अग्निपथ के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट,नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग,पढ़े पूरा मामला 

अग्निपथ के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट,नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग,पढ़े पूरा मामला 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 04 Jul, 2022 01:59 pm प्रादेशिक समाचार सुनो सरकार देश और दुनिया लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर स्वस्थ जीवन शिक्षा व करियर आधी दुनिया


हिमाचल जनादेश ,न्यूज़ डेस्क 
सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ स्कीम के विरोध में दायर अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। शीर्ष अदालत में अगले सप्ताह गर्मियों की छुट्टियां समाप्त होने के बाद इस पर सुनवाई होगी। 

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में एयरफोर्स कर्मियों का कहना है कि इसके चलते उनका करियर 20 साल की बजाय महज 4 साल का ही हो जाएगा। याचिका दायर करने वाले एडवोकेट एम.एल शर्मा ने कहा, 'मेरी अर्जी है कि सरकार की ओर से भर्ती के लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है, उसे कैंसिल किया जाए।

सरकार कोई भी स्कीम ला सकती है, लेकिन यहां बात सही और गलत की है। अब भी 70 हजार लोग ऐसे हैं, जो नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं।'यह अर्जी जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की वैकेशन बेंच के समक्ष दाखिल की गई है।

याची का कहना है कि अग्निपथ स्कीम कम से कम उन लोगों पर लागू नहीं होनी चाहिए, जो पहले से चल रही भर्ती प्रक्रिया में शामिल हैं और नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मसले पर तत्काल सुनवाई होनी चाहिए क्योंकि यह सैनिकों के करियर का सवाल है। 

वकील ने कहा कि कई बार कोशिशों के बाद भी रजिस्ट्री विभाग की ओर से तारीख नहीं दी गई है। शर्मा ने कहा कि अदालत को 14 जून को रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन को कैंसिल करना चाहिए, जिसमें अग्निपथ स्कीम का ऐलान किया गया था। 

इस मामले में एक और अर्जी अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दायर की गई है। उन्होंने अदालत से मांग की गई है कि अग्निपथ स्कीम के परीक्षण के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कमेटी यह तय करे कि इस स्कीम का युवाओं के भविष्य और देश की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या असर होगा। 

अग्निपथ स्कीम के विरोध में दायर याचिकाओं को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से भी एक परिवाद दाखिल किया गया है। इसमें सरकार ने कहा कि अदालत कोई भी फैसला सुनाने से पहले इस मसले पर सरकार का पक्ष भी सुन ले।

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