रहस्य स्टोरी:यहां मौजूद है, प्राचीन व दुर्लभ पंचजन्य शंख,और हिमाचल का एकमात्र पंचमुखी शिवलिंग मन्दिर

रहस्य स्टोरी:यहां मौजूद है, प्राचीन व दुर्लभ पंचजन्य शंख,और हिमाचल का एकमात्र पंचमुखी शिवलिंग मन्दिर

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 17 Nov, 2020 06:32 am प्रादेशिक समाचार देश और दुनिया धर्म-संस्कृति सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश, सोलन (योगेश)

■वहीं पंचजन्य शँख जिसे भगवान श्री कृष्ण ने बजाया था, निकलती है एक साथ पांच ध्वनियां।
■ इस मंदिर में सात द्वार खुलने पर दर्शन होते है भगवान चतुर्भुज श्री विष्णु जी के....

हिमाचल के सोलन जिला में मौजूद है करीब 1200 साल पुरानी पंचमुखी शिवलिंग...ऐसा ही शिवलिंग नेपाल के पशुपतिनाथ और पुष्कर में है मौजूद है। मान्यता के अनुसार सात द्वार खुलने पर परमब्रह्म के दर्शन होते है,उसी तरह इस मंदिर में भी सात द्वार खुलने पर भगवान श्री चतुर्भुज विष्णु जी के दर्शन होते है।जिला सोलन से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बघाट रियासत की पहली राजधानी जौणाजी में स्थित भगवान श्री चतुर्भुज विष्णु जी का मंदिर जहां आज भी अति दुर्लभ और प्राचीन पंचजन्य शँख मौजूद है ये वहीं शँख है जिसे भगवान विष्णु जी के हाथों में देखा जा सकता है, ये वहीं शँख है जिसे महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण जी ने बजाया था।

जौणाजी बघाट रियासत के राजाओं ने बसाई थी रियासत 
पौराणिक गाथाओं की माने तो जौणाजी बघाट रियासत के राजाओं द्वारा बसाई गयी राजधानी थी,जिसे उन्होंने मुगलों के डर से यहां बनाया था।सोलन रियासत के प्रथम राजा जामवन्त द्वारा जौणाजी मंदिर में स्थापित की गई चतुर्भुज भगवान श्री विष्णु जी की मूर्ति, पंचजन्य शंख व कई अन्य दुर्लभ यादे अपने आँचल में संजोए हुए हैं, जो आज भी मंदिर में विद्यमान है। गौरतलब है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों के माध्यम से पूजाएं करवाई जाती है और प्रत्येक पूजा में अलग अलग शंखनाद किए जाते हैं। स्वयं चतुर्भुज भगवान श्री विष्णू जी का भी यही अलंकार है। शंख अनेक प्रकार के होते है, जिनमें से पंचजन्य शंख अति प्राचीन और दुर्लभ है। ऐसा ही पंचजन्य शंख बघाट रियासत सोलन के जौणाजी स्थित प्राचीन श्री विष्णू जी के मंदिर में आज भी विराजमान है।


         
क्या है पंचजन्य शँख
यह वही प्राचीन शंख है, जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत गीता के प्रथम अध्याय में भी मिलता है। महाभारत युद्ध मे पंचजन्य शंख भगवान श्री कृष्ण ने बजाया था। जिसमें से एक साथ पांच ध्वनियां निकलती है और अलग-अलग ध्वनि भी निकाली जा सकती है। 

 
क्या कहते है मन्दिर के पुजारी
धारानगरी राजस्थान से राजा के साथ आए कुल पुरोहित पुजारी रमेश शर्मा वंशज परम्पराओं को निभाते आ रहे है। मंदिर मे इस प्राचीन परम्परा को बरकरार रखने वाले पुजारी रमेश दत्त शर्मा ने बताया कि महाभारत के युद्ध मे भगवान श्री कृष्ण ने भी पंचजंय शंख बजाया था। यह भी उसी प्रकार का शंख है। पुजारी ने कहा कि इस शंख से पांच प्रकार की ध्वनि निकलती है और ये मेरा सौभाग्य है कि जो मुझे इस ऐतिहासिक शंख को बजाने का सुअवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस पंचजन्य शंख को हर कोई नही बजा पाता है।उन्होंने बताया कि जौणाजी जी का ये मन्दिर करीब 600 साल पुराना है, जो कि बघाट रियासत के राजाओं द्वारा बनाया गया था। भगवान विष्णु जी बघाट रियासत के राजाओं के इष्ट देव है।जौणाजी के ऐतिहासिक भगवान श्री विष्णु जी के मंदिर मे कई अन्य प्राचीन वस्तुए जैसे बड़ा कड़ाह, पीतल की टोकनी, दो छोटी कलात्मक सुराहियां और लोटा इत्यादि धरोहर के रूप मे संजोकर रखी गई है।


 

मन्दिर के बारे में क्या कहते हैं साहित्यकार
साहित्यकार मदन हिमाचली की माने तो जौणाजी में बना ये मन्दिर करीब 600 साल पुराना है जिसे बघाट रियासत के राजाओं द्वारा मुगलों के डर से यहां बनाया गया था। मन्दिर में स्थापित भगवान विष्णु जी की मूर्ति की अगर बात की जॉये मुगलों के डर से पहले राजाओं द्वारा इसे किसी समुद्र में छिपाया गया था,उसके बाद दृष्टांत आने पर मन्दिर बनाया गया था और मन्दिर में मूर्ति को स्थापित किया गया।मान्यता के अनुसार सात द्वार खुलने पर परमब्रह्म के दर्शन होते है,उसी तरह इस मंदिर में भी सात द्वार खुलने पर भगवान श्री चतुर्भुज विष्णु जी के दर्शन होते है।

 

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मन्दिर में मौजूद है पंचमुखी शिवलिंग
पौराणिक गाथाओं की माने तो चतुर्भुज  भगवान श्री विष्णु जी के मन्दिर के साथ हमेशा भगवान शिव का मंदिर भी होता है। वहीं जौणाजी में स्थित विष्णु मंदिर के साथ शिव मंदिर भी मौजूद है।जौणाजी में स्थित शिव मंदिर अनोखा है,ये इसलिए क्योंकि यहां शिव मंदिर में पंचमुखी शिवलिंग मौजूद है जो कि पंचतत्व को दर्शाता है। मन्दिर में स्थित शिवलिंग करीब 1200 साल पुरानी है,जो कि शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। स्थानीय लोगो की माने तो मन्दिर में स्तिथ शिवलिंग करीब 1200 साल पुरानी है,जो कि हिमाचल का एक मात्र शिव मंदिर है जहां पंचमुखी शिवलिंग है, पंचमुखी शिवलिंग की अगर बात की जॉये तो ऐसा ही शिवलिंग पुष्कर और नेपाल पशुपतिनाथ में भी मौजूद है।

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