सुनो सरकार :जब सुबह 8:45 पर होगी परीक्षा तो स्कूल कैसे पहुंचेंगे ग्रामीण नोनिहाल

सुनो सरकार :जब सुबह 8:45 पर होगी परीक्षा तो स्कूल कैसे पहुंचेंगे ग्रामीण नोनिहाल

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 13 Nov, 2021 09:16 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार देश और दुनिया सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा स्वस्थ जीवन शिक्षा व करियर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश , मोनु राष्ट्रवादी ( मुख्य संपादक)

यूं तो प्रदेश सरकार अपने तर्कहीन निर्णयों के लिए खासी विवादित रही है लेकिन हाल ही में लिए गए नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत साल में दो बार टर्मिनल परीक्षा के लिए निर्णय को लेकर एक बार फिर से सरकार की कार्यशैली और निर्णय क्षमता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है ।

दरअसल सरकार द्वारा टर्मिनल परीक्षा के लिए जो समय निर्धारित किया गया है वह समय शीतकालीन पाठशालाओं के लिए के लिए किंचित भी उपयुक्त नहीं है । दरअसल सरकार ने 10वीं और 12वीं की बच्चों की टर्मिनल परीक्षा के लिए सुबह 8:45 का समय निर्धारित किया है और ऊपर से कोरोना नियमों के चलते छात्रों को आधा घंटा पहले पहुंचना होगा जिससे बच्चों को परीक्षा देने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।  जैसा कि हम प्रदेश की भौगोलिक परिस्थिति से वाकिफ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को अपने विद्यालय तक पहुंचने के लिए 5 से 6 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है ऐसे में इतनी सुबह परीक्षा देने के लिए छात्रों का विद्यालय पहुंचना लगभग नामुमकिन सा लग रहा है क्योंकि इतनी सुबह भारी ठंड, छोटे दिन और कठिन रास्ते गंभीर चिंता का विषय है जिससे अध्यापकों की चिंताएं बढ़ चुकी हैं ।

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हालांकि सरकार द्वारा बीते दिन 9वीं व 11वीं कक्षा की छात्राओं के लिए टर्मिनल परीक्षा का समय दोपहर 12:45 किया गया है जिससे इन कक्षा के छात्रों को परीक्षा देने में तो राहत मिली है लेकिन 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए जारी किए गए परीक्षा समय के आदेश अभिभावकों व अध्यापकों की चिंता का कारण बन गए हैं । इसे भी हास्यास्पद निर्णय सरकार का यह कि आज जारी अधिसूचना में सरकार ने निजी स्कूलों के प्रबंधन को इस बात की छूट दी है कि वे अपने स्कूल के छात्रों को स्कूल बुलाने में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं ।

 

तो प्रश्न उठता है कि क्या सरकारी स्कूल में पढ़ रहे छात्रों के हितों को दरकिनार कर सरकार निजी स्कूल के लाभ के विषय में आखिर कब तक सोचती रहेगी?  इस बात को लेकर भी हैरानी होती है अध्यापक संगठनों के नेता बनकर अपने हितों की बात करते हैं तो क्या उन्हें यह समझ नहीं आता कि क्या सिर्फ निजी स्वार्थ के मुद्दों के लिए ही लड़ते रहेंगे या सरकार और विभाग द्वारा दिए गए इन आदेशों के निर्णय को लेकर भी सरकार के समक्ष आवाज उठाएंगे।

खैर, जो भी हो लेकिन सुबह 8:45 पर होने वाली टर्मिनल परीक्षा के निर्णय को लेकर सरकार को एक बार फिर से विचार करने की आवश्यकता है।

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