स्वच्छ पर्यावरण में हमारा भविष्य सुरक्षित है उसी तरह ओपीएस में कर्मचारियों का जीवन सुरक्षित है- राजिन्दर स्वदेशी 

स्वच्छ पर्यावरण में हमारा भविष्य सुरक्षित है उसी तरह ओपीएस में कर्मचारियों का जीवन सुरक्षित है- राजिन्दर स्वदेशी 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 10 Jul, 2020 04:42 pm प्रादेशिक समाचार लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा

हिमाचल जनादेश,ब्यूरो 

साफ पर्यावरण सम्पूर्ण विश्व को सुरक्षित रखता है उसी तरह पुरानी पेंशन स्कीम नियमावली 1972 सम्पूर्ण भारतीय कर्मचारियों के जीवन को सुरक्षित रखती है। इसी तथ्य को जहन में रखकर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा भारत 12 जुलाई 2020 को एक पेड़ पुरानी पेंशन बहाली विचारधारा के नाम पर लगाने जा रहा है। क्योंकि जब हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी हम सुरक्षित रह पाएंगे और पुरानी पेंशन स्कीम को पुनः बहाल करवा पाएंगे। 

पर्यावरण शब्द परि+आवरण के संयोग से बना है। 'परि' का आशय चारों ओर तथा 'आवरण' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों ,प्राणियों,और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु ,जल ,भूमि ,पेड़-पौधे , जीव-जन्तु ,मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता है। पर्यावरण संरक्षण की समस्या विज्ञान के क्षेत्र में असीमित प्रगति तथा नये आविष्कारों की स्पर्धा के कारण आज का मानव प्रकृति पर पूर्णतया विजय प्राप्त करना चाहता है। इस कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। वैज्ञानिक उपलब्धियों से मानव प्राकृतिक संतुलन को उपेक्षा की दृष्टि से देख रहा है। दूसरी ओर धरती पर जनसंख्या की निरंतर वृद्धि , औद्योगीकरण एवं शहरीकरण की तीव्र गति से जहाँ प्रकृति के हरे भरे क्षेत्रों को समाप्त किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण का महत्त्व, पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ सम्बन्ध है। प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और निकट भविष्य में मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है। इस स्थिति को ध्यान में रखकर सन् 1992 में ब्राजील में विश्व के 174 देशों का 'पृथ्वी सम्मेलन' आयोजित किया गया।

इसके पश्चात सन् 2002 में जोहान्सबर्ग में पृथ्वी सम्मेलन आयोजित कर विश्व के सभी देशों को पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय सुझाए गये। वस्तुतः पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है , अन्यथा मंगल ग्रह आदि ग्रहों की तरह धरती का जीवन-चक्र भी एक दिन समाप्त हो जायेगा।

भारत देश में रिटायर कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा एवं आर्थिक सुरक्षा को मध्य नजर रखते हुए नियमावली 1972 के अनुसार पुरानी पेंशन व्यवस्था के द्वारा रिटायर कर्मचारियों के सभी पक्षों को सुरक्षित किया जा सकता है। बुढ़ापे में असंख्य बीमारियां घेर लेती हैं। पुरानी पेंशन मिलने से रिटायर कर्मचारी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सक्षम रहता है। अर्थात पुरानी पेंशन प्रणाली जीवनदायिनी सिद्ध हुई है रिटायर कर्मचारियों के लिए।  लेकिन 1 जनवरी 2004 में भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के शासनकाल के दौरान पुरानी पेंशन प्रणाली को बंद कर दिया गया और उसके स्थान पर न्यू पेंशन प्रणाली को भारतीय रिटायर कर्मचारियों के ऊपर लागू किया गया। वो भी अध्यादेश ला कर जिन कर्मचारियों के ऊपर जोकि देश की रीढ़ की हड्डी होते हैं और अपने जीवन के स्वर्णिम काल को देश विकास के कामों समर्पित करते हैं।

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लेकिन उसके बाद समस्त भारतीय राज्यों में अलग-अलग तिथियों को न्यू पेंशन प्रणाली को लागू कर दिया गया समस्त राज्यों में से सिर्फ पश्चिम बंगाल व त्रिपुरा में पुरानी पेंशन प्रणाली चालू रही अभी नई - नई सरकार बनने के बाद पुरानी पेंशन प्रणाली को बन्द करके त्रिपुरा में न्यू पेंशन प्रणाली को लागू कर दिया गया है। भारत में सिर्फ पश्चिमी बंगाल में पुरानी पेंशन अभी लागू है। हिमाचल प्रदेश में 15 मई 2003 को पुरानी पेंशन के स्थान पर न्यू पेंशन स्कीम को लागू किया गया है। गौरतलब है कि न्यू पेंशन स्कीम को लागू करने में हिमाचल प्रदेश भारत में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मतलब हिमाचल सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम को बिना सोचे समझे प्रथम आने के चक्कर में जल्दबाजी दिखाई है और रिटायर कर्मचारियों के हितों के साथ अनदेखी की है।

शुरुआती दिनों में न्यू पेंशन प्रणाली के दुष्परिणामों के बारे में कर्मचारियों को मालूम नहीं था कुछ वर्षों के बाद जब कर्मचारी न्यू पेंशन प्रणाली के अंतर्गत रिटायर होने लगे और उन्हें कर्मचारी को 527 रुपये और अधिकारी को 2175 रुपये पेंशन के रूप में मिलने लगे तो कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने हिमाचल प्रदेश से इसका विरोध शुरू कर किया और धीरे-धीरे पूरे भारतवर्ष के सभी राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। क्योंकि न्यू पेंशन स्कीम में कुछ भी ऐसा नहीं है कि वे नियमावली 1972 वाली पुरानी पेंशन स्कीम का स्थान ले सके।

 

गौरतलब है कि जिस तरह से पर्यावरण पर सम्पूर्ण विश्व का भविष्य आधारित है, उसी तरह से नियमावली 1972 की पुरानी पेंशन स्कीम पर समस्त भारतीय कर्मचारियों का भविष्य आधारित है। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए। पुरानी पेंशन स्कीम को कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकार का दर्जा दिया गया है।

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