स्पेशल रिपोर्ट: मां ब्रह्मचारिणी तपस्या और आराधना की प्रतीक हैं 

स्पेशल रिपोर्ट: मां ब्रह्मचारिणी तपस्या और आराधना की प्रतीक हैं 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 18 Oct, 2020 08:31 am देश और दुनिया धर्म-संस्कृति सम्पादकीय स्लाइडर स्वस्थ जीवन आधी दुनिया

 

हिमाचल जनादेश, रजनीश ठाकुर

ब्रह्मचारिणी की पूजा-पंडित अशोक शर्मा भट्ट मध्य प्रदेश नलखेड़ा के अनुसार नवरात्रि के 9 दिनों का बहुत अधिक महत्व होता है। इन दिनों पूजा- अर्चना का विशेष फल मिलता है। आइए, आज जानते हैं मां के ब्रहाचारिणी स्वरुप के बारे में।
 
ब्रह्मचारिणी दो शब्दो से मिलकर बना है, ब्रह्रा जिसका का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का मतलब आचरण करने वाली। नवरात्रि में मां ब्रहमचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति में तप, त्याग और संयम में वृद्धि होती है।मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में देवी ब्रह्राचारिणी का दूसरा स्वरूप है।

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में देवी ब्रह्राचारिणी का दूसरा स्वरूप है। मां ब्रह्राचारिणी हमेशा कठोर तपस्या में लीन रहती है। मां के हाथों में माला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। मां ने भगवान शिव को पति रुप में पाने के लिए हजार सालो तक कठिन तप और उपवास किया था। 

शास्त्रों के अनुसार मां कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भगवान भोलेनाथ की तपस्या में लीन रही। हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। कई हजार वर्षों तक बिना पानी के और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं।

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घोर तपस्या के बाद भगवान शिव के पति रूप में प्राप्त होने का वरदान मिला। इससे बाद मां अपने पिता के घर लौट आई। इस कारण से मां का यह रूप तपस्या और आराधना का प्रतीक माना जाता है।

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