पंचायती राज चुनाव: पहले चरण का मतदान आज, शाम तक हजारों के भाग्य का फैसला करेगी हिमाचली 'आवाम', बीडीसी और जिला परिषद के लिए होगा 'इंतजार' 

पंचायती राज चुनाव: पहले चरण का मतदान आज, शाम तक हजारों के भाग्य का फैसला करेगी हिमाचली 'आवाम', बीडीसी और जिला परिषद के लिए होगा 'इंतजार' 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 17 Jan, 2021 07:17 am प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा शिमला आधी दुनिया

 

हिमाचल जनादेश, नरेश ठाकुर (राज्य ब्यूरो)
पंचायती राज की त्रिस्तरीय प्रणाली में अपने भाग्य को आजमा रहे प्रदेश की 1227 पंचायतों में विभिन्न पदों पर दावेदारी पेश करने वाले प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला आज देर शाम तक होने जा रहा है। पहले चरण के  मतदान की प्रक्रिया अब ठीक 1 घंटे बाद शुरू होने वाली है। यह मतदान रविवार सुबह 8 से शाम 4 बजे तक होगा। इसके बाद एक घंटे तक कोरोना संक्रमित और होम क्वारंटीन वोट डालेंगे। राज्य चुनाव आयोग ने सभी तैयारियां कर ली हैं।

बता दें कि पहले चरण में कुल 1227 पंचायतों के लिए मतदान होगा।पंचायतों में मतदान के बाद वोटों की गिनती करेंगे और देर शाम नतीजे घोषित होंगे, जबकि बीडीसी और जिला परिषद सदस्यों का परिणाम तीसरे चरण के चुनाव के बाद 22 जनवरी को घोषित होगा। राज्य के कुल 51.44 लाख वोटर पंचायतों, पंचायत समिति और जिला परिषद के कुल 81,675 प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। प्रदेश में तीसरे चरण के लिए कुल 337 पंचायतों में चुनाव 21 जनवरी को होगा। इन पंचायत क्षेत्रों में रविवार को प्रचार थमेगा।

19 जनवरी मतदान वाले अब घर घर जाकर लुभाएंगे वोटर्स को  
दूसरी ओर, प्रदेश की 1208 पंचायतों में दूसरे चरण के चुनाव के लिए शनिवार शाम 4 बजे से प्रचार थम गया है। इसके साथ ही इन पंचायत क्षेत्रों में प्रत्याशी अब घर-घर जाकर वोटरों से संपर्क साध सकेंगे। इन पंचायतों में मतदान 19 जनवरी को होगा। पहले चरण से मतदान के लिए 7593 पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों में तैनात रहेंगे। राज्य में 972 अतिसंवेदनशील, 2830 संवेदनशील और साधारण 7744 मतदान केंद्र बने हैं। प्रदेश भर की कुल 3583 पंचायतों में तीन चरणों में चुनाव होना है।  

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कयामत वाली रात में भी खूब चले 'तिकड़म'
गौरतलब है कि पंचायती राज चुनावों में मतदान से पहले वाली रात चुनाव में उतरे प्रत्याशियों के लिए खास अहम रखती है। इसी रात में तिकड़मबाजियां करके विरोधियों के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम होता है। हारी हुई बाजी वाला भी समुदाय, जाति या व्यक्तिविशेष को अपने खेमे में मिला कर अपने प्रतिद्वंदी की जीत को हार में बदलता है। शनिवार रात को भी ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी हलचल देखने को मिली। जिसमें कोई मतदाता के पांव पकड़कर तो किसी किसी और 'तिकड़म' से वोटों की राजनीति करते रहे।
 

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