अमेरिकी की 'ऐतिहासिक' यात्रा के बाद भारत लौट रहे पीएम मोदी, जानिए US विजिट के क्या रहे मायने?

अमेरिकी की 'ऐतिहासिक' यात्रा के बाद भारत लौट रहे पीएम मोदी, जानिए US विजिट के क्या रहे मायने?

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 25 Sep, 2021 11:05 pm राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार देश और दुनिया लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर

हिमाचल जनादेश, न्यूज़ डेस्क 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने शनिवार को अमेरिका  का अपना तीन दिवसीय दौरा खत्म किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध  इस यात्रा के बाद और भी ज्यादा मजबूत हो जाएंगे। पीएम मोदी ने संयुक्त राज्य अमेरिका से लौटने से पहले एक ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘मुझे विश्वास है कि आने वाले सालों में भारत-अमेरिका के मध्य संबंध और मजबूत होंगे। हमारे समृद्ध जन दर जन संपर्क हमारी सबसे मजबूत संपत्तियों में से हैं।’

पीएम मोदी ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित किया। उन्होंने फर्स्ट इन-पर्सन क्वाड समिट में भी भाग लिया और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन , अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और उनके ऑस्ट्रेलियाई और जापानी समकक्षों-स्कॉट मॉरिसन और योशीहिदे सुगा के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कार्यक्रम आयोजित किए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि प्रधानमंत्री की अमेरिकी यात्रा “ऐतिहासिक” रही।

कोरोनावायरस महामारी के प्रकोप के बाद से अमेरिका की अपनी पहली यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ड्रोन से लेकर 5G, सेमीकंडक्टर और सोलर तक के प्रमुख क्षेत्रों के पांच शीर्ष अमेरिकी कॉर्पोरेट नेताओं से मुलाकात की और भारत में विशाल अवसरों का जिक्र करते हुए उन्हें अपने निवेश को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। इन शीर्ष नेताओं में दो भारतीय अमेरिकी (एडोब से शांतनु नारायण और जनरल एटॉमिक्स से विवेक लाल) थे इसके अलावा, पीएम मोदी ने क्वालकॉम के क्रिस्टियानो ई. आमोन, फर्स्ट सोलर के मार्क विडमार और ब्लैकस्टोन के स्टीफन ए. श्वार्जमैन से भी मुलाकात की।

पीएम मोदी ने कमला हैरिस को दिया भारत आने का निमंत्रण
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के साथ अपनी बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक से एक दिन पहले गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मुलाकात की थी। व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पहली बैठक में गुरुवार को दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत करने का निर्णय किया और साझा हित वाले वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जिसमें अफगानिस्तान और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के मुद्दे भी शामिल थे। इस दौरान मोदी ने हैरिस की प्रशंसा की और उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया।

वहीं, शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने व्हाइट हाउस में बिडेन का गर्मजोशी से स्वागत किया. दोनों नेताओं ने कोरोनोवायरस महामारी, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने सहित कई जरूरी मुद्दों पर चर्चा की। बिडेन ने कहा, ‘दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत और नजदीकी होना तय है क्योंकि पीएम मोदी ने फोर-T टैंलेंट, टेक्नोलॉजी, ट्रेड और ट्रस्टीशिप के आधार पर बढ़ते संबंधों के लिए 10 साल का रोड मैप तैयार किया है।

एक नजर इधर भी-चंबा: जिला का एक ऐसा सरकारी आयुर्वेदीक स्वास्थ्य केन्द्र जहां हर रोज तीन बजे लटक जाते हैं ताले, क्या है वजह पढ़ें

इसके बाद, पीएम मोदी ने क्वाड समिट के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं के साथ एक बैठक में भाग लिया और हिंद-प्रशांत और दुनिया की शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। राष्ट्रपति बिडेन ने कहा कि चारों लोकतंत्र कोविड-19 से लेकर जलवायु तक की साझा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक साथ आए हैं।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान को दी खुली चेतावनी
पीएम मोदी ने शनिवार को UNGA सेशन को भी संबोधित किया और “प्रतिगामी सोच” वाले देशों को लेकर आगाह किया, जो आतंकवाद का इस्तेमाल “राजनीतिक उपकरण” के रूप में कर रहे हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि कोई भी देश अपने स्वार्थ के लिए अफगानिस्तान के नाजुक हालात का लाभ न उठाए। उन्होंने किसी भी देश का नाम नहीं लिया, हालांकि साफ तौर पर इशारा पाकिस्तान की ओर था। उन्होंने भारत में लोकतंत्र की ताकत का भी जिक्र किया और रेलवे स्टेशन पर एक चाय बेचने वाले से लेकर प्रधानमंत्री बनने के अपने सफर पर भी बात की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 157 प्राचीन कलाकृतियां और प्राचीन वस्तुओं के साथ रविवार को अमेरिका से भारत के लिए रवाना हुए। इन कलाकृतियों और वस्तुओं को अमेरिका ने पीएम मोदी को बतौर उपहार सौंपा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इन प्राचीन वस्तुओं की वापसी के लिए अमेरिका की सराहना करते हुए धन्यवाद किया है. प्रधानमंत्री कार्यालय  ने एक बयान में कहा कि इनमें से अधिकतर कलाकृतियां और वस्तुएं 11वीं से 14वीं शताब्दी के बीच की हैं।

Comments

Leave a comment

What's on your mind regarding this news!

Your comment *

No comments yet. Be a first to comment on this.