चम्बा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन का शिक्षाविदों ने सेमिनार की रूपरेखा पर डाला प्रकाश 

चम्बा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन का शिक्षाविदों ने सेमिनार की रूपरेखा पर डाला प्रकाश 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 28 Sep, 2020 11:50 pm प्रादेशिक समाचार विज्ञान व प्रौद्योगिकी लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा शिक्षा व करियर


हिमाचल जनादेश, एमएम डैनियल 


आज राजकीय महाविद्यालय चम्बा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन हेतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति जिला टास्क फ़ोर्स द्वारा जिला स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला स्तरीय टास्क फ़ोर्स के अध्यक्ष डॉ विद्या सागर शर्मा द्वारा की गयी। 


इस अवसर पर  जिला स्तरीय टास्क फ़ोर्स के सदस्य राजकीय महाविद्यालय चम्बा के प्राचार्य डॉ शिव दयाल,  तेलका के प्राचार्य प्रोफेसर किशन चंद मिन्हास, भरमौर के प्राचार्य प्रोफेसर मोहिंदर पाल, चुवाड़ी के प्राचार्य डॉ नंद लाल, लिहल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ प्रदीप कौंडल, सेवानिवृत्त सह आचार्य डॉ पी के गुप्ता, डॉ लेख राज, प्रोफेसर परविंदर कुमार, डॉ हेमन्त पाल, डॉ महिंदर सलारिया, डॉ मनीष वर्मा, प्रोफेसर अविनाश, प्रोफेसर रविन्द्र डोगरा, प्रोफेसर लेख राज, प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह, डॉ सन्तोष, डॉ अजय जम्वाल, प्रोफेसर आशीष शर्मा, प्रोफेसर प्रशांत रमन रवि इत्यादि उपस्थित रहे ।


सर्वप्रथम सदस्य सचिव प्रोफ़ेसर वीरेंद्र सिंह द्वारा सबका स्वागत किया गया व सेमिनार की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। इसके बाद डॉ महिंदर सलारिया द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बारे में विस्तारपूर्वक अपने विचार रखे। इस नीति की ऐतिहासिक पृष्टभूमि, क्रियान्वयन, संवैधानिक बदलाव इत्यादि  के बारे में बताया। 
 

इसके पश्चात डॉ मनीष वर्मा द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020  के पहले खण्ड स्कूली शिक्षा से सम्बंधित अपने विचार रखे व इसका महत्व समझाया। इसके उपरांत डॉ हेमन्त पाल द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020  के दूसरे खण्ड उच्च शिक्षा के ऊपर अपने विस्तृत विचार सांझा किए। इसके बाद प्रोफेसर अविनाश द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020  के तीसरे खण्ड अन्य केंद्रीय विचारणीय मुद्दे व चौथे खण्ड क्रियान्वयन की रणनीति पर अपनी बात रखी  जिसमें व्यवसायिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, कला संस्कृति का सम्वर्धन, प्रौद्योगिकी का उपयोग, ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा, केंद्रीय शुल्श सलाहकार बोर्ड का सशक्तिकरण व इस नीति का क्रियान्वयन इत्यादि मुद्दे शामिल रहे।
 

इसके बाद स्थानीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ शिव दयाल जी ने इस सेमिनार में हुई चर्चा के ऊपर विस्तृत वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि 34 वर्षों बाद अगर शिक्षा नीति में व्यापक बदलाव की ज़रूरत पड़ी है तो कहीं न कहीं भारत के भविष्य के लिए इसकी नितांत आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा नीति की सुदृढ़ीता इसके सफल क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए नई शिक्षा नीति का अक्षरशः प्रायोगिक रूप से क्रियान्वयन अति आवश्यक है।


इसके बाद प्रोफेसर नंद लाल जी ने इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से सम्बंधित अपनी बात रखी व कहा कि शारीरिक विकास के बिना बौद्धिक विकास होना मुश्किल है । उन्होंने  कहा कि शारिरिक शिक्षा के महत्व को नकारना उचित नहीं है ।
 डॉ प्रदीप कौंडल ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा एवम भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे ।
प्रोफेसर किशन चंद मिन्हास ने इस शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए विद्यालयों और महाविद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के महत्व पर प्रकाश डाला ।
इसके बाद प्रोफेसर प्रशांत रमन रवि ने सेमिनार का सारांश प्रस्तुत किया । इन्होंने सभी वक्ताओं के वक्तव्यों को सार रूप में प्रस्तुत किया व अपने सुझाव भी प्रस्तुत किये । 
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जिला टास्क फ़ोर्स के अध्यक्ष डॉ विद्या सागर शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में अपना वक्तव्य रखा । उन्होंने आधुनिक शिक्षा में व्यापक फ़ेरबदल की महत्वता पर ज़ोर दिया । उन्होंने कहा कि हमें निराशावादी होने की आवश्यकता नहीं है । आशावादी रहकर सभी कार्य अपनी सम्पूर्णता की और बढ़ जाते हैं। उन्होने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस नीति को व्यवहारिक रूप में लागू करना चाह रहे हैं।

उन्होंने आह्वान कहा किया कि जिला चम्बा के सभी प्राचार्य अपने अपनें महाविद्यालय में जा कर ऐसे सेमिनार करवाएं व अपने सुझाव लिखित रूप में जिला कमेटी को भेजें ताकि उसे समेकित रूप में उच्च शिक्षा विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार को भेजा जा सके।

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