मणिमहेश की रोमांचक यात्रा की पांचवीं औऱ अंतिम कड़ी

मणिमहेश की रोमांचक यात्रा की पांचवीं औऱ अंतिम कड़ी

Piyush 23 Sep, 2020 07:55 pm प्रादेशिक समाचार देश और दुनिया धर्म-संस्कृति लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश,धर्मशाला (करतार चंद)

हमारा अगला पड़ाव जैल खड़ से सुकडली के लिए है , जैल खड़ से सुकडली का सफर तीन घंटों का है यह सफर थोड़ा मुश्किल है सीधी चढ़ाई है रास्ता भी कुछ खतरनाक है पर इतने दिनों से लगातार इस तरह के रास्तों पर चलने से अब शरीर भी अभ्यस्त हो चुका था।जैसे ही हम सुखडली पहुँचते है तो यहाँ के शानदार दृश्य देखकर सफर की सारी थकावट भूलकर इस ग्लेशियर से भरी वादियों  में खो जाते है ।

यहां से आपको भांजा पर्वत दिखाई देता है इस पर्वत की आकृति कुछ अलग ही है।जनश्रुतियो के अनुसार शिव भगवान ने किसी भान्जे नामक गण को अपने रहने के लिये कोई उत्तम स्थान देखने के लिये भेजा।जब गण इस सुंदर स्थान पर पहुँचा तो वह यहां की सुंदरता देखकर इसी पर्वत पर तपस्या में लीन हो गया ।  

जब बहुत दिनों तक गण वापिस नही आया तो शिवशंकर उसकी तलाश में निकल पड़े।जब उन्होंने इस स्थान पर पहुंच कर देखा तो भांजा नामक गण को यहाँ समाधि में लीन देखकर शिव भगवान दूसरे स्थान की तलाश में निकल पड़े तो सामने ही उन्हें मणिमहेश पर्वत दिखाई दिया।

शिव भगवान ने मणिमहेश पर्वत पर अपना डेरा जमा लिया,जब शिव भगवान ने वहाँ से  सामने भान्जे पर्वत की और देखा तो मणिमहेश पर्वत की अपेक्षा भान्जे पर्वत की ऊँचाई बहुत ज्यादा थी।शिवशंकर ने अपने अंगूठे से भान्जे पर को नीचे दबाकर उसकी ऊँचाई कम की तभी भान्जे पर्वत की आकृति कुछ अलग दिखती है ।

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सुखडली से हम कलाह जोत को निकलते है यहाँ से कलाह जोत की दूरी करीब एक घन्टे का सफर है। कलाह जोत में जोत बाली माता का मंदिर है कलाह जोत से मणिमहेश के दर्शन हो जाते है करीब एक घंटा चलने के बाद मणि महेश में पबित्र स्नान करते है।

आशा है कि आप को मेरा यह सफरनामा पसंद आया होगा। जय शंकर , हर हर महादेव 
अगली बार एक और रोमांचक सफर पर चलेंगे

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