पड़ताल: वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की अवेहलना के कांगड़ा में है 4 मामले, 1 करोड़ रुपए के दावे का होगा निर्णय 

पड़ताल: वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की अवेहलना के कांगड़ा में है 4 मामले, 1 करोड़ रुपए के दावे का होगा निर्णय 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 13 Aug, 2020 10:35 am प्रादेशिक समाचार क्राईम/दुर्घटना सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा काँगड़ा शिमला शिक्षा व करियर

हिमाचल जनादेश, (नरेश ठाकुर)

श्रम अधिनियमों और वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धज्जियां उड़ाने में माहिर है मीडिया हाउस

श्रम विभाग समय-समय पर समाचार पत्रों के विरुद्ध वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट और अन्य श्रम कानूनों के तहत कार्रवाई अमल में लाता रहता है। हिमाचल जनादेश की पड़ताल में सामने आया है कि कांगड़ा कार्यकाल के दौरान जिला श्रम अधिकारी चंबा के तत्वावधान में विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों के विरुद्ध श्रम कानूनों के तहत दंडाधिकारी के जिला के विभिन्न कोर्टों (जेएमआईसी) में 3 चालान पेश किए गए थे। इसके अतिरिक्त 4 केस निर्णय के लिए श्रम न्यायालय को भेजे गए थे।  

गौरतलब है कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के तहत मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारशों को लागू करने के दिशा-निर्देश माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2016-17 में दिए गए थे। इसके अनुसार राज्यों के श्रम विभागों को इन सिफारशों को लागु करने का जिम्मा दिया गया। बकायदा, इसकी निरंतर रिपोर्ट समय-समय पर श्रम मंत्रालय, भारत सरकार को भेजी जाती है। इसी कार्य को आसान बनाने के लिए तथा मीडिया के कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने 18 अक्तूबर, 2016 को सभी जिला श्रम अधिकारियों को वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 की धारा 17 के तहत प्राधिकरण अधिसूचित किया था। 

क्या है प्राधिकरण के कार्य और शक्तियां
हिमाचल जनादेश के पाठकों को बता दें कि किसी भी समाचार पत्र या इलेक्ट्रॉनिक मिडिया का कर्मचारी अपनी शिकायत अथॉरिटी के पास लिखित में दे सकता है कि उसे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारशों के अनुरूप वेतन व अन्य भत्ते नहीं दिए जा रहे है। जिसमें कि प्राधिकरण दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद नियमानुसार कार्रवाई करता है। यदि कर्मचारी द्वारा दिए गए तथ्य सही पाए जाते है तो जिलाधीश को वसूली प्रमाण पत्र (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी करता है। जिसमें समाचार पत्रों से वसूली जाने वाली राशि का विवरण होता है। जिसमें यह आदेश दिए जाते है कि पैसे वसूल करके शिकायतकर्ता को दिए जाए। उक्त वसूली भू राजस्व के बकाया के तौर पर होती है। 


यदि प्राधिकरण को यह प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता के द्वारा किए गए दावे तथा समाचार पत्रों के प्रतिदावे में विरोधाभास है और इसमें विवाद है तो केस निर्णय के लिए माननीय श्रम न्यायालय को भेजा जाता है। जहां दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट अपना फैसला सुनाता है। इसकी प्रतिलिपि प्राधिकरण को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाती है। शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला आता है तो उपरोक्त कार्रवाई अमल में लाई जाती है। 

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क्या कहते है जिला श्रम अधिकारी 

उधर, हिमाचल जनादेश से बात करते हुए जिला श्रम अधिकारी चंबा, अनुराग शर्मा ने कहा कि धर्मशाला में कार्यकाल के दौरान 2 शिकायतकर्ताओं की शिकायत के आधार पर 13 सितंबर, 2017 को अमरउजाला के 2 केस लेबर कोर्ट में निर्णय के भेजे गए। जिसमें 35 लाख रुपए की राशि का निर्णय होना है। एक अन्य मामले में मार्च 2019 को दिव्य हिमाचल के 2 केसों जिसमें 65 लाख रुपए करीब की राशि सम्मिलत है। जिसमें दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद चारों मामले में निर्णय के लिए माननीय श्रम न्यायालय धर्मशाला में पेश किए जा चुके है।

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