हिमाचल में बज सकता है उप-चुनाव का बिगुल: फतेहपुर सीट बनी भाजपा के गले की फांस 

हिमाचल में बज सकता है उप-चुनाव का बिगुल: फतेहपुर सीट बनी भाजपा के गले की फांस 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 03 Jul, 2021 10:49 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा मण्डी शिमला

हिमाचल जनादेश , मोनु राष्ट्रवादी (मुख्य संपादक)

लॉकडाउन खुलने के बाद हिमाचल में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। दरअसल हिमाचल प्रदेश में 3 सीटों पर उपचुनाव होने हैं जिसमें से 2 विधानसभा की और एक लोकसभा की सीट है। लोकसभा की सीट में मंडी जबकि विधानसभा की सीट में जुब्बल कोटखाई और फतेहपुर शामिल हैं। सूचना है कि इन सीटों पर चुनाव करवाने के लिए चुनाव आयोग 20 जुलाई तक आचार सहिंता लागू करने की घोषणा कर सकता है। 

आपको बता दें यह तीनों सीटें निर्वाचित प्रतिनिधियों के मरणोपरांत रिक्त हुई हैं जिसमें से मंडी लोकसभा क्षेत्र में रामस्वरूप शर्मा, जुब्बल कोटखाई से नरेंद्र बरागटा तथा फतेहपुर सीट सुजान सिंह पठानिया के निधन के उपरांत रिक्त हुई है। 

इन तीनों सीटों में सबसे ज्यादा हॉट सीट फतेहपुर की सीट है और हो भी क्यों न क्योंकि इस सीट पर भाजपा लगातार तीन बार मुंह की खा चुकी है।  ऐसे में इस सीट पर भाजपा इस बार कोई भी गलती करने से परहेज कर रही है क्योंकि प्रदेश में और केंद्र में भाजपा सरकार होने के नाते इस सीट को लेकर दबाव लगातार बना हुआ है जिसने आलाकमान की नींद हराम कर रखी है। 

भाजपा फतेहपुर में तभी जीती थी,जब सुजान सिंह पठानिया से डॉ राजन सुशांत की भिड़ंत हुई थी। सुशांत के बाद भाजपा ने साल 2009 में बलदेव चौधरी को मैदान में उतारा नतीजा हार रहा। इसके बाद साल 2012 में फिर पठानिया के खिलाफ बलदेव ठाकुर को उतारा फिर हार नसीब हुई। इसके बाद 2017 में कृपाल परमार को टिकट दी हार की हैट्रिक लग गई।

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कांग्रेस प्रत्याशी भवानी पठानिया ने तो जनसभा करवा कर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं, जनसभा में उमड़े जनसैलाब ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है।  आपको बता दें भवानी पठानिया सुजान सिंह पठानिया के पुत्र हैं जिन्हें विदेश से सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए बुलाया गया है। तो वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से पूर्व में चुनाव हारे कृपाल परमार के अलावा बलदेव ठाकुर, जगदेव सिंह, रीता ठाकुर और पंकज हैप्पी जैसे चेहरे जिन पर भाजपा दांव खेलने का सोच रही है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कृपाल परमार पर फतेहपुर भाजपा में सहमति बनती नजर नहीं आ रही है जिसकी मुख्य वजह उनका बाहरी होना माना जाता है।  ऐसे में बाकी बचे चार चेहरे पर दांव खेलने के के अलावा पार्टी के पास कोई विकल्प नहीं है।  जानकारी तो यहां तक है कि बाकी बचे चार चेहरे एकजुटता के साथ खड़े हैं इनमें से अगर किसी को भी टिकट दे दी जाती है तो वे एक साथ पार्टी का कार्य करेंगे। 

2017 में पूर्व सांसद कृपाल परमार ने यहां से चुनाव लड़ा था उन पर बाहरी होने का टैग लगा है। सूत्रों की मानें तो स्थानीय नेताओं में पंकज हैप्पी ,बलदेव ठाकुर, जगदेव सिंह, रीता ठाकुर के नामों के उपर मंथन जारी है। ऐसे में एक ही नाम मुड़-मुड़ कर आलाकमान के ध्यान में आ रहा है वह नाम है पंकज हैप्पी।

हैप्पी अभी भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष और कांगड़ा-चम्बा लोकसभा क्षेत्र के प्रभारी भी हैं। फतेहपुर की भगवां सियासत में हैप्पी जाना पहचाना नाम भी हैं। उनके खाते में सबसे बड़ा सियासी प्लस प्वांइट उनकी उम्र और उनके एक्स सर्विस मैन होने के साथ-साथ पौंग डैम ऑस्टिज़ होना है। अभी सिर्फ 42 साल के हैप्पी एयरफोर्स से साल 2012 में सेवानिवृत्त हुए थे। घर लौटते ही हैप्पी ने दो महीने बाद विधानसभा चुनाव बतौर आजाद उम्मीदवार लड़ा और पांच हजार के करीब वोट झटक लिए थे। भाजपाई पृष्ठभूमि के रहे हैप्पी का बॉयोडाटा इसलिए भी स्ट्रांग माना जा रहा है कि वह आरएसएस और बजरंग दल में भी विभिन्न स्तरों पर काम करते रहे हैं। 

अगर धर्मशाला और पच्छाद में हुए उपचुनावों पर नजर डाली जाए तो भाजपा इस बार फतेहपुर से ऐसा नेतृत्व चाहेगी जो लंबे समय तक फतेहपुर की सीट को भाजपा की झोली में बनाए रखे।  ऐसी स्थिति में पंकज हैप्पी पर अगर सहमति बनती है तो फतेहपुर से भाजपा की नैया को पार लगेगी ही साथ ही भाजपा को एक ऐसा चेहरा मिलेगा जो स्थानीय है, निष्ठावान है,युवा है और सजग है।  बरहाल फतेहपुर सीट को लेकर भाजपा किस चेहरे पर दांव खेलती है यह आने वाला वक्त ही बताएगा। 

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