जनादेश विशेष:लोगों की परेशानी का सबब बने बेसहारा पशु, सोचने पर मजबूर कर सकते हैं आपको पशु गणना के आंकड़े

जनादेश विशेष:लोगों की परेशानी का सबब बने बेसहारा पशु, सोचने पर मजबूर कर सकते हैं आपको पशु गणना के आंकड़े

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 18 Nov, 2020 09:28 pm प्रादेशिक समाचार क्राईम/दुर्घटना सुनो सरकार लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा

हिमाचल जनादेश,नरेश ठाकुर(राज्य ब्यूरो)
 

लोगों की परेशानी का सबब बने बेसहारा पशुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रदेश की पशु गणना की रिपोर्ट में जानकारी सामने आई है कि काफी संख्या में पशुओं को सड़कों पर खुले में छोड़ दिया जाता हैं। हर 5 साल में पशु गणना कराई जाती है। 2017 में पशु गणना संबंधी प्रक्रिया शुरु हो गई थी। 

गणना में गड़बड़ी रोकने के लिए पहली बार टेबलेट का इस्तेमाल किया गया तथा 2019 में यह गणना संपन्न करवा ली गई। प्रदेश की पशु गणना की रिर्पोर्ट के अनुसार बेसहारा पशुओं की संख्या में 12.91 फीसदी की बढ़ौतरी हुई है। 2012 में हुई 19वीं पशु गणना में प्रदेश में बेसहारा पशुओं की संख्या जहां 32160 थी तो अब 20वीं पशु गणना में यह संख्या बढ़कर 36311 तक पहुंच गई है। यानी की इस समय अवधि में बेसहारा पशुओं की संख्या में लगभग 12.91 फीसदी बढ़ौतरी हुई है।

19वीं गणना में जहां कैटल की संख्या 2149259 थी। अब यह कम होकर 1828017 पहुंच गई। 14.95 फीसदी कमी आई है। भैंसों की संख्या में 9.70 फीसदी कमी आई है। 19वीं गणना में जहां यह संख्या 716016 थी तो 20वीं गणना में यह संख्या 646565 रह गई। याक की संख्या में 33.58 फीसदी की कमी आई। 19वीं गणना में याक की संख्या 2921 थी। 20वीं गणना में यह संख्या 1940 रह गई। भेड़ों की संख्या में 1.68 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। 

बकरी में 0.99 फीसदी, घोड़े व पोनी में 41.31 फीसदी की कमी, गधे की संख्या में 34.73 फीसदी कमी, ऊंटों की संख्या जहां 177 थी अब यह कम होकर 26 रह गई। 85.31 फीसदी की कमी आई है। आवारा कुत्तों की संख्या में भी बढ़ौतरी हुई है। 2012 में हुई गणना के तहत जहां प्रदेश में 65220 आवारा कुत्ते थे, अब 20वीं गणना में यह संख्या बढ़कर 76933 तक पहुंच गई है। इस समय अवधि में लगभग 17.96 फीसदी बढ़ौतरी हुई है।

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आधुनिकरण की तरफ बढ़ता किसान आज बैलों को छोड़कर ट्रेक्टर के सहारे हो गया है। खाद की जरुरत को पूरा करने के लिए किसान यूरिया और कैन पर  हैं ऐसे में पशुधन रखना अब उनकी जरुरत नहीं रह गयी। लोगों की दूध की जरूरतें अब डब्बा पैक दूध से हो रही हैं इसलिए लोग गाये पालने के झंझट से बचना छह रहे हैं। 

कहने को तो सरकार आवारा पशुओं के लिए गौसदन बनाने के लिए करोड़ों खर्च करने का दावा करती है लेकिन जमीनी हकीकत का पता तब चलना है जब आप रात को गाडी लेकर सड़क पर निकलते हैं जहाँ सैकड़ों आवारा पशु आपकी  कारण बनते- बनते रह जाते हैं। 

गौमाता के नाम पर कई संस्थाएं काम कर रही हैं ,अधिकतर धार्मिक संस्थाएं भी पशु तस्करी के नाम पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने तक ही सीमित रह गयी हैं। गौ सदन के नाम पर मिलने वाला पैसा भी धरातल पर सही इस्तेमाल हो रहा है इसपर भी अब प्रश्नचिन्ह लगने लगा है। 
 
पशुपालन विभाग के निदेशक डा. अजमेर डोगरा ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा बेसहारा पशुओं के लिए गौसदन बनाए गए हैं जिनमें पशुओं को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। किसानों को बेसहारा पशुओं से निजात के लिए सरकार द्वारा कई स्कीमें चलाई गई हैं तथा जिनका लाभ पशुपालक ले रहे हैं।

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