहास अनगिनत उदाहरणों से भरा पड़ा है । अब भी यही हो रहा है तो कौन सी नई बात है । अब देखिए न पालमपुर में खेमों में बंटी पार्टियों में श्रेय लेने या ठीकरा फोड़ने का मनपसंद खेल शुरू हो चुका है । नगर निगम के निर्वाचन से पहले सजे मंचों से मंत्रियों और बड़े नेताओं की उपस्थिति में इन तथाकथित साधारण स्तरीय नेताओं में आगे बढ़ने की दौड़ लगी थी और इसी दौड़ में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए अपनी ज़ुबान से कहीं फिसल गए और इसी जुबां ने आज उन्हें चक्करघिन्नी का नाच नचा दिया है । चले थे चौबे बनने दुबे बन कर रह गए ।

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राजनीति का दाव खेलते हुए उन्होंने पल्ला झाड़ने की कोशिश तो की है किंतु यह कोशिश कहां तक सफल होगी भविष्य बताएगा ।दोस्तो यह एक ऐसा खेल है जो क्रिकेट के आई पी एल मैचों की मानिंद देश में कहीं न कहीं लगातार खेला जाता है । इसमें जो सितारा आज चमकता है वह कल धूमिल हो जाता है या इसकी संभावना बनी रहती है । यह राजनीति की विसात है , कभी कोई भारी तो कभी कोई भारी ।

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