कांग्रेस शासित राज्य सरकारों के साथ राज्यपालों को नैतिकता के साथ बनाने होंगे अच्छे रिश्ते 

कांग्रेस शासित राज्य सरकारों के साथ राज्यपालों को नैतिकता के साथ बनाने होंगे अच्छे रिश्ते 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 21 Oct, 2020 02:12 pm राजनीतिक-हलचल देश और दुनिया लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर स्वस्थ जीवन आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश,शंभू नाथ गौतम,वरिष्ठ पत्रकार

आज बात करेंगे देश में कांग्रेस शासित राज्य सरकारों की।‌दूसरे दलों की राज्य सरकारों के लिए केंद्र सरकार का राज्यपालों के ऊपर इतना दबाव बढ़ जाता है कि राजनीति की मर्यादा और नैतिकता भी पीछे छूट जाती हैं।

पिछले दिनों महाराष्ट्र में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच 'हिंदुत्व' को लेकर हुए टकराव की तपिश अभी बुझी भी नहीं थी कि दो राज्यों में राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के आपसी मतभेद की नौबत आ गई।‌कांग्रेस की राज्य सरकारें राज्यपाल के आचरण को लेकर सवाल उठा रही हैं।

ये राज्य हैं पंजाब और छत्तीसगढ़।दोनों में कांग्रेस की चुनी सरकारें हैं।टकराव की सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार के द्वारा  बनाया गया कृषि कानून है।'कृषि कानून को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के राज्यपालों से सियासी रिश्तो में दरार आ गई है' ।

पहले बात करेंगे पंजाब की।सोमवार को जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार को सीधे चुनौती देते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कृषि संबंधी 4 विधेयकों को पारित करा लिया।मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का यह आक्रामक अंदाज पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को नागवार गुजरा।अब राज्यपाल को कैप्टन अमरिंदर सिंह के विधानसभा में कृषि संबंधी बिलों को मंजूरी देने के लिए केंद्र के निर्देशों का इंतजार हो रहा है।बदनौर के इस आचरण के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी राज्यपाल और मोदी सरकार से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं । 

अमरिंदर सिंह ने कहा, पंजाब के राज्यपाल को जनता की आवाज सुनना चाहिए---
बता दें कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर से मुलाकात की।इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को कृषि कानूनों के खिलाफ पारित विधेयकों एवं विधानसभा में अपनाए गए प्रस्ताव की प्रति सौंपी।'मुख्यमंत्री अमरिंदर ने कहा कि अगर राज्यपाल और केंद्र सरकार इस विधेयक को मंजूरी नहीं देते हैं उनकी सरकार कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेगी, मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अपनी सरकार को बर्खास्‍त किए जाने से नहीं डरता।

इस्‍तीफा जेब में है, इसलिए मेरी सरकार को बर्खास्‍त करने की जरूरत नहीं पड़ेगी'। अमरिंदर सिंह ने कहा कि राज्यपाल को किसानों को दुखों की भट्ठी में झोंकने या बर्बाद होने की हरगिज इजाजत नहीं दूंगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि राज्यपाल कृषि विधेयक को मंजूरी नहीं देते हैं तो वह दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगे ।

हम आपको बता दें कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की राज्यपाल से मुलाकात के दौरान भाजपा के दो विधायक उनके साथ नहीं थे । गौरतलब है कि प्रदेश में भाजपा के दो विधायक हैं और उन दोनों ने विधानसभा के विशेष सत्र में भी हिस्सा नहीं लिया था जो कृषि कानूनों के खिलाफ बुलाया गया था ‌।

पंजाब ही ऐसा राज्य है जो केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर है । इस राज्य के किसान अभी भी मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ सड़कों पर हैं।बता दें कि पंजाब में बिना किसानों को साथ लेकर सत्ता पर काबिज नहीं हुआ जा सकता है।मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह किसानों को साथ लेकर चलना चाहते हैं, इसीलिए वह राज्यपाल और केंद्र सरकार से सीधा टकराव भी चाहते हैं । अब बात छत्तीसगढ़ की होगी । 


छत्तीसगढ़़ की राज्यपाल ने मुख्यमंत्री के विधानसभा सत्र बुलाने की मांग ठुकराई---
छत्तीसगढ़ में भी केंद्र के कृषि कानून को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री आमने-सामने आ गए।मंगलवार को दोनों के बीच मनमुटाव देखने को मिले।केंद्रीय कृषि कानूनों में संशोधन के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रस्तावित विशेष सत्र की फाइल राज्यपाल ने लौटा दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने 27 और 28 अक्टूबर को दो दिवसीय सत्र बुलाने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा।

'फाइल लौटाते हुए राज्यपाल अनुसुईया उइके ने सरकार से पूछा है कि ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गई कि विशेष सत्र बुलाने की जरूरत पड़ गई है, इस बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि पूर्ण बहुमत की सरकार को विधानसभा का सत्र बुलाने से राज्यपाल नहीं रोक सकतीं'।

हालांकि शाम को राज्यपाल अनुसुईया उइके ने फैसला पलटते हुए हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को विधानसभा का सत्र बुलाए जाने पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है । इसके बाद राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ सरकार सवालों का जवाब देते हुए फाइल फिर से राजभवन के लिए भेज दी ।

यहां हम आपको बता दें कि विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर यह कोई पहला मौका नहीं है इससे पहले भी कई बार राज्यपाल और मुख्यमंत्री बीच में टकराव सामने आए हैं ।दो महीने पहले राजस्थान की बात करें तो जब सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार को गिराने के लिए बगावती तेवर अपना लिए थे, तब गहलोत अपनी सरकार बचाने और बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की थी लेकिन राज्यपाल ने मुख्यमंत्री का अनुरोध ठुकरा दिया था जिससे दोनों के बीच तल्खी बढ़ गई थी हालांकि बाद में केंद्र के निर्देशों के बाद राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने की मंजूरी दी थी ।

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