जनादेश एक्सक्लूसिव: आखिर क्यों है आईजीएमसी लंगर सेवा पर विवाद और कौन है ऑलमाइटी ब्लेसिंग संस्था? मामले के बारे में जाने सबकुछ 

जनादेश एक्सक्लूसिव: आखिर क्यों है आईजीएमसी लंगर सेवा पर विवाद और कौन है ऑलमाइटी ब्लेसिंग संस्था? मामले के बारे में जाने सबकुछ 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 09 Sep, 2021 06:35 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल क्राईम/दुर्घटना सुनो सरकार लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर शिमला स्वस्थ जीवन

हिमाचल जनादेश , मोनु राष्ट्रवादी(मुख्य संपादक)

पिछले 1 सप्ताह से प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में एक संस्था के द्वारा चलाई जा रही लंगर सेवा का मुद्दा काफी चर्चा में है जिसमें आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो चुकी है।  विपक्ष के लोग सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे जिसमें कई लोग इस मामले के लिए आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर जनक राज को भी निशाने पर लेने से गुरेज नहीं कर रहे।  

सोशल मीडिया पर उक्त संस्था संचालक के पक्ष में आकर लोग इसे सरकार की मिलीभगत के साथ जोड़ रहे लेकिन विषय वस्तु की सच्चाई क्या है इस बात से फिलहाल लोग अनजान नजर आ रहे हैं।  जहां तक लंगर सुविधा की बात है तो यह लंगर आज भी बकायदा चल रहा है। आईजीएमसी प्रशासन ने सिर्फ उक्त संस्था के द्वारा आईजीएमसी संस्थान में किए गए अवैध कब्जे को हटाया है।  चलिए आज हम आपको बताते हैं कौन है ऑलमाइटी ब्लेसिंग संस्था, कौन हैं इसके संस्थापक और क्या है पूरा मामला जिसे लेकर लोग एक भ्रम जाल में फंस कर सोशल मीडिया पर एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे। 


बात वर्ष 2014 की है जब आईजीएमसी में एक ऐसी संस्था की आवश्यकता थी जो मरीजों के तीमारदारों को मुफ्त और अच्छा भोजन मुहैया करवा पाए। ऐसे में  ऑलमाइटी ब्लेसिंग नामक संस्था सामने आई जिसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा सिर्फ चाय और खिचड़ी के लिए अनुमति प्रदान की गई जिसे उस संस्था को बाहर से तैयार करवाकर लाना था मतलब उस संस्था को आईजीएमसी संस्थान के अंदर गैस चूल्हा रखने की इजाजत नहीं थी हालांकि उस समय ये संस्था पंजीकृत भी नहीं थी।

ऑलमाइटी ब्लेसिंग संस्था के संस्थापक सरबजीत सिंह उर्फ़ बॉबी हैं जो पुरषार्थी बस्ती लोअर बाजार शिमला के रहने वाले हैं जो लोअर बाजार में ही एक दूकान चलाता है जिन्होंने आईजीएमसी के कैंसर वार्ड में मुफ्त लंगर सेवा को शुरू किया। चूंकि काम जनसेवा का था इसलिए उक्त संस्था ने अपनी जरूरत के हिसाब से अपने दायरे को बढ़ाना शुरू कर दिया और आदेश सरकार के थे इसलिए तत्कालीन आईजीएमसी प्रशासन ने उक्त संस्था के बढ़ाए जाने वाले दायरे पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझा

 लोगों को सुविधा मुहैया हो रही थी इसलिए धीरे-धीरे उक्त संस्था की ख्याति बढ़ने लगी तो उक्त संस्था के द्वारा समय-समय पर महान विभूतियों को उस लंगर सेवा में बुलाया जिसके एकाध चित्र को सिर्फ आईजीएमसी प्रशासन पर अंगुली उठाने के लिए बारंबार वायरल करवाया जा रहा है । सूत्र बताते हैं कि संस्था के संस्थापक की कई जगह करोड़ों की सम्पति है जो उन्होंने डोनेशन के नाम पर अर्जित पैसों से कमाई है। 

