गरीब मार क्यों कर रही सरकार:न बस सुविधा न होटल खुले फिर कैसे देंगे नीट और एचएएस की परीक्षा???

गरीब मार क्यों कर रही सरकार:न बस सुविधा न होटल खुले फिर कैसे देंगे नीट और एचएएस की परीक्षा???

Piyush 13 Sep, 2020 12:08 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सुनो सरकार लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर शिमला स्वस्थ जीवन शिक्षा व करियर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश,सत्येन्द्र गौतम

आज नीट और एचएएस की परीक्षा है। हज़ारों अभ्यर्थियों ने इन परीक्षाओं के फॉर्म भरे हैं। कोरोना के चलते जगह-जगह इसके परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परन्तु सरकार के नाक आँख और कान बापू के नियमो पर चल रहे हैं। न देखो न सुनो और न कुछ कहो। बस सेवा आंशिक रूप से चालू है और होटल बंद हैं। परन्तु इन परीक्षा के आयोजकों की सोच को पहले सलाम ठोकें और फिर सोचें कि इन परीक्षा केंद्रों पर अभ्यार्थी कैसे पहुंचेंगे? समर्थवान तो निज़ी गाड़ी या टैक्सी लेकर पहुंच भी गए, गरीब या मध्यमवर्गीय लोग कैसे पहुंचेंगे? इकठ्ठा हो कर टैक्सी भी नहीं कर सकते! कोविड19 के नियमानुसार 3 से अधिक लोग टैक्सी में नहीं बैठ सकते। ऐसे में गरीब कैसे जा पायेगा? अगर धक्के खाकर पहले दिन पहुंच भी जाए तो रहेगा कहां?

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क्या इस बार गरीब और मध्यवर्गीय तबके को इस तरह बाहर कर दिया जाएगा? क्योंकि बहुत से अभ्यार्थी विशेष कर लड़किया नही गई हैं।यहीं बस नहीं है।जो परीक्षा केंद्र में पहुंच भी जाएंगे उनका प्रवेश डेढ़ घण्टा पहले निर्धारित किया गया है।नीट के 10 से 12 बजे तक होने बाले पेपर के लिए 8.30 बजे प्रवेश लेना होगा। दूसरा पेपर 2 बजे है तो प्रवेश 12.30 बजे! एचएएस के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था है शायद। अर्थात 8.30 अंदर गया अभ्यार्थी 12 बजे बाहर आएगा और 12.30 बजे फिर 2 बजे वाली परीक्षा के लिए अंदर घुस जाएगा! कोढ़ में खाज वाली बात यह है कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री कह रहे हैं "जब तक नहीं दवाई तक नही ढिलाई " और हिमाचल सरकार कह रही है कोरोना पॉजिटिव भी एचएएस परीक्षा दे सकते हैं!

जब पॉजिटिव लोग बाहर होंगे तो अन्य उनसे कैसे बचेंगे? वे क्या अनाउंसमेंट करते हुए चलेंगे कि मैं कोरोना पॉजिटिव हूं? अब ये सभी पहलू भारी भरकम पदों पर आसीन अधिकारियों ने देखने हैं मन्त्रियों या मुख्यमंत्री ने नही । परन्तु लगता है सरकार के पास या तो परिस्थितियों का आंकलन और प्रवंधन के लिए योग्य अधिकारियों का टोटा है या थके और पके अधिकारियों की फौज है।जिनको चिंता नहीं बस मौज़ ही मौज़ है।

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