आखिर सरकार को क्यों रास नहीं आ रही एक IAS अधिकारी की ईमानदारी? 3 माह में तीसरी बार ट्रांसफर हुए ओंकार शर्मा

आखिर सरकार को क्यों रास नहीं आ रही एक IAS अधिकारी की ईमानदारी? 3 माह में तीसरी बार ट्रांसफर हुए ओंकार शर्मा

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 25 Jul, 2021 02:34 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर शिमला

हिमाचल जनादेश, मोनु राष्ट्रवादी (मुख्य संपादक)

किसी भी विभाग में 2 महीने की जिम्मेदारी तो कभी 2 सप्ताह में ही तबादला, प्रदेश सरकार का अपने ही निर्णयों से बार-बार पलटना सरकार और उनके सलाहकारों की सूझबूझ और मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहे हैं । यूं तो सरकार अपने इस पूरे कार्यकाल में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों को लेकर खासी ट्रोल होती रही है लेकिन सरकार द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का बारंबार तबादला आजकल सचिवालय में चर्चा का विषय बना हुआ है ।

1994 की बैच के आईएएस अधिकारी ओंकार चंद शर्मा का कसूर सिर्फ इतना है कि वह जिस भी विभाग के सचिव का पद संभालते हैं उस विभाग की आंतरिक खामियों को सुधारने के लिए वे कभी-कभी कठोर निर्णय भी ले लेते हैं लेकिन अक्सर उनके द्वारा लिए गए निर्णयों को संबंधित विभाग के कर्मचारी पचा नहीं पाते इसलिए वे अपने आकाओं से कह कर ओंकार चंद शर्मा के विभाग को बदला देते हैं और यह सिलसिला पिछले तीन-चार वर्षों से लगातार चल रहा है।  कभी बागवानी, तभी आयुर्वेद, कभी जलशक्ति तो कभी राजस्व विभाग, बस ओंकार शर्मा के पास करीब हर विभाग का जिम्मा 2 महीना से अधिक नहीं टिक पाता। 

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ 2 दिन पहले जारी की गई अधिसूचना में ओंकार शर्मा से आयुर्वेद का कार्यभार छीन कर तकनीकी शिक्षा का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है जिसमें ओंकार शर्मा का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने उन डॉक्टरों पर नकेल कसी जो वेतन तो ट्राइबल का खा रहे थे लेकिन मजे शिमला शहर में कर रहे थे साथ ही उन आयुर्वेदिक डॉक्टरों को डिमोट कर दिया था जो जनजातीय क्षेत्र में अपना कार्यकाल काटे बिना ही प्रमोट हो गए थे।

एक नजर इधर भी - हिमाचल में दूल्हे की तरह सजाकर किया 27 वर्षीय युवा जवान शहीद का अंतिम संस्कार , अक्टूबर में थी शादी

जानकारी मिली है कि जब ओंकार चंद शर्मा ने आयुर्वेदिक विभाग का जिम्मा संभाला था तो उन्होंने आयुर्वेदिक डॉक्टर की छटनी करना शुरू कर दी जो वेतन तो ट्राइबल का ले रहे थे लेकिन डटे शिमला शहर में थे। ओंकार चंद शर्मा ने उन डॉक्टर की डेपुटेशन को रद्द कर उन्हें उनके जनजातीय क्षेत्र में ड्यूटी बजाने की निर्देश जारी कर दिए। इतना ही नहीं वे डॉक्टर जो बिना ट्राइबल काटी प्रमोट हो गए थे उन्हें भी प्रधान सचिव ओंकार शर्मा द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए डिमोट कर दिए गया । बताया जा रहा है कि डेपुटेशन में शामिल कुछ डॉक्टर ऐसे थे जो सरकार के मंत्रियों के करीबी माने जाते हैं जिन्होंने इसकी शिकायत अपनी आकाओं से कर दी। फिर क्या था कार्यवाही के 2 दिन के भीतर उनका विभाग बदल दिया गया । आरोप है कि सरकार में आयुर्वेदिक डॉक्टरों के दवाब में आकर यह कदम उठाया है। प्रधान सचिव ओंकार शर्मा के बारंबार विभाग को बदले जाने के निर्णय सचिवालय में आजकल खासी चर्चा का विषय बना हुआ है।  


वे शख्सियत जिन्होंने करोना की पहली लहर के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना बाहरी राज्यों में फंसे प्रदेश के लोगों को लाने में अहम भूमिका निभाई, वे शख्सियत जिनके कार्यनिष्ठा और स्वच्छ छवि की प्रदेश भर में मिसाल दी जाती है।  उस शख्सियत का कसूर बस इतना कि उन्होंने सरकार की रबर स्टैंप बनना अपने आत्मसम्मान के विरुद्ध समझा।  शायद इसी का खामियाजा आज प्रधान सचिव ओंकार शर्मा भुगत रहे हैं।

खैर जो भी हो लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सरकार के इस तरह के रवैए से कहीं अगर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी लामबंद हो गए तो वे जयराम सरकार के बचे 1 वर्ष के कार्यकाल में सरकार की रफ्तार कम हो सकती है और यही सरकार के पास अंतिम वर्ष है जिस पर सरकार मिशन रिपीट का सपना देख रही है।

Comments

Leave a comment

What's on your mind regarding this news!

Your comment *

No comments yet. Be a first to comment on this.