पुण्यतिथि विशेष :युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानंद

पुण्यतिथि विशेष :युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानंद

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 04 Jul, 2022 01:28 pm प्रादेशिक समाचार धर्म-संस्कृति लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा शिक्षा व करियर आधी दुनिया


हिमाचल जनादेश

भारतमाता की पावन धरा पर समय समय पर अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया और भारत माता की पावन धरा को अपने विचारों और कार्यों से प्रभावित किया। 

ऐसे महापुरुषों में स्वामी विवेकानंद जी का नाम हमेशा अग्रणी रहेगा। 12 जनवरी 1863 को विवेकानंद जी का जन्म हुआ। बाल्यकाल से ही उनमें कुशाग्र बुद्धि व आध्यात्मिकता की ओर झुकाव था।

ईश्वर का स्वरूप जानने के लिए जगह जगह महापुरुषों के पास जाते रहते। स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी से पहली ही भेंट में उनका जीवन परिवर्तित हो गया और बन गए विवेकानंद। 

भारतीय धर्म और आध्यात्मिकता का प्रकाश सारे जगत में फैलाने का उद्देश्य लेकर अमेरिका के शिकागो शहर में 11 सितम्बर 1893 को धर्म संसद में भाग लिया और भारत की पताका पूरी दुनिया में लहराई। 

विवेकानंद जी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थे,उनकी वाणी में इतना तेज़ था कि जो भी उनको सुनता प्रभावित हुए बिना नहीं रहता।युवाओं के लिए विवेकानंद जी के उपदेश अत्यंत प्रेरणा दायक है। 

युवाओं का उदघोष करते हुए स्वामी जी कहते हैं"असफलताओं की चिंता मत करो,यह जीवन का सौंदर्य है। लक्ष्य के लिए हजार बार प्रयत्न करो, अगर फिर भी असफल हो जाओ तो एक बार फिर प्रयत्न करो" उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक कहीं मत रुको"।

आत्मविश्वास को सफलता के लिए आवश्यक मानते हुए विवेकानंद जी कहते हैं "जिसे स्वयं पर विश्वास नहीं वह ईश्वर पर कैसे विश्वास कर सकता है।

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"सफलता के लिए भागीरथी धैर्य, प्रचंड इच्छा शक्ति चाहिए अध्यवसायी आत्मा कहती है, मैं समुद्र को पी जाऊंगी, मेरे सामने पहाड़ भी झुक जाएंगे। इस प्रकार की इच्छा शक्ति, पराक्रम रखो तुम लक्ष्य तक अवश्य पंहुचोगे।वर्तमान में अपनी मूल संस्कृति व धर्म से विमुख हो रही युवा पीढ़ी निश्चय ही चिंता का विषय बनता जा रहा है।

आज आवश्यकता है कि हम स्वामी जी के विचारों को आत्मसात कर के उनको कार्य रुप में परिणत करने का प्रयास कर के अपने राष्ट्र की अनमोल धरोहर को संजोने व संवर्धन करने का संकल्प लें। 4 जुलाई 1902 को स्वामी जी इस दुनिया को अलविदा कर गए परंतु उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक व व्यावहारिक हैं।

आओ आज स्वामी जी की पूण्यतिथि के अवसर पर संकल्प लें कि स्वामी जी के बताये मार्ग पर चलें… तभी स्वामी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

                                                                      विक्रम वर्मा.
                                                                      स्वतंत्र लेखक.
                                                                      चम्बा. हि.प्र.

                                                                      

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