जनादेश विशेष:पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ने रचा देशभर में शिक्षा नीति में इतिहास,नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला बना पहला राज्य 

जनादेश विशेष:पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ने रचा देशभर में शिक्षा नीति में इतिहास,नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला बना पहला राज्य 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 26 Nov, 2020 10:33 pm प्रादेशिक समाचार सुनो सरकार देश और दुनिया लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर शिमला शिक्षा व करियर

हिमाचल जनादेश, एम.एम.डैनियल(संपादक)
नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है। नई शिक्षा नीति के तहत अब नर्सरी से लेकर जमा दो कक्षा अध्ययन कर रहे जहां विद्यार्थियों को सहित कॉलेज एवं यहां तक कि एमए कक्षा उतीर्ण कर चुके सीधा पीएचडी कर सकेंगे। देश में 34 वर्षों के बाद हिंदोस्तान में शिक्षा नीति में बदलाव से पहली से 12 वीं कक्षा में केवल 12वीं कक्षा को बोर्ड परीक्षा में शामिल किया गया है। जबकि जहां कॉलेज की डिग्री 4 साल की कर दी है वहीं 4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में  एमए और फिर एमफिल नहीं बल्कि एमए के छात्र अब सीधे पीएचडी कर सकेंगे। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ने देशभर में शिक्षा नीति में इतिहास रचा है। 

गौर हो कि केंद्र सरकार द्वारा पूरें भारत वर्ष में एक पैंटन पर एक शिक्षा मानक पर सरकारी से लेकर गैर सरकारी स्कूलों को लाने के क्रम पर जहां शिक्षा नीति में परिवर्तन किया है। वहीं सरकार द्वारा सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों के शिक्षा शुल्क को भी समांतर लाने की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में सकेंत अवश्य दे दिए है। जिससे यह तय है कि आगामी कुछ माह में निजी स्कूलों पर भी केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति का चाबुक चलने वाला है। 

नई शिक्षा नीति के तहत अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा. बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो, जिसे एक सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा। वहीं 12वींं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा को सुनिश्चित किया गया है। जबकि इससे पहले 10वी बोर्ड की परीक्षा देना अनिवार्य होता था, जो अब नहीं होगा। 9वींं से 12वींं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी. स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉमूर्ले के तहत पढ़ाया जाएगा। वहीं कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी. यानि कि ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्‍लोमा, तीसरे साल में डिग्री मिलेगी। 

3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है वहीं हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी। 4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में  एमए कर सकेंगे. जबकि स्‍टूडेंट्स को  एमफिल नहीं करना होगा बल्कि एमए के बाद छात्र अब सीधे पीएचडी कर सकेंगे। 

10वीं में नहीं होगी बोर्ड परीक्षा 
स्‍टूडेंट्स बीच में कर सकेंगे दूसरे कोर्स, हायर एजुकेशन में 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 50 फीसदी हो जाएगा। वहीं नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर वो दूसरा कोर्स कर सकता है। हायर एजुकेशन में भी कई सुधार किए गए हैं। सुधारों में ग्रेडेड अकेडमिक, ऐडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल आॅटोनॉमी आदि शामिल हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स शुरू किए जाएंगे। वर्चुअल लैब्स विकसित किए जाएंगे। एक नेशनल एजुकेशनल साइंटफिक फोरम  शुरू किया जाएगा। 

 

स्कूली शिक्षा में यह हुआ सुधार
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 10+2 बोर्ड संरचना को हटाकर अब नई संरचना 5 + 3 + 3 + 4 होगी। नए दिशानिदेर्शों के अनुसार, 5 वीं तक यह प्री स्कूल होगा, 6 से 8 वीं मिडल स्कूल और 8 से 11 वीं हाई स्कूल होगा, जबकि 12 वीं से आगे ग्रेजुएशन होगा। 6 वीं कक्षा के बाद छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का चयन कर सकते हैं और 8 वीं से 11 वीं के छात्र अपनी पसंद के विषय चुन सकते हैं। सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में मेजर और माइनर विषयों का प्रावधान होगा। रट्टा लगाने के बजाय छात्र के विषय के मूल ज्ञान के टेस्ट को लक्ष्य बनाया गया है। 

यह निर्णय लिया गया है कि 5 वीं कक्षा तक शिक्षण की भाषा मातृभाषा होगी। त्रिभाषा फामूर्ला लागू होगा और उच्च शिक्षा तक संस्कृत को विकल्प के रूप में दिया जाएगा। वहीं राज्य अपनी पसंद की भाषा चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे और उन पर कुछ भी दबाव नहीं होगा। किसी छात्र के रिपोर्ट कार्ड में छात्रों के अकादमिक मार्क्स के स्थान पर छात्र की कौशल और क्षमताओं का व्यापक रिपोर्ट होगा। राष्ट्रीय मिशन का उद्देश्य बुनियादी साक्षरता और न्युमेरेसी पर ध्यान केंद्रित करना है। पाठ्यक्रम के शैक्षणिक संरचना में बड़े बदलाव के बजाय संकाय में बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं। व्यावसायिक तथा शैक्षणिक और पाठ्यक्रम सम्बन्धी तथा पाठ्येतर के बीच के सभी  तरह की बाधाओं को भी दूर किया जाएगा।

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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मुख्य पहलु
एनईपी के अनुसार, 2030 तक एसडीजी4 4 से जुडी ईसीसीई से माध्यमिक शिक्षा तक सार्वभौमिकता होगी। 2025 तक नेशनल मिशन के माध्यम से फाउंडेशनल लर्निंग और न्यूमेरसी कौशल प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एनईपी के अनुसार, 2030 तक प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तक 100% जीईडब्ल्यू होगी। 2023 तक, शिक्षकों को मूल्यांकन सुधारों के लिए तैयार किया जाएगा। समावेशी और समान शिक्षा प्रणाली के प्रावधान के लिए 2023 तक का लक्ष्य रखा गया है। बोर्ड परीक्षा में रट्टा लगाने के बजाय बच्चे के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, इसलिए मुख्य अवधारणाओं और ज्ञान के अनु प्रयोग का टेस्ट होगा। यह लक्ष्य रखा गया हैं कि हर बच्चे को अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के साथ एक कौशल प्राप्त हो। सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में सीखने के एक मानक होंगे और शुल्क भी एक समान बनाया जाएगा।

क्या कहते है शिक्षा सचिव राजीव शर्मा
शिक्षा सचिव राजीव शर्मा ने बताया कि टास्क फोर्स में शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा, वित्त, युवा और खेल सेवाएं और सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव या सचिव, स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष और हायर एजूकेशन काउंसिल के अध्यक्ष, एचपीयू के अलावा क्लस्टर विवि मंडी, तकनीकी विवि हमीरपुर के कुलपति, उच्च शिक्षा निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, एससीईआरटी सोलन और डाइट शिमला के प्रिंसिपल सदस्य होंगे। 

इसके अलावा मनोनीत सदस्यों में केंद्रीय विवि धर्मशाला के कुलपति सहित कई शिक्षकों और शिक्षाविदों को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में रोजगार चाहने वालों के स्थान पर रोजगार प्रदाताओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया है और यह नीति विद्यार्थियों को रटने की आदत से समीक्षात्मक सोच की ओर अग्रसर करेगी। इस नीति में नए पाठ्यक्रम ढांचे की अवधारणा भी की गई हैं।

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