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सूत्र बताते हैं कि बॉबी पूर्व मुख्यमंत्री के दिवंगत राजा वीरभद्र सिंह के करीबी थे इसलिए राजनैतिक संरक्षण और संस्था की बढ़ती ख्याति के मद में आकर उस संस्था ने नियमों और कर्तव्यों को दरकिनार करना शुरू कर दिया नतीजन उन्होंने कैंसर वार्ड के टेली कोबाल्ट यूनिट के पीछे रसोईघर स्थापित कर दिया जहाँ 21 अक्टूबर 2016 को उनकी रसोई में आगजनी हुई थी लेकिन सौभाग्यवश बड़ा हादसा नहीं हुआ लेकिन अगर आग की लपटें टेली कोबाल्ट यूनिट तक पहुँच जाती तो आईजीएमसी के पांच किलोमीटर दायरे में आने वाली आबादी कई गंभीर बिमारियों की चपेट में आ सकती थी। । 

क्या है कोबाल्ट 60 पदार्थ 
कोबाल्ट एक रासायनिक तत्व है।  प्राकृतिक रूप में पाया जाने वाला कोबाल्ट स्थाई होता है लेकिन कोबाल्ट 60 एक मानव निर्मित रेडियो समस्थानिक है और ये परमाणु संयंत्रों में काम करने से लेकर चिकित्सीय इस्तेमाल में रेडियोथेरपी,  फ़ूड और ब्लड इरेशिएशन जैसे कार्यों में प्रयोग किया जाता है। यदि इसे किसी सयंत्र में बिना पहचाने पिघला दिया जाए तो यह उस पदार्थ को विषाक्त बना देता है। इसकी चपेट में आने वाले लोगों को कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं जिससे उनके किडनी,लीवर और हड्डियों को नुक्सान होता है यहाँ तक कि इंसान की मौत भी हो सकती है। 

आगजनी के बाद ऑलमाइटी ब्लेसिंग के अनुमति को लेकर फिर उँगलियाँ उठी तो संस्था ने अपनी गलती मानते हुए रसोई को बंद करने की बात भी लेकिन बाद में वे अपनी बात से मुकर गए और राजनैतिक संरक्षण के चलते उसी वार्ड के दूसरे स्थान में शिफ्ट हो गए। 

कालांतर प्रोफेसर जनकराज ने आईजीएमसी में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक का जिम्मा संभाला तो उक्त संस्था के अवैध कब्जे को लेकर संवैधानिक तरीके से मामले की छानबीन करवा कर तथ्यों और साक्ष्यों को जुटाकर उस संस्था को अवैध कब्जे से हटाने के निर्देश दिए और संस्थान की शर्तों पर काम करने को कहा जिसे उक्त संस्था ने अपनी तौहीन समझा।

आईजीएमसी में लोगों को मिलने वाली भोजन सुविधा बाधित न हो और कोई संस्था संस्थान के संसाधनों पर अवैध कब्जा भी न करे इसके लिए उक्त स्थान की इ-टेंडरिंग के माध्यम से निविदाएं भी मांगी लेकिन ऑलमाइटी ब्लेसिंग संस्था ने अपने मद में रहकर उस प्रक्रीया में नहीं भाग  लिया नतीजन नोफ़ॉल नामक समाजसेवी संस्था ने आईजीएमसी प्रबंधन की शर्तों को पूरा करते हुए टेंडर प्राप्त कर लिया जो आज उसी स्थान पर मुफ्त लंगर सेवा प्रदान कर रही है। अगर ऑलमाइटी ब्लेसिंग संस्था के काम में पारदर्शिता है तो संस्था के लोग सोशल मिडिया पर सहानुभुनि जुटाने  बजाए न्याय के लिए क़ानून से गुहार क्यों नहीं लगा रहे?

सोशल मीडिया पर ये भ्रमजाल भ्रमजाल फैलाया जा रहा है कि आईजीएमसी प्रशासन ने लंगर सेवा को बंद करवाकर अमानवता का परिचय दिया है जबकि हकीकत ये है कि आज एक नहीं बल्कि दो-दो लंगर कैंसर वार्ड में लगे हैं। ऑलमाइटी ब्लेसिंग के मामले को लेकर कर सरकार ने आदेश जारी करते हुए न्यायिक कमेटी का गठन कर जांच के आदेश दे दिए हैं जो कमेटी 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी तब तक इस मामले में अफवाहें फ़ैलाने का मतलब संकीर्ण मानसिकता है क्योंकि आईजीएमसी स्वास्थ्य संस्थान है जहाँ शारीरिक दुखों से झूझ रहे लोग जाते हैं कोई सदन नहीं जहाँ आप मेज पर हाथ मार-मार कर अपनी बात सुनाओगे। 

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