चंबा:महज चुनावी स्टंट बनकर रह गए सड़क,शिक्षा और स्वास्थ्य के वादे,न स्कूलों में अध्यापक न अस्पतालों में चकित्सक

 चंबा:महज चुनावी स्टंट बनकर रह गए सड़क,शिक्षा और स्वास्थ्य के वादे,न स्कूलों में अध्यापक न अस्पतालों में चकित्सक

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 22 Feb, 2021 10:36 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा स्वस्थ जीवन

हिमाचल जनादेश,कमल ठाकुर(सह-संपादक)
 
सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य की दुहाई  देकर सत्ता में आई भाजपा अपने ही किए वादे को भूल गई है। यही कारण है कि जिला चंबा के अधिकतर स्कूल व कॉलेज बिना अध्यापकों व प्राध्यापकों के लंबे अरसे से खाली पड़े हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य के क्षेत्र में जयराम सरकार पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रही है।अधिकतर स्कूल ,कॉलेज जहां एसएमसी शिक्षकों व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के भरोसे चल रहे हैं। स्वास्थ्य संस्थान भी आशा वर्करों के भरोसे ही गतिमान हैं। ऐसे में भाजपा के इन दोनों क्षेत्रों के लिए किए वादे महज चुनावी स्टंट बनकर रह गए हैं। 

यहां यह बताना उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में स्वास्थ्य और शिक्षण संस्थानों को लेकर भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर जमकर प्रहार किया था। बिना स्टाफ के खोले गए शिक्षण संस्थानों पर भाजपा ने तत्कालीन सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। यही मुद्दा स्वास्थ्य संस्थानों को लेकर विपक्ष ने बराबर उठाया था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के रिक्त पड़े पदों को लेकर भाजपा द्वारा जगह-जगह धरना प्रदर्शन किए गए थे। भाजपा द्वारा निरंतर किए गए धरना प्रदर्शनों का प्रदेश की जनता पर व्यापक असर पड़ा नतीजतन 2017 में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। 

प्रदेश में भाजपा नेतृत्व की जयराम सरकार को बने आज करीबन साढ़े 3 वर्षों का अंतराल हो चुका है। लेकिन जिला चंबा की बात की जाए तो आज भी स्वास्थ्य और शिक्षण संस्थानों को लेकर समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। जिला चंबा के अधिकतर कॉलेज , वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाएं,उच्च पाठशालाएं, माध्यमिक पाठशालाओं के अलावा प्राथमिक पाठशालाएं बिना अध्यापकों के चल रही हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य संस्थानों का हाल भी इससे अलग नहीं है। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में कई डॉक्टरों के पद रिक्त होने के साथ साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र , प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,उप स्वास्थ्य केंद्र बिना डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ के बन्द पड़े हुए हैं। यह महज टीकाकरण के दिन ही खुलते हैं। 

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स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र की बात की जाए तो सबसे बुरा हाल विधानसभा क्षेत्र भरमौर के गैर जनजातीय क्षेत्र का है। यहां स्थित एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चूड़ी में बीएमओ का पद डेपुटेशन के आधार पर चल रहा है। इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन आते समस्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह बीमार हैं।  यहां समस्त डॉक्टरों के पद खाली हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को विभाग द्वारा एक्स रे मशीन तो दी है लेकिन जब से इस मशीन को लगाया गया है तब से इससे कोई काम नहीं लिया गया अर्थात विभाग ने मशीन तो भेज दी लेकिन रेडियोग्राफर का पद भरना ही भूल गया। दंत चिकित्सक का पद लंबे अरसे से खाली पड़ा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी भी कई बार डेपुटेशन के आधार पर ही चलाई जाती है। उप स्वास्थ्य केंद्रों व स्वास्थ्य केंद्रों में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता से लेकर सुपरवाइजर तक के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चूड़ी महज नाम का स्वास्थ्य केंद्र बनकर रह गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विपक्ष महज सवाल दागने के लिए ही होता है या जब सत्ता में आ जाएं तो उन रिक्त स्थानों को भरने का काम भी करता है। 

प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें तो आती रही लेकिन बेरोजगारी आज भी चरम पर है। चुनावी मुद्दे चुनाव जीतने के उपरांत हवा हवाई हो जाते हैं।  सैकड़ों बीएड व टेट पास सड़कों की खाक छान रहे हैं तो हजारों की संख्या में डॉक्टरी की पढ़ाई कर चुके बेरोजगार निजी क्लिनिको में अटेंडेड बन कर रह गए हैं। मुद्दों को अमलीजामा कौन सी सरकार पहनाएगी यक्षप्रश्न बनता जा रहा है।

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