विशेष:राणा के बिना नगर निगम का रण अधूरा, भाजपा के हाथों से निकल रहा धर्मशाला

विशेष:राणा के बिना नगर निगम का रण अधूरा, भाजपा के हाथों से निकल रहा धर्मशाला

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 02 Apr, 2021 11:23 am प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा

हिमाचल जनादेश, मोनु राष्ट्रवादी (मुख्य संपादक) 


प्रदेश में आज कल नगर निगम के चुनाव जोरों पर हैं।  नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा कांग्रेस के आला नेता चारों नगर निगम में प्रचार प्रसार में जुटे हुए हैं।  आपको बता दें कि यह पहली बार है जब हिमाचल प्रदेश में नगर निगम चुनाव पार्टी चिन्हों पर हो रहे हैं ऐसे में इन चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चुनाव नतीजे 2022 के विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तय करेंगे। 

हालांकि कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार का चुनाव चिन्ह पर नगर निगम का चुनाव करवाना भाजपा के लिए घातक हो सकता है क्योंकि अगर भाजपा यह चुनाव हारती है तो उनके साढ़े तीन साल का कार्यकाल फिसड्डी साबित माना जाएगा और कांग्रेस ये चुनाव हारती है तो अगले डेढ़ बरस में वह अपने संगठन को एकजुट करने के लिए कमर कस लेगी। 

प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन पर हर वार्ड में भाजपा विधायक समेत संगठन के कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में डटे हुए हैं जिसकी की कमान जिला कांगड़ा से संबंध रखने वाले तेजतर्रार कैबिनेट मंत्री राकेश पठानिया के हाथों में है, फिर भी धर्मशाला नगर निगम की राहें भाजपा के लिए आसान नहीं दिख रही। 

सूत्रों की मानें तो धर्मशाला में नगर निगम चुनाव नहीं हो रहे बल्कि मध्यवर्ती चुनाव दौरान भाजपा के कुछ नेताओं को दरकिनार किए जाने की वजह से उनके द्वारा भड़ास निकाली जा रही है ताकि वे अपनी 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी टिकिट की राहें आसान कर सकें।  नगर निगम चुनाव धर्मशाला में भाजपा बिखरी-बिखरी नजर आ रही है जिसका एक मुख्य कारण प्रदेश भाजपा की रीड की हड्डी कहे जाने वाले प्रदेश संगठन मंत्री पवन राणा का भाग न ले पाना भी बताया जा रहा है। 

आपको बता दें यह वही पवन राणा हैं जिन्होंने भाजपा को पन्ना प्रमुख तक का संगठन दिया है।  जिनकी योजना से 1  बूथ 20 यूथ का महा अभियान भी चलाया गया है।  यह वही पवन राणा हैं जिन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव पूर्व त्रिदेव सम्मेलन की संरचना कर भाजपा को सत्ता पर काबिज करवाया था। आज उनकी कार्यशैली की कायल भाजपा उनकी सेवाएं राष्ट्रीय स्तर पर ले रही है जिसके लिए वे पिछले 2 महीने से बंगाल चुनाव में संगठन की कमान संभाले हैं।  आज भले ही धर्मशाला में भाजपा झंडों-डंडों की राजनीति बखूबी कर रही है लेकिन अंदर से भाजपा खोखली नजर आ रही है। 

तो वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री व विधायक धर्मशाला सुधीर शर्मा की तूती इन नगर निगम चुनाव में बोल रही है।  एक तरफ भाजपा का पूरा तंत्र काम कर रहा है जबकि दूसरी ओर अकेले सुधीर शर्मा डटे हैं जो कार्यकर्ताओं को एक लड़ी में पिरो कर धर्मशाला नगर निगम जीतने की राह लगभग तय कर चुके हैं। सूत्रों की माने तो धर्मशाला नगर निगम के 17 वार्डों में कांग्रेस 60% से अधिक उम्मीदवारों को जीता कर नगर निगम धर्मशाला में काबिज हो रही है। 

अब इसे सुधीर शर्मा की प्रखर योजना से जोड़ा जाएगा भाजपा में पवन राणा के चुनाव प्रचार में हिस्सा न लेने की कमी कहा जाए लेकिन जो भी हो नगर निगम धर्मशाला भाजपा के हाथों से खिसकती नजर आ रही है। 

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