राष्ट्रीय युवा दिवस विशेष:सफलता के लिए चाहिए भागीरथी धैर्य और प्रचंड इच्छाशक्ति

राष्ट्रीय युवा दिवस विशेष:सफलता के लिए चाहिए भागीरथी धैर्य और प्रचंड इच्छाशक्ति

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 12 Jan, 2022 08:01 am प्रादेशिक समाचार सुनो सरकार देश और दुनिया लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा काँगड़ा

हिमाचल जनादेश 

" सफलता के लिए भागीरथी धैर्य चाहिए,प्रचंड इच्छाशक्ति चाहिए।  अध्यवसायी आत्मा कहती है मैं समुद्र को पी जाऊँ गी.. मेरे सामने पर्वत भी झुक जाएंगे। इस प्रकार की इच्छा शक्ति रखो, पराक्रम रखो, तुम लक्ष्य तक अवश्य पहुंचोगे, इस प्रकार के ओजस्वी एवं प्रेरणादायी विचारों के उद्घोषक महान कर्मयोगी एवं सन्यासी स्वामी विवेकानंद जी युवा पीढ़ी के मार्गदर्शक थे।  उनकी वाणी में ओज और कर्मक्षेत्र में मातृभूमि के प्रति असीम निष्ठा निश्चय ही युवा वर्ग के लिए प्रेरणा का काम करती है।  

12 जनवरी 1863 को अवतरित स्वामी विवेकानंद जी मातृभूमि की सोई हुई आत्मा को जगाने आए थे। उनकी शिक्षाएं वर्तमान समय में और भी प्रासंगिक और व्यवहारिक हैं। आधुनिक काल में समाज और प्रकृति की बदलती हुई परिस्थितियों में स्वामी जी के आदर्श और भी महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहें हैं। 

भारत जागो! विश्व जगाओ!!. भारत को दिए इस संदेश ने पूरे देश में विद्युत शक्ति का संचार कर दिया। 11 सितम्बर 1893 को अमेरिका के शिकागो में भारतीय धर्म एवं संस्कृति की ध्वजा फहराकर विश्व में भारत की महान संस्कृति को गौरवान्वित किया। स्वामी जी के संदेश किसी धर्म विशेष नहीं अपितु मानवमात्र के लिए हैं। उनका कहना था " जिस प्रकार भिन्न भिन्न नदियाँ अपने मूल स्रोतों से चलती हुई अंत में असीम सागर में समा जाती है उसी प्रकार भिन्न भिन्न धर्मों के अनुसार आचरण करता हुआ मनुष्य अंत में उस परम सत्ता में विलीन हो जाता है। 

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वर्तमान समाज में बढ़ रहे नैतिक मूल्यों के पतन व सामाजिक समरसता में कमी व निस्वार्थ सेवा भाव की कमी एक चिंता का विषय है।  युवाओं में संस्कारों की कमी व अपने धर्म व संस्कृति के प्रति अलगाव एक विचारणीय विषय है।  आज देश में भिन्न भिन्न प्रकार के सामाजिक व सांस्कृतिक अवमूल्यन से देश को बचाने के लिए स्वामी जी के आदर्श अत्यंत व्यावहारिक हैं। युवाओं को अपने सोई हुई आत्मा को जगाने व अपने भीतर महान इच्छा शक्ति को प्रकट करके लक्ष्य प्राप्त करने के लिए स्वामी जी अनवरत लक्ष्य प्राप्ति तक आगे बढ़ने का संदेश देते हैं। 

"अपने स्नायु बलवान बनाओ"आज हमें जिस की आवश्यकता है वह है लोहे की पुट्ठे और फौलाद के स्नायु. हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो हमें मनुष्य बना सके और सत्य की कसौटी यही है कि- जो भी तुम को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टि से दुर्बल बनाए उसे जहर की भांति त्याग दो, उसमें जीवन शक्ति नहीं है.वह कभी सत्य नहीं हो सकता। 

विवेकानंद जी का धर्म विश्व कल्याण की बात करता है।  उनका कहना है शुद्धता, पवित्रता और दयाशीलता  प्रत्येक धर्म की सम्पत्ति होनी चाहिए, सारे प्रतिरोधों के बावजूद  प्रत्येक धर्म की पताका पर लिखा रहेगा- संघर्ष नहीं सहायता, परभाव -ग्रहण न कि परभाव विनाश, समन्वय और शांति, न कि मतभेद और कलह। 

अपने दिव्य संदेशों और कार्यों के कारण स्वामी जी आज भी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।  आज आवश्यकता है उनके आदर्शों एवं विचारों को आत्मसात करने और उन्हें व्यावहारिक रूप प्रदान करने की ताकि आने वाली पीढ़ी उनके आदर्शों का अनुसरण करके अपनी और अपने समाज व राष्ट्र की संस्कृति को सहेजने एवं संवर्धित करने का उत्तर दायित्व  का निर्वहन करने में सक्षम व सामर्थ्य वान बन सकें। 

 आओ हम संकल्प लें कि राष्ट्रीय युवा दिवस पर स्वामी जी के विचारों को जन जन तक पंहुचा कर उनके प्रति सच्ची निष्ठा व राष्ट्र प्रेम के दायित्व का निर्वाह करें, "उतिष्ठित जागृत........." 

लेखक:विक्रम वर्मा, प्रवक्ता एंग्लो भाषा, रावमा छतराडी ,चम्बा हि.प्र.।

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