हिमाचल जनादेश कोविड-19 विशेष समाचार: रूस और भारत कर रहा है कोरोना वैक्सीन बनाने पर तीव्रता से कार्य

हिमाचल जनादेश कोविड-19 विशेष समाचार: रूस और भारत कर रहा है कोरोना वैक्सीन बनाने पर तीव्रता से कार्य

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 25 Nov, 2020 11:03 am देश और दुनिया सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर स्वस्थ जीवन आधी दुनिया

 

हिमाचल जनादेश, एम.एम.डैनियल(संपादक)


विश्व के विकसित देशों में रूस देश ने कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप से चिंतित एवं इसके तोड़ यानि वैक्सीन इजात करने का दावा कर इसके ट्रायल में जुटा हुआ है। वहीं भारत भी इस महामारी की भयंकर परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने के लिए जहां कोविड-19 नियमों को स्वदेश में लागू कर रहा है। तो वहीं हिंदोस्तान में भी कोरोना वैक्सीन तैयार करने में  दिन-रात जुटने सहित लगातार परीक्षण कर रहा है। ताकि इस महामारी के प्रकोप से दुनियां भर के लोगों को बचाया जा सके। 
 

गौर हो कि कोरोना महामारी रोग के उपचार को लेकर हालांकि अमेरिका, चीन, सहित रूस देश गत कई माह से कार्य कर रहे है। जिसमें अगर रूस देश की बात करें तो रूस की सरकारी शोध संस्था गैमलिया अनुसंधान केंद्र और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष इसे मिलकर बना रहे हैं। दोनों संस्थाओं सहित रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एक बयान में कहा गया है कि यह आकंलन 42 दिन पहले दिए गए डोज के बाद इकट्ठा किए गए। प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर किया गया है। रूस में बन रही कोरोना की वैक्सीन स्पुतनिक वी-95 फीसदी प्रभावी पाई गई है। इस वैक्सीन को बना रहे डेवलपर्स ने जानकारी दी कि इस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों पर किए गए दूसरे अंतरिम विश्लेषण में यह वैक्सीन स्पुतनिक वी-95 फीसदी प्रभावी पाई गई है।
 

वहीं विकसित देशों में शुमार हो चुके भारत देश ने भी कोविड-19 के अन्य टेस्ट एवं सुरक्षा किटों की भांति स्वदेश में ही कोरोना वैक्सीन इजात करने का दावा किया है। जिसमें सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया का दावा है कि 'वो आज भी हर महीने 50 मिलियन से 60 मिलियन वैक्सीन डोज बनाने की स्थिति में है। भारत के इस संस्थान के मुताबिक, फरवरी 2021 तक उनकी क्षमता 100 मिलियन वैक्सीन डोज प्रति माह बनाने की हो जाएगी। भारत सरकार से सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया का किस तरह का करार है, इस पर अभी तक दोनों पक्षों ने कुछ साफ नहीं किया है। लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने इतना जरूर कहा है कि 'भारत सरकार ने जुलाई 2021 तक उनसे 100 मिलियन वैक्सीन डोज की मांग की है। जबकि जुलाई 2021 तक केंद्र सरकार ने 300 मिलियन वैक्सीन डोज जनता तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा सीरम इंस्टीट्यूट, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पूरी दुनिया में वैक्सीन पहुँचाने के लिए की जा रही पहल को वैक्स' का भी हिस्सा है। उन्होंने वहां भी अपनी तरफ से वैक्सीन देने का वादा किया है ताकि हर देश के जरूरतमंदों तक वैक्सीन पहुंच सके।

एक नज़र इधर भी:-RIP. Ahmad Patel : कांग्रेस के संकटमोचक का तड़के साढ़े 3 बजे निधन, पूरी खबर पढ़े यहां


भारत में इस वक़्त पाँच अलग-अलग कोरोना वैक्सीन के ट्रायल चल रहे हैं। इनमें से दो तीसरे और एडवांस स्टेज में हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ने आॅक्सफोर्ड वैक्सीन के अलावा, दुनिया भर में बन रहे चार और वैक्सीन बनाने वाली संस्थाओं के साथ वैक्सीन के उत्पादन का करार किया है। अदार पूनावाला कहते हैं, हमारा करार जिनके साथ हुआ है, उनमें से कुछ ऐसी वैक्सीन हैं जिनके एक डोज लगाने से भी कोरोना से बचाव संभव है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हर वैक्सीन के बनाने का तरीका अलग है। उनका मानना है कि आने वाले एक साल तक हर तीन से चार महीने के बीच एक नई वैक्सीन बाजार में आयेगी। ये जनता और सरकार पर निर्भर करेगा कि वो कौनसी वैक्सीन लगवाना चाहते हैं। इसकी शुरूआत जनवरी 2021 से होगी, जब आॅक्सफोर्ड वैक्सीन के बाजार में आने की संभावना जताई जा रही है। अगर दो-तीन शुरूआती वैक्सीन कारगर साबित होती हैं, तो सीरम इंस्टीट्यूट बाकि वैक्सीन का उत्पादन नहीं करेगा। इसके अलावा भारत में कई दूसरे वैक्सीन निमार्ता भी हैं, जो वैक्सीन उत्पादन के काम में जुटे हैं और उन्होंने दुनिया के दूसरे देशों में चल रहे वैक्सीन बनाने वालों के साथ करार किया है। रूस की वैक्सीन का भी भारत में ट्रायल किये जाने की संभावना जताई जा रही है।

Comments

Leave a comment

What's on your mind regarding this news!

Your comment *

No comments yet. Be a first to comment on this.