हिमाचल उपचुनाव विशेष:जनता की आवाज-वही सरताज

हिमाचल उपचुनाव विशेष:जनता की आवाज-वही सरताज

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 02 Nov, 2021 08:13 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश 
वर्तमान परिपेक्ष्य में निस्संदेह जनता ताज की शक्ति का निर्णय करने का दम रखती है। भले ही राजनैतिक समीकरण कुछ भी ब्यान करते हो,परंतु जनता मौन रुप से तगड़ा धमाका करने की ताकत रखती है। 

इन चुनाव परिणामों से यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है,कारण कुछ भी रहे होंगे यह सब जानते हैं कि जनता की समस्याएं जब तक सुनी व सुलझाई नहीं जाती तब तक कोई भी चेहरा आमजन के लिए कोई मायने नहीं रखता।

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सबका साथ सबका विकास मात्र सुनने में अच्छा लगता है पर उसको धरातल पर अमलीजामा पहनाने की दृढ़ इच्छाशक्ति व दूरदर्शी मानसिकता की आवश्यकता होती है। मात्र यह सोच कर कि कुछ लोगों का साथ ही राजनेताओं की महत्वाकांक्षा को पूरा कर देगा तो यह अब मुमकिन नहीं है।

भिन्न भिन्न क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं को ध्यान में रखना राजनीति में अत्यधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। अपने स्वार्थ के लिए जनमानस को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना अब लोगों को गवारा नहीं। 

शिक्षा, स्वास्थ्य व सड़क सुविधाओं से वंचित जनता अपना निर्णय सुनाने में सक्षम है। इस में कोई संदेह नहीं, राजनीति में चाटुकारिता का चलन और कुछ लोगों तक सीमित ठेकेदारी व्यवस्था निस्संदेह चिंतनीय है।  मूलभूत सामाजिक मुद्दों की अनदेखी अब जनता सहन नहीं कर सकती,पार्टी कोई भी हो, सरकार कोई भी हो, जनता की नब्ज टटोलने की काबिलियत राजनेताओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

वास्तव में सच्चे मन से जनता के सेवक बनने के लिए आत्ममंथन व निस्वार्थ भाव से समाज सेवा का जज्बा  ही आने बाले समय में राजनेताओं के लिए कारगर हो सकता है। क्योंकि जनता को मात्र वायदे करके नहीं बल्कि वायदे पूरे कर के ही दायित्व का निर्वहन किया जा सकता है,तभी जनता सरताज बना सकती है। 
लेखक:विक्रम वर्मा
स्वतंत्र लेखक

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