लोहड़ी पर्व पर विशेष: चंबा लोहड़ी पर्व का है एक अनूठा 'इतिहास' 

लोहड़ी पर्व पर विशेष: चंबा लोहड़ी पर्व का है एक अनूठा 'इतिहास' 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 14 Jan, 2021 06:36 am प्रादेशिक समाचार धर्म-संस्कृति सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश, एमएम डैनियल(संपादक)
पंजाब राज्य की भांति राज्य के जिला चंबा मुख्यालय में भी लोहड़ी पर्व का बड़ा महत्व है। जिसे कि रियासतकाल से प्राचीन रीति-रिवाजों को निर्वाह कर मनाया जाता है। वक्त के साथ-साथ पर्व की पंरपरा से जुड़ी हिंसक वारदातों को देखते हुए जहां पुलिस सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त गत सालों से किया है तो वहीं गत वर्ष पशु बलि प्रथा प्रतिबंध एक्ट भी इस पर्व में जुडने से परंपरा के इतिहास में एक बड़ा परिवर्तन दर्ज हुआ है। 

गौर हो कि  रियासत काल में यहां पर्व के दौरान मढ़ियों (चबूतरा) के कब्जे को लेकर अगर मारपीट में किसी की जान भी चली जाए तो राजा की ओर से एक खून माफ होता था। चंबा मुख्यालय में करीब चार सौ 45 सालों से चली आ रही यह परंपरा प्रतीक के तौर पर अभी कायम है। आज भी मढ़ियों को लेकर यहां मारपीट होती है। कई लोगों के सिर फूटते हैं, पुलिस का भी कड़ा पहरा रहता है। रियासतकाल से वार्ड सुराड़ा क्षेत्र में स्थित मढ़ी को राज मढ़ी का दर्जा है। जबकि मुख्यालय के अन्य कुछ वार्डों में  में 13 अन्य मढ़ियां हैं। मकर संक्रांति से एक दिन पहले 13 जनवरी की रात को सुराड़ा क्षेत्र के लोग राज मढ़ी की प्रतीक मशाल को हर मढ़ी में लेकर जाते हैं। जोकि लगभग 20 फिट लंबे लकड़ियों के गठ्ठे को मशाल के रूप में एक के बाद एक मढ़ी में गाड़कर कब्जा दशार्या जाता है। कब्जा करने के लिए दोनों क्षेत्रों के लोगों में मारपीट होती है। डंडों और धारदार हथियारों से एक-दूसरे पर हमला होता है। 

वर्ष 1573 में चंबा के तत्कालीन राजा प्रताप सिंह वर्मन के आदेश पर अगर मारपीट में किसी की जान भी चली जाए तो उस व्यक्ति को एक खून माफ होता था।  बनारस से बंगाली ब्राह्मणों को चंबा लाए। दंतकथा के अनुसार उस दौरान कई ब्राह्मणों की मौत हो गई और उनकी आत्माएं चंबा शहर में आतंक मचाने लगीं। इसके बाद किसी की सलाह पर चंबा के राजा ने चौदह मढ़ियां स्थापित कीं। इनमें एक राज मढ़ी कहलाती है, जबकि अन्य मढ़ियों को स्त्री रूप माना जाता है। इस परंपरा को निभाने के लिए अभी भी मारपीट होती है, कई लोगों के सिर फटते हैं, लेकिन कोई पुलिस में शिकायत नहीं करता। जिसकी एक वजह मढ़-मढ़ियों के इस संघर्ष में शहर की गलियों में जो खून बहता था, उससे ये आत्माएं संतुष्ट होती थीं। इससे पूरा वर्ष शहर में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहता था। 

 

एक नजर इधर भी:-महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को धमकाने वाले भगोड़े ठग सिद्धांत पर कसा कानून का 'शिकंजा', मिला 3 दिन का रिमांड

लोहड़ी पर किए हैं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम : शर्मा 
लोहड़ी पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। लोहड़ी पर्व पुलिस की देखरेख में होगा। जिसमें हिंसक वारदातों पर काबू पाने सहित पुलिस को बलि प्रथा पर नजर रख उचित कार्रवाई अमल में लाने के निर्देश दिये है। -रमन कुमार शर्मा पुलिस अधीक्षक चंबा।

Comments

Leave a comment

What's on your mind regarding this news!

Your comment *

No comments yet. Be a first to comment on this.