हिमाचल जनादेश विशेष: फ़िलहाल दुश्मनों की जगह 'दोस्तों' को ही ज्यादा निचोड़ने में व्यस्त है 'भाजपा'

हिमाचल जनादेश विशेष: फ़िलहाल दुश्मनों की जगह 'दोस्तों' को ही ज्यादा निचोड़ने में व्यस्त है 'भाजपा'

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 25 Nov, 2020 08:54 am प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल देश और दुनिया सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश, नरेश ठाकुर (राज्य ब्यूरो)
 
1999 से 2004 तक के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई सरकार के विदेश मंत्री जसवंत सिंह के यह बोल कि 'भाजपा दोस्तों और दुश्मनों को तब तक निचोड़ती है जब तक जान निकल न जाएं' मौजूदा समीकरणों पर सटीक बैठ रहे है। बात की जाएं शांत प्रदेश हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक घटनाक्रमों की तो इससे प्रदेश का एक तबका कॉर्पोरेट बने भाजपा कल्चर से खफा है। चाहे सीयू हो, पठानकोट-मंडी फोरलेन समेत अन्य बड़े प्रोजेक्टों पर लेटलतीफी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ कर महज जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाने का असफल प्रयास साबित हुआ है।वहीं बैठे बैठे विपक्ष को एक बार फिर सरकार पर हमलावर होने का अवसर मुहैया करवाया गया है। 

 

कांगड़ा, हमीरपुर और बिलासपुर में पक रही खिचड़ी क्या रंग दिखाएगी यह तो 2022 के चुनाव ही बताएंगे लेकिन फ़िलहाल कईयों की रात की नींद उड़ा कर रख दी है। बहरहाल, लोकसभा, उपचुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों की ही राजनितिक जमीं हिलाने में 'व्यस्त' युवा और वरिष्ठ नेता फिलवक्त किसकी कब्र खोद रहे है यह हर नुक्क्ड़ चौराहों में चर्चा का विषय बना है। वहीं शरीफ और साधारण छवि वाले सीएम जयराम ठाकुर के प्रति समाज के मध्यम और निम्न लोगों की सहानुभूति फ़िलहाल अपने 'चरम' पर है। यहां तक की सरकार को कोसने वाले भी अंत में सीएम के प्रति आदर प्रकट करने से नहीं चूक रहे है। 

आत्मघाती बन सकती है बार बार सीएम की उपेक्षा 
पिछले एक साल में 2 बार मोदी टीम के 2 अहम लोगों द्वारा सीएम जयराम ठाकुर की भरे मंच में उपेक्षा करना हिमाचल के एक वर्ग में 'टीस' का सबब  बनती है। भले ही सीएम हमेशा उन घटनाओं पर अपनी चुपी साध लेते है लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावर्ती फ़िलहाल घातक होने वाली है। पार्टी हाईकमान के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक ऐसे घटनाक्रमों पर पूरी नजर रखी जा रही है। पूरी फीडबैक लेकर उसकी रिपोर्ट बड़े दरबार में भेजी जाएगी। हालाँकि, पहले सीएम जयराम ठाकुर से राज्य वित्त मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा हाथ न मिलाने वाली घटना को 'एक्सीडेंटल' करार दिया था। इसके ठीक एक साल बाद बिलासपुर में सीएम को सम्बोधन का मौका न मिलना एक तरह से संस्कारों की दुहाई देने वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं को सोचने पर मजबूर करता है। 

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1980 में जनता पार्टी खत्म होने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने पूर्व जनसंघ के नेताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी का निर्माण किया। 1984 के लोकसभा चुनावों में केवल दो सीटें जीतने वाली पार्टी 1996 के संसदीय चुनावों में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और वाजपेयी के नेतृत्व में 13 दिनों की सरकार बनी। फिर 1998 में भाजपा के नेतृत्व में केंद्र में बनी एनडीए सरकार एक वर्ष चली। हालांकि इसके बाद 1999 में हुए संसदीय चुनावों में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला और वाजपेयी के नेतृत्व में बनी सरकार पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाली पहली गैर कांग्रेसी सरकार साबित हुई। हालाकि 2004 के आम चुनाव में भाजपा को हार खानी पड़ी और अगले 10 वर्षों तक उसने संसद में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाई। 

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