आइए दोस्ती का हाथ बढ़ाएं हाथी को साथी बनाएं

आइए दोस्ती का हाथ बढ़ाएं हाथी को साथी बनाएं

Piyush 12 Aug, 2020 05:11 pm प्रादेशिक समाचार सुनो सरकार देश और दुनिया धर्म-संस्कृति लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर मनोरंजन स्वस्थ जीवन शिक्षा व करियर

 

हिमाचल जनादेश , वरिष्ठ पत्रकार (शंभूनाथ गौतम)


आज हम एक ऐसे जानवर की बारे में बात करेंगे जिसका शरीर विशालकाय होता है लेकिन आमतौर पर यह बहुत सीधा माना जाता है । इनकी भूमिका का उल्लेख महाभारत से लेकर रामायण तक मिलता है । यही नहीं राजा-महाराजाओं की शान की सवारी भी रहा है यह जानवर ।

इसने युद्धों में अपनी प्रतिभा  हजारों बार प्रदर्शित भी की है । हम बात कर रहे हैं गजराज यानी हाथी की । आज पूरे दुनिया भर में विश्व हाथी दिवस मनाया जा रहा है । बच्चों में एलीफेंट नाम से लोकप्रिय यह जानवर सर्कस से लेकर फिल्मों में भी नजर आता है । कहने को तो यह मूक प्राणी है लेकिन बहुत ही समझदार माना जाता है । हाथियों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता पैदा करने और उन पर ध्यान आकर्षित करने के लिए इस खास दिन को 12 अगस्त 2012 से मनाया जा रहा है ।

आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया भर में पाए जाने वाले एशियाई हाथियों में से 60 प्रतिशत सिर्फ भारत में हैं। देश में पहली बार 2017 में हाथियों की गिनती हुई। इस वक्त देश के जंगलों में करीब 28 हजार हाथी रह रहे हैं। भारत में इस वक्त 30 एलीफैंट रिजर्व हैं। इसके अलावा देश में 101 एलीफैंट गलियारे भी हैं। आइए इनके बारे में यह भी जानते हैं । बता दें कि जन्म के कुछ समय बाद ही हाथी का बच्चा खड़ा हो जाता है। हाथी दिनभर में 150 किलो खाना खा लेता है।

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अगर वजन की बात करें तो हाथी का वजन 5 हजार किलो तक हो सकता है। यही नहीं थाईलैंड में सफेद हाथी पाए जाते हैं । हाथी की सामान्य आयु 70 तक वर्ष होती है । यह प्राणी दुनिया में सबसे बुद्धिमान प्रजातियों में माना जाता है । वे भावनात्मक रूप से भी काफी परिपूर्ण होते हैं, किसी करीबी की मृत्यु हो जाने पर उन्हें उदास या रोते हुए भी देखा गया है । अब समय आ गया है इनके प्रति प्रेम और दोस्ती का हाथ बढ़ाने का, नहीं तो यह भी हमारे बीच धीरे-धीरे लुप्त हो जाएंगे ।

जागरूकता के अभाव में देश में हाथियों की संख्या कम होती जा रही है

सरकारें हों या देश के लोग हाथियों के प्रति इतने संवेदनशील नहीं रह गए हैं । देश में 3 साल पहले आखिरी बार हाथियों की गिनती की गई थी। 2017 में हुई हाथियों की गिनती के अनुसार भारत में 28 हजार हाथी हैं, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती जा रही है।

 हाथियों की मौत के मामले में केरल भारत का सबसे बदनाम राज्य है, जहां हर तीन दिन में एक हाथी मारा जाता है। अभी कुछ समय पहले केरल में ही शरारती तत्वों ने एक गर्भवती हथिनी को पटाखे खिलाकर हत्या कर दी थी । इस घटना के बाद पूरे देश भर में जबरदस्त आक्रोश का माहौल बन गया था ।

यहां हम आपको बता दें कि किसी जानवर को नुकसान पहुंचाना या उसे मार डालना अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन ऐसा करने वाले बहुत कम लोगों को सजा हो पाती है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत जानवरों को मारने पर तीन साल तक की सजा और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा ऐसा करने पर सात साल तक की सजा हो सकती है। लेकिन फिर भी अराजक तत्व ऐसी घटना करने से बाज नहीं आते हैं ।


अपराधी हाथियों के दांत के लिए तस्करी भी करते आ रहे हैं

हमारे देश में एक कहावत है कि हाथी मरने के बाद भी लाख रुपये का बिकता है । हाथी एक ऐसा जानवर है भारत ही नहीं विश्व के तमाम देशों में जिसके दांत के लिए बड़े पैमाने पर तस्करी भी होती रही है । तस्कर हाथियों के दांत के लिए इनकी हत्या भी कर देते हैं ।

अवैध शिकार, मानव-हाथी संघर्ष, और कैद में दुर्व्यवहार करना एक आम बात है । इसी को देखते हुए सिंगापुर देश ने हाथियों के दांत की बिक्री बंद करने के आदेश दिए हैं । माइकल क्लार्क और पेट्रीसिया सिमा, कनाडा के दो फिल्म निर्माता और थाईलैंड में एलीफैंट रिइनोड्रोडक्शन फाउंडेशन के महासचिव सिवापॉर्न डारडरानंद ने 2011 में विश्व हाथी दिवस मनाने का फैसला किया था।

यह दिन लोगों को जंगली जानवरों, हाथियों के लिए बेहतर संरक्षण की आवश्यकता को समझने और हाथी दांत के अवैध अवैध शिकार को रोकने के उद्देश्‍य से मनाया जाता है । हाथियों की तस्करी और उनकी हत्या को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने होंगे नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब यह विशालकाय जानवर भी देखने को नहीं मिलेंगे ।


भारत में हजारों वर्षों से लोगों की आस्था से भी जुड़े हुए हैं हाथी


हमारे देश में हाथी लोगों की आस्था से भी जुड़े हुए हैं।देश के कई राज्यों में गजराज की पूजा की जाती है । हिंदू धर्म में भगवान गणेश के हाथी रूप की ही पूजा की जाती है । कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में फैले पश्चिमी घाट, नीलगिरी और पूर्वी घाट को लगभग 10,000 हाथियों के साथ एशिया के हाथी साम्राज्य के रूप में जाना जाता है । भारतीय हाथी झाड़ीदार जंगलों के पास रहते हैं, पर इनकी रिहायिश अन्य जगहों पर भी देखने को मिलती है ।

ये स्वभाव से खानाबदोश होते हैं और एक स्थान पर कुछ दिनों से अधिक नहीं रहते हैं । ये जंगलों में रह सकते हैं पर खुले स्थान व घास वाली जगहों पर जाना पसंद करते हैं । साथ ही वर्षावनों की जैव विविधता को बनाए रखने में भी हाथ‍ियों की बड़ी भूमिका है । हाथी भले ही सबसे विशाल पशु है, लेकिन उसके सामने भी तमाम चुनौतियां आये दिन आती हैं, वो चाहे जंगली जानवरों की वजह से हों या फिर इंसानों से । भारतीय संस्कृति में हाथी का विशेष महत्व होने के बावजूद दुर्भाग्यवश देश में इनकी संख्या लगातार घटती जा रही है ।

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