चम्बा: मां बन्नी पहुंची अपने मूल स्थान छड़ोले,पढ़ें क्या है आस्था और क्या है मान्यता

चम्बा: मां बन्नी पहुंची अपने मूल स्थान छड़ोले,पढ़ें क्या है आस्था और क्या है मान्यता

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 30 Jun, 2020 10:10 pm प्रादेशिक समाचार धर्म-संस्कृति लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा

हिमाचल जनादेश, भरमौर (पवन भारद्वाज )

विश्व प्रसिद्ध शक्ति रूप मां बन्नी भगवती हर साल की भांति अपने मूल स्थान छड़ोले में पहुंच गई है । मान्यता के अनुसार आषाढ़ मास के तीसरे रविवार को माँ बन्नी से प्रस्थान करती है व लीउण्डी नामक स्थान पर रात्रि विश्राम करती है अगले दिन वहां से चलने के बाद कांथेड़ पहुंचती है और मंगलवार को अपने मूल स्थान छडोला में पहुंचती है।

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माता के पहुंचते ही वहां पर इकठ्ठे हुए सभी भेड़पालक जोत छूने की रस्म अदा करते है उसके बाद चार दिनों तक जोत पर जमा बर्फ को काटने का कार्य चलता है ताकि रास्ता बनाया जाता है।  फिर माता जोत लांघने का हुक्म देती है तो सभी भेड़पालक काली छो रास्ते से लाहौल की ओर रवाना होते है । जब तक भेड़पालक वापिस नही आते तब तक माता वहीं निवास करती है ,भाद्रपद मास के अंत में और आसूज मास के शूरुआती दिनों में भगवती बन्नी दरबार को वापिस आ जाती है । 
कहाँ प्रकट हुई थी माता 
कहा जाता है कि बन्नी माता की उत्त्पति छडोला से भी ऊपर भरगुड नामक स्थान पर हुई है जहां पर एक विशाल पत्थर को चीरकर त्रिशूल निकली है।  माता की शक्ति का चमत्कार ये है कि ये त्रिशूल हाथ लगाने से बिल्कुल हिचकोले खाती है  मगर कोई उठाना चाहे या खींचना चाहे तो ये कदापि सम्भव नही है। 

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