मेरी उंगली से: चुनावी वर्ष में चंबा में फूटा पोस्टर बम जिसने उड़ाई दोनों पार्टियों की नींद 

मेरी उंगली से: चुनावी वर्ष में चंबा में फूटा पोस्टर बम जिसने उड़ाई दोनों पार्टियों की नींद 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 14 Jan, 2022 08:12 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा

हिमाचल जनादेश, मोनु राष्ट्रवादी(मुख्य संपादक)

वर्ष 2022 की शुरुआत होते ही एक तरफ जहां चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा कर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी है तो वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश में भी चुनावी वर्ष शुरू होते ही राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई है। 

जहां दोनों दलों में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है. इसी बीच हिमाचल प्रदेश के अति पिछड़े जिले से प्रत्याशी को लेकर क्षेत्रवाद की लपटें उठी है जिसने भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों की नींद हराम कर रखी है। दरअसल जिला चंबा की सदर सीट पर ग्रामीण और शहरीवाद को लेकर एक पोस्टर छपा है जो शहर के हर गली-कूचे में दीवारों पर चिपका हुआ देखने को मिल रहा है।  पोस्टर में अबकी बार सदर सीट से ग्रामीण उम्मीदवार के समर्थन को लेकर बात कही गई है। पोस्टर में किसी एक पार्टी का जिक्र नहीं किया गया है बस ग्रामीण क्षेत्र को नेतृत्व देने की बात कही गई है। चंबा के इस पोस्टर बम की मूल्यांकन स्वरूप आज सब पहलू पर चर्चा की जाएगी। 

किसी भी जिला में सदर की सीट पर हमेशा ही शहर से संबंध रखने वाले का अधिपत्य रहा है जिसमें शहर में नगर पंचायत या नगर परिषद से संबंध रखने वाला कद्दावर व्यक्ति ही सत्तासीन होता है लेकिन जिला चंबा की बात अलग है क्योंकि यहां एक नहीं दो बार ग्रामीण पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाला शख्स नेतृत्व संभाल चुका है। दुर्भाग्य इस बात का कि  गांव में शिक्षा दीक्षा लेने के बाद उक्त शख्स ने कभी अपने गांव की शक्ल नहीं देखी लेकिन पार्टी में अच्छी पकड़ होने के कारण उक्त शख्स ने सदर की कमान संभाली- नाम बालकृष्ण चौहान। 

कहने को तो भाजपा कार्यकाल में जिला चंबा का नेतृत्व  ग्रामीण पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले बाल कृष्ण चौहान ने किया लेकिन चुनाव जीतने के बाद शायद ही कभी अपने गांव और क्षेत्र के हित के लिए कुछ किया हो क्योंकि गांव छूटने के बाद उनका आशियाना भी चंबा शहर के बीचो-बीच रहा है।  2009 में परिसीमांकन होने के बाद गांव का एक बहुत बड़ा हिस्सा सदर सीट से कट गया जिस कारण गांव की नेतृत्व की आवाज कमजोर हो गई। 

जिला चंबा में नगर परिषद के बाहर का क्षेत्र आज भी खुद को ग्रामीण मानता है। फिर वह चाहे करिया-रजेरा का क्षेत्र हो, साहू का क्षेत्र हो, सरोल उदयपुर का क्षेत्र हो या फिर मंगला से लेकर जोत तक का क्षेत्र हो सभी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में दोनों पार्टियों से संबंध रखने वाले कई कद्दावर नेता भी मौजूद है।  वर्तमान क्षेत्र में भाजपा हो या कांग्रेस दोनों पार्टियों की उम्मीदवार एक ही परिवार की है-परिवार है नैयर परिवार। ऐसी में दोनों पार्टियों की ग्रामीण में नेता शहरी नेतृत्व से छुटकारा तो चाहते ही है साथ वे परिवारवाद से भी छुटकारा चाहते हैं।

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कांग्रेस की ओर से ग्रामीण परिवेश से संबंध रखने वाले एक व्यक्ति वे हैं जिनके पास वर्तमान में कांग्रेस संगठन का महत्वपूर्ण जिम्मा है, तो वही दूसरे शख्स वे हैं जिन्होंने कुछ माह पूर्व ही यह दावा किया था कि अगर कांग्रेस पार्टी उन पर भरोसा जताती है तो वह सीट जिताकर कांग्रेस की झोली में डालेंगे। कांग्रेस पार्टी के बीच में यह दोनों शख्स काफी चर्चित हैं लेकिन ग्रामीण पृष्ठभूमि होने के हमेशा ही इन्हें पार्टी ने उम्मीदवार के रूप में स्वीकारने से गुरेज किया है। 

वहीं दूसरी ओर भाजपा में भी ग्रामीण पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले कई ऐसे नेता हैं जो युवा हैं और संगठन के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।  इन में से एक शख्स वो हैं जो पिछले तीन कार्यकाल से संगठन के अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन कर रहे हैं लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न न हो पाने के कारण कभी पार्टी का ध्यान इनकी ओर नहीं गया।  वहीं दूसरी ओर एक महिला उम्मीदवार भी हैं जिन्होंने पंचायती राज राजनीति में कई वर्षों से अपनी धाक जमए  रखी है लेकिन कुछ समय पूर्व ही उन पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने पर पदच्युत किया गया। इसके अलावा  एक और युवा चेहरा भी हैं जो संगठन में युवा मोर्चा का जिला स्तर पर नेतृत्व करने के साथ-साथ पंचायती राज व्यवस्था में अपना पैर जमाए हुए हैं और वर्तमान में वे पंचायत प्रधान के रूप में सेवाएं दे रहे हैं जबकि उनकी धर्मपत्नी भारी मतों के साथ जिला परिषद सदस्य हैं. 

फिलहाल दोनों पार्टियों की ओर से दावेदारी का मादा रखने वाले इन लोगों का नाम उजागर करना बेमानी होगी।  लेकिन यह बात सत्य है कि जिला चंबा की सदर सीट ग्रामीण और शहरी निकायों की दो चक्की के पाटों में पिस रही है।  दोनों ही पार्टियां इन ग्रामीण क्षेत्र से संबंध रखने वाले उम्मीदवारों पर सहमति बनाती हैं या नहीं यह अलग बात है लेकिन जिला चंबा में हर दीवार पर पोस्ट के रूप  में  बम आज राजनीतिक गलियारों में चर्चा का अच्छा खासा मुद्दा बन चुका है जिसने दोनों पार्टियों की नींद हराम करके रख दी है। 

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