काँगड़ा:गोरख डिब्बी मंदिर प्रबन्धन व मंदिर प्रशासन ज्वालामुखी के बीच भूमि को लेकर विवाद बढ़ा, निशानदेही के बाद सच्चाई आएगी सामने

काँगड़ा:गोरख डिब्बी मंदिर प्रबन्धन व मंदिर प्रशासन ज्वालामुखी के बीच भूमि को लेकर विवाद बढ़ा, निशानदेही के बाद सच्चाई आएगी सामने

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 29 Jun, 2020 11:38 pm प्रादेशिक समाचार सुनो सरकार धर्म-संस्कृति लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश ,ज्वालामुखी(प्रदीप शर्मा)

हरकत में आयाहै ज्वालामुखी मन्दिर प्रशासन व नगर परिषद, निशानदेही के बाद सच्चाई आएगी सामने

तहसीलदार जगदीश शर्मा बोले, इस हफ्ते के भीतर करवा दी जाएगी निशानदेही,निशानदेही पर टिकी हैं सबकी निगाहें

विश्वप्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी में गोरख डिब्बी मंदिर प्रबन्धन व मंदिर प्रशासन के बीच पनपा भूमि विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। हालांकि मामले की जानकारी पता चलते ही ज्वालामुखी मन्दिर प्रशासन व नगर परिषद ने गोरख डिब्बी को नोटिस थमाया की गोरखडिब्बी निर्माण बन्द करके नोटिस का जबाब दे। मजे की बात है कि गोरखडिब्बी प्रवंधन ने नोटिस लेना भी जरूरी नहीं समझा। जिसे बाद में दीवार पर चस्पां करके औपचारिकता पूरी की गई। इससे भी दिलचस्प यह है कि नोटिस दीवार पर चस्पां होने के बाद बनाये गए ढांचे पर लेंटल भी डाल दिया गया। परन्तु प्रशासन देखता ही रह गया।


प्रशंगवश सैंकड़ों बर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी माँ की पूजा करते आ रहे  पुजारी वर्ग ने गोरख डिब्बी प्रबंधन पर ज्वालामुखी मंदिर की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा करके मन्दिर प्रशासन व ट्रस्ट को गुमराह करने की बात कही है। मन्दिर के पुजारी वर्ग का कहना है कि गोरख डिब्बी मन्दिर प्रवंधन इस तरह से मनमानी करके ज्वालामुखी मन्दिर की भूमि को अवैध ढंग से नहीं हड़प सकता। पुजारियों का कहना है कि मंदिर के सरकारीकरण का मतलब यही था कि यहां कि सभी व्यवस्थाएं सरकार देखेगी तथा मन्दिर के पुजारी पूजा पाठ की व्यवस्थाएं सही तरीके से चलायेंगे।

हालांकि अवैध निर्माण को लेकर मन्दिर प्रशासन अब हरकत में हैं । लेकिन सबाल यह है कि  प्रशासन की नाक के नीचे किसकी छत्रछाया से गोरख डिब्बी प्रवंधन को इतनी हिम्मत आ गयी कि ज्वालामुखी मन्दिर की भूमि पर निर्माण कर दिया। यहां ये बताना जरूरी रहेगा कि निशनदेशी के बाद ही पूरी स्तिथि स्प्ष्ट होगी की निर्माण मन्दिर की भूमि पर हुआ है या नहीं।


हालांकि ज्वालामुखी मन्दिर प्रवंधन व नगर परिषद की कार्रवाई के बाद भी जब गोरख डिब्बी प्रबन्धन नहीं माना तो स्थानीय विधायक ने उपायुक्त कांगड़ा को स्वयं इस मामले को देखने की बात कही। तत्पश्चात ज्वालामुखी प्रशासन ने  बीते 26, 27 जून को बिवादित भूमि की निशानदेही के फरमान जारी किए। लेकिन गोरख डिब्बी प्रवंधन ने यह कहकर राहत मांगी की गोरख डिब्बी के मुख्य संचालक बीमारी के बजह से तय समय में निशानदेही को उपलव्ध नही  हो सकते, जिसके चलते तब प्रशाशन को निशानदेही टालनी पड़ी थी।
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1983 में मन्दिर के सरकारीकरण के बाद पुजारियों ने इस मामले में हाथ पीछे खींच लिए थे पुजारियों का आरोप है कि इसके पीछे मन्दिर की संपत्ति को हड़पने की गहरी साजिश लग रही। लगभग चार दशक पहले इसी तरह पूरी की पूरी गोरख डिब्बी  को अधिग्रहण कर लिया गया था। लम्बे समय तक पुजारियों व गोरख डिब्बी प्रवंधन के बीच अदालती कार्रबाई हुई । लेकिन 1983 में मन्दिर के सरकारीकरण के बाद पुजारियों ने इस मामले में हाथ पीछे खींच लिए थे।

क्या है मामला....
  ज्वालामुखी मन्दिर में मोदी भवन के ठीक पीछे लॉकडौन का फायदा लेते हुए गोरख डिब्बी प्रवंधन ने मंदिर की भूमि पर अवैध निर्माण शुरू कर दिया। कुछ प्रत्यक्ष दर्शियों ने मंदिर ट्रस्ट व प्रशासन सहित नगर परिषद ज्वालामुखी तक यह बात पहुंचाई की गोरख डिब्बी में मन्दिर की भूमि पर जोरों से अवैध निर्माण चला हुआ है।


मामले पर क्या बोले पुजारी
ज्वालामुखी मन्दिर के मुख्य पुजारी शुभांशु भूषण दत्त, पुजारी राहुल शर्मा, पुजारी प्रशांत शर्मा, माल्टा पुजारी आदि ने गोरख डिब्बी प्रबन्धन की अवैध कवजे की कोशिश पर चिंता व्यक्त की । उन्होंने कहा कि ज्वालामुखी मन्दिर के पीछे गोरख डिब्बी प्रवंधन ने जो निर्माण किया वो पूरी तरह गैर कानूनी है। नियमों को धत्ता बताते हुए नगर परिषद से भी कोई नक्शा पास नही हुआ। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा रोकने के बाद भी जबरन लेंटल डाला गया। जबकि अब जमीन की निशानदेही के लिए आना कानी की जा रही है। पुजारियों ने कहा कि लॉकडौन का अनुचित फायदा लेकर गोरख डिब्बी ने जो भी किया है। उसकी सचाई सामने आनी चाहिए। 


उपायुक्त कांगड़ा राकेश प्रजापति ने कहा कि मामला विधायक रमेश धवाला के माद्यम से उनके संज्ञान में आया है। इस जमीन की निशानदेही के निर्देश कर दिए गए थे। कुछ कारणों से निशानदेही तय समय पर नहीं हो सकी। स्थानीय प्रशाशन को इस मामले में शीघ्र रिपोर्ट देने को कहा है। किसी के साथ भी अन्याय नहीं होगा। जिस पक्ष की भी जगह निकलती है उसे दी जाएगी। यदि गोरख डिब्बी प्रबन्धन गलत पाया जाता है तो सरकारी भूमि और अवैध निर्माण के तहत कार्रबाही की जाएगी।


तहसीलदार जगदीश शर्मा ने कहा कि जमीन की निशानदेही इसी हफ्ते करवा दी जाएगी। उसके बाद ही यहां नियमानुसार कार्रवायी अमल में लाई जाएगी।

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