गुटबाजी: पूर्व सीएम हरीश रावत की नाराजगी से कांग्रेस में सामूहिक नेतृत्व को लेकर बढ़ रहा टकराव

गुटबाजी: पूर्व सीएम हरीश रावत की नाराजगी से कांग्रेस में सामूहिक नेतृत्व को लेकर बढ़ रहा टकराव

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 15 Jan, 2021 08:14 am राजनीतिक-हलचल देश और दुनिया सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर आधी दुनिया



हिमाचल जनादेश, शंभू नाथ गौतम (वरिष्ठ पत्रकार)

उत्तराखंड कांग्रेस में इन दिनों उथल-पुथल का माहौल पूरे चरम पर है। पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के दिग्गज नेता ने ही अपनी पार्टी पर सवाल उठाए हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस केे महासचिव हरीश रावत की। पार्टी के प्रति की हरीश की यह नाराजगी कोई आज की नहीं है बल्कि एक सप्ताह पहले जब उन्होंने अपनी उपेक्षा किए जाने पर सोशल मीडिया पर पीड़ा बयां की थी। इसके बाद से ही उत्तराखंड कांग्रेस दो गुटों में बंटी नजर आ रही है।

आइए आपको बताते हैं हरीश रावत की कांग्रेस के प्रति नाराजगी की वजह क्या है, और कहां सेे शुरू हुई। अभी पिछले हफ्ते उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी देवेंद्र यादव जब दौरे पर आए थे तब उस दौरान सामूहिक नेतृत्व और मुख्यमंत्री पद के नेतृत्व को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट डालकर देवभूमि की राजनीति गरमा दी थी । उसके बाद पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री का यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता चला गया । बता दें कि पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में बैनरों से पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत के फोटो हटाने पर कांग्रेस पदाधिकारियों और रावत समर्थकों ने नाराजगी जताई थी । कांग्रेस नेतृत्व एक ओर जहां अगले साल होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियों में जुटा हुआ है वहीं दूसरी ओर पार्टी दो गुटों में बंटती जा रही है ।

 

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मुझे अपनी ही पार्टी ने सामूहिक नेतृत्व के लायक नहीं समझा: रावत

पिछले सप्ताह कांग्रेस में उठा तूफान लग रहा था कि शांत हो जाएगा लेकिन हरीश रावत ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर अपनी ही पार्टी पर हमला बोला है ।‌ उन्होंने अपनी पीड़ा को ट्विटर हैंडल के जरिए लोगों के सामने रखा। जिससे एक बार फिर कांग्रेस में बगावती स्वर दिखने लगे हैं । 'पूर्व सीएम रावत ने प्रदेश स्तर पर अपनी उपेक्षा के सारे मामले गिनाए और कहा कि पार्टी ने मुझे सामूहिकता के लायक नहीं समझा'। हरीश ने ट्वीट करके लिखा कि यह उसी दिन स्पष्ट हो गया था, जब प्रदेश कांग्रेस के नवनिर्वाचित सदस्यों व पदाधिकारीयों की पहली बैठक हुई थी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उस बैठक में मंच पर मुझे जिंदाबाद बुलवाने के लायक नहीं समझा। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने संगठन को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि संगठन में कुछ नामों की संस्तुति को लेकर भी एआइसीसी का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उस समय सामूहिकता की बात क्यों नहीं की गई। पूर्व सीएम हरीश रावत ने लिखा कि पार्टी के आधिकारिक पोस्टरों में मेरा नाम और चेहरा नहीं था।

 

कांग्रेस के साथ किसानों के हल्ला बोल कार्यक्रम में पूर्व सीएम नहीं होंगे शामिल
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी इस पोस्ट में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का फिर जिक्र किया। रावत ने लिखा कि प्रदेश में जगह-जगह जन आंदोलन हो रहे हैं। कांग्रेस को उन जनसंघर्षों के साथ जोड़ने के लिए जरूरी है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश वहां पहुंचें और शामिल लोगों का मनोबल बढ़ाएं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने किसानों के आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस के 15 जनवरी को प्रस्तावित राजभवन कूच में शामिल होने से इनकार किया है । पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह शुक्रवार को कुमाऊं के कुली बेगार आंदोलन के बलिदानी किसानों की याद में एक घंटे के उपवास पर बैठेंगे। यहां आपको बता दें कि उत्तराखंड कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने एक और पोस्ट कर पार्टी के अंदरूनी कलह को बढ़ा दिया है।

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