राजनीतिक विश्लेषण: भटियात में किसकी हिल रही है जड़ें और कौन अंदरखाते कर रहा है बड़ा झोल, पूरा मामला जाने हिमाचल जनादेश की इस खास रिपोर्ट में

राजनीतिक विश्लेषण: भटियात में किसकी हिल रही है जड़ें और कौन अंदरखाते कर रहा है बड़ा झोल, पूरा मामला जाने हिमाचल जनादेश की इस खास रिपोर्ट में

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 01 Dec, 2020 07:10 am प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा शिमला आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश, नरेश ठाकुर (राज्य ब्यूरो)

भाजपा का गढ़ माने जाने वाली भटियात विस् में आने वाले समय में किसके सितारे बुलंदियों में होंगे और किसके गर्दिश में यह तो 2022 के विस् चुनाव तय करेंगे लेकिन यहां जिस प्रकार से राजनीतिक खिचड़ी पक रही है वो फ़िलहाल कइयों के सितारों को 'गर्दिश' में डुबाने वाली है। दोनों ही बड़े राजनीतिक दलों की बात की जाएं तो उनके खासमखास लोग ऐसे मंसूबे पाले बैठे है जो 'आकाओं' पर भारी पड़ने वाले है।

बकायदा पार्टी हाईकमान के समक्ष ऐसी 'रिपोर्टें' भेजी गई है जो जमे जमाएं नेताओं के ग्रह नक्षत्र बिगाड़ने का माद्दा रखती है। यहां वामदल और भगवा एक ऐसी 'डिश' तैयार कर रहे है कि जिससे कइयों का जायका बिगड़ने वाला है। हालाँकि, पार्टी हाईकमान ऐसे सभी तथ्यों पर नजर रखे हुए है लेकिन भटियात फिर से एक बड़े उलटफेर का शिकार बन सकता है। फील्ड से जुड़े जानकार तो यहां तक बताते है कि समय रहते ऐसी घटनाओं पर नकेल नहीं कसी गई तो 'भटियात का रब ही राखा है'  पूर्व मंत्री पंडित शिव कुमार और किशोरी लाल के बाद यहां के नेता अभी महज विधायकी तक ही सीमित रखे गए है। चम्बा रियासितकालीन का हिस्सा आज भी सियासितकाल में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। 

अहम और वहम की लड़ाई पड़ेगी भारी 
गौरतलब है कि हिमाचल में चाहे कोई भी सरकार आई हो यहां के नेताओं को सिर्फ और सिर्फ उनके अहम और वहम की लड़ाई तक सीमित रखा है। यहां तक कि 1998 में धूमल सरकार के समय भी भटियात के भाजपा नेताओं को दरकिनार करके चम्बा के किशोरी लाल वैद्य को इस सीट पर लड़ाया गया और यहां के तत्कालीन नेता को 'लॉलीपॉप' देकर चुप बैठा दिया और नतीजा यह हुआ कि इसी सीट पर कब्जा करने के लिए भाजपा को 10 साल का 'इन्तजार' करना पड़ा। अब जब नेता मिला तो उसकी राह में 'कांटे बिखेरने' का काम भी कांग्रेस से ज्यादा 'भाजपा' वाले ही कर रहे है।   

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युवा 'तुर्क' दे रहे है बड़ी टक्कर 
गौरतलब है कि कांग्रेस में फिलवक्त वरिष्ठ नेता कुलदीप सिंह पठानिया अपना एकछत्र राज चला रहे है। देखा जाएं तो उनकी नई टीम में भी हर गांव से लेकर वार्ड तक के लोगों को शामिल किया गया है। वहीं बात की जाए भाजपा की तो फ़िलहाल यहां 'गुटबाजी' सिर चढ़ कर बोल रही है। धड़ों में बंटी भाजपा कैसे गुटबाजी पर नकेल कसेगी यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा पड़ा है। वहीं भाजपा के सहयोगी संगठनों की यहां से भेजी जाने वाली रिपोर्टें भी आने वाले समीकरण तय करेंगी। फ़िलहाल भटियात में चल रहा पॉलिटिकल 'फॉग' कईयों के लिए मनोरोग बना है। युवा तुर्कों को भी कैसे निपटाया जाना है इसके लिए माथापच्ची जारी है। 

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