जन्मदिन पर विशेष :नूरपुर के जाने माने समाजसेवी व उद्योगपति रणवीर सिंह निक्का के जन्मदिन पर युवाओं ने दी बधाई

जन्मदिन पर विशेष :नूरपुर के जाने माने समाजसेवी व उद्योगपति रणवीर सिंह निक्का के जन्मदिन पर युवाओं ने दी बधाई

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 23 Jan, 2022 12:29 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा मनोरंजन आधी दुनिया


हिमाचल जनादेश ,नूरपुर (अर्पण चावला )
नूरपुर क्षेत्र के जाने माने समाजसेवी व उद्योगपति रणवीर सिंह निक्का जिसने अपनी तकदीर को खुद लिखा है। निक्का की जीवन किसी फिल्मी किरदार से कम नहीं है, रील लाइफ में जो देखने को मिलता है वो इस शख्स से रीयल लाइफ में देखा है और जिया है। 1988 में आयी बाढ़ निक्का  के परिवार पर कहर की तरह टूटी,  उसके परिवार की आवाद जमीन को वीरान कर गयी।

बाढ़ के पानी ने जब घरों को शिकार बनाया तो परिवार के साथ-साथ रातें खुले आसमान में छत पर बिताई। 10 वर्ष के निक्का का सामना उस समय पहली बार पत्थरों और रेत से हुआ जो कुदरत वीरान जमीन पर छोड़ गयी। कुदरत की मार ने जब निक्का तथा उसके परिवार की लहलहाती जमीन को बंजर बना दिया तो इसी निक्का ने दुनिया को दिखा दिया कि वह बंजर जमीन से सोना उगालने का जौहर जानते है।  

एक नजर इधर भी - ज़हरीली शराब मामले में कांग्रेस पूरी तरह से हो चुकी है एक्सपोज़ - भाजपा

23 जनवरी 1978 को कंडवाल में वीना देवी व स्वदेश सिंह के घर साधारण किसान परिवार में रणवीर सिंह का जन्म हुआ था। स्वदेश सिंह के 3 पुत्र है, रणवीर सिंह दूसरे नम्बर है इसलिए परिवार में उनको निक्का भी बोला जाता है। क्षेत्र व प्रदेश में रणवीर सिंह "निक्का" नाम से लोगों के दिलों में बस चुके है। 1988 में जब बाढ़ आने के बाद उनकी सारी जमीन तहस नहस हो गयी, फसले व बगीचे बर्वाद हो गए तब निक्का भी अपने पिता और भाइयों  के साथ परिवार के भरण पोषण में डट गए। 

लोगों की जमीनों पर हल जोतने के लिये एक ट्रैक्टर खरीदा और 24×7 दिन रात काम किया। बाढ़ के कारण बड़े बड़े पत्थरो से भरी हुई बंजर जमीन में पत्थर तोड़ कर निर्माण सामग्री तैयार कर ढुलाई का काम भी किया। प्रदेश तथा क्षेत्र के सफल उद्योगपति व ठेकेदार स्व आर.के. महाजन  ने निक्का की मेहनत और जज्वे को देखते हुए सड़क पत्थर विछाने का काम पट्टे पर दिया। उसके बाद कई कार्य निक्का ने पट्टे पर किए तथा 2005 में पहला स्टोन क्रशर लगाया। इससे पहले  2002 में निक्का होटल व्यापार में भी उतर चुके थे। बाढ़ के कारण खड्ड बन चुकी जमीन निक्का के लिए सोना उगलने लगी थी। 

35 वर्ष की छोटी सी आयु में निक्का उद्योगपति बन चुके थे। निक्का आज प्रदेश के सफल उद्योगपति बन चुके है तथा उनकी कई स्टोन क्रशर यूनिटें लगभग 500-600 परिवारों को रोजगार दे रही है। होटल कारोबार में भी निक्का के कई प्रोजेक्ट निर्माणधीन है।   निक्का ने लक्ष्य रखा है कि हर साल एक प्रोजेक्ट लगा कर कम से कम 50 लोगों को रोजगार देंगे। 

27 वर्ष की आयु में पहली बार निक्का ने कंडवाल पँचायत में प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। उसके बाद निक्का पँचायत में लोगों से जुड़े रहे तथा 2010-11 में दोबारा चुनाव लड़ा तथा जोरदार तरीके से चुनाव जीते। 2012 में प्रदेश भाजपा ने निक्का को नूरपुर से विस चुनावों के लिए प्रत्याशी बनाया, पार्टी का आदेश मान बिना किसी संगठन व तैयारी से वह चुनावों में उतरे व बुरी तरह हार गए।  

भाजपा विपक्ष में बैठ गयी और नूरपुर में पार्टी के कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए निक्का का पूरा उपयोग किया गया। निक्का ने भी तन ,मन, धन से पार्टी की 5 साल खूब सेवा की और संगठन खड़ा किया लेकिन 2017 के विस चुनावों में उन्हें प्रत्याशी न बना कर उन्हें साइड कर दिया गया। पार्टी के बड़े नेताओं ने उन पर आजाद खड़ा न होने का दबाब बनाया और सरकार बनते ही उनको सरकार में मान-सम्मान देने के बड़े बड़े वायदे भी किए गए लेकिन निक्का भाजपा सरकार में उपेक्षा का शिकार रहे। 

दिसम्बर माह में निक्का समर्थकों द्वारा एक कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा सरकार व पार्टी द्वारा निक्का तथा उनके समर्थकों की अनदेखी पर 2022 का चुनाव लड़ाने का निर्णय ले लिया है तथा निक्का ने भी इस बार विस चुनावों  के लिए हुंकार भर दी है। राजनीति में आने के बाद निक्का ने उद्योगपति के साथ साथ अपनी पहचान एक समाजसेवी की भी बनाई है। जरूरत मन्द की मदद को निक्का हमेशा तैयार रहते है। 

Comments

Leave a comment

What's on your mind regarding this news!

Your comment *

No comments yet. Be a first to comment on this.