अगले दलाई लामा को चुनना तिब्बती बौद्धों का काम, चीन के पास हस्तक्षेप करने के लिए कोई 'धार्मिक आधार' नहीं

अगले दलाई लामा को चुनना तिब्बती बौद्धों का काम, चीन के पास हस्तक्षेप करने के लिए कोई 'धार्मिक आधार' नहीं

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 20 Nov, 2020 03:56 pm प्रादेशिक समाचार सुनो सरकार देश और दुनिया धर्म-संस्कृति लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा

हिमाचल जनादेश,भागसूनाग(करतार चंद गुलेरिया)


अमेरिकी राज्य विभाग में अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के कार्यालय के प्रमुख राजदूत सैम ब्राउनबैक  ने अगले दलाई लामा को चुनने में चीन के हस्तक्षेप का विरोध करते हुए कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका समर्थन करता है कि किसी भी धार्मिक समुदाय को अपना नेतृत्व चुनने का अधिकार है। और इस में अगले दलाई लामा का चुनना निश्चित रूप में शामिल है।
राजदूत ब्राउनबैक  धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता के लिए 2020 के मंत्री स्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए  कही ।उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों का जवाब देते हुए कहा कि विशेष रूप से चीन में उइगर, तिब्बती बौद्ध, ईसाई और फालो गोंग, आदि  धर्मों के उत्पीड़न हो रहा है ।

उन्होंने खासकर चीन में उइगुरों मुसलमानों की हालत का जिक्र किया चीन में उइगुरों के लिए डिटेंशन कैंप का निर्माण किया गया है। जहां उइगुरों को कैद करके रखा जाता है। उन्हें किसी भी तरीके की धार्मिक चीजों का पालन करने की अनुमति नहीं है। उइगुरों को दाढ़ी रखने और धार्मिक अनुष्ठान करने तक पर पाबंदी है। 
अगले दलाई लामा के पुनर्जन्म लेने के अधिकार पर चीन के बार-बार दावे पर, अमेरिकी राजदूत ने जोर देकर से कहा कि अगले दलाई लामा के पुनर्जन्म की बात केवल तिब्बती बौद्धों की चिंता है और चीन के पास हस्तक्षेप करने के लिए कोई 'धार्मिक आधार' नहीं है।

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उन्होंने कहा कि धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता का मंत्री स्तरीय सम्मेलन दुनिया भर के नेताओं को धार्मिक स्वतंत्रता के साथ आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए एक साथ लाता है, दुनिया भर में धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव को संबोधित करने का मतलब है, और सभी के लिए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिक सम्मान और संरक्षण को बढ़ावा देता है।

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