कोरोना को लेकर हिमाचल कितना गंभीर :कहीं राजनेता और अर्धज्ञानि जनता सबको न ले डूबे ......

कोरोना को लेकर हिमाचल कितना गंभीर :कहीं राजनेता और अर्धज्ञानि जनता सबको न ले डूबे ......

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 27 Mar, 2020 03:05 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल क्राईम/दुर्घटना सुनो सरकार देश और दुनिया लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा स्वस्थ जीवन आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश,मोनु राष्ट्रवादी 

आज कोरोना के कहर से पूरा विश्व खौफजदा है लेकिन हिमाचल के न तो नेता न सरकार अभी तक गंभीरता दर्शा रही है नतीजन हम एक बड़ी आफत में आ सकते हैं। कल के कर्फ्यू को लेकर लिए गए सरकार के निर्णय से जनता कहीं भी सहमत नहीं दिखी जिसपर सोशल मीडिया पर जनता के ताबड़तोड़ प्रतिक्रिया आने लगी जिसे देखकर सूबे के मुख्यमंत्री ने रात साढ़े ग्यारह बजे स्वीकारा कि शराब के ठेकों को नहीं खोला जाना चाहिए साथ ही कर्फ्यू की छूट अवधि में भी उचित निर्णय लेने की बात कही। 

उधर दूसरी तरफ कुछ नेता और विधायक भी कोरोना की क्रोनोलॉजी से बेखबर रोजगार के लिए बाहर पलायन किये युवाओं को घर वापिस लाने पर राजनीति करने पर तुले हैं लेकिन इनकी ये राजनीति जनता के लिए कितने भयानक होगी शायद इसकी कल्पना से ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएँ। 

रोजगार के लिए पलायन किये अधिकतर युवा बद्दी - नालागढ़ - बरोटीबाल,चंडीगढ़,नोएडा में हैं जो वर्षों से घर से बाहर यहाँ रह रहे हैं जिनमें कोई कम्पनी में कर्मचारी है, कोई सिक्योरिटी में तो कोई चालक है।  जब तक तो कम्पनी में कार्य जारी था तब तक इनकी निश्चित दिनचार्य थी लेकिन कर्फ्यू के कारण उनको अपने कमरों तक सीमित होना पड़ रहा जो अब उनके लिए कष्टप्रद हो रहा है। 

हाँ इतना जरूर है कि कर्फ्यू के कारण इन क्षेत्रों में महंगाई बढ़ी है जिस कारण इन युवाओं को यहाँ रहने में मुश्किलें आ रही हैं लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि उनकी घर वापिसी ही मात्र विकल्प है।  ये नेता और विधायक लोग चाहें तो अपने क्षेत्र के इन युवाओं की एक सूचि बना कर आवश्यक धनराशि उनके बैंक खातों में या उनके पास जाकर दे सकते हैं फिर चाहे वो धनराशि उनके मानदेह से हो या उनकी विधायक निधि से। 

कर्फ्यू से पूर्व भी कुछ युवा घर वापिस पहुंचे हैं जिनमें से अधिकतर लोग गाँव मोहल्ले में घूमते नजर आये। ये तो सौभाग्य रहा कि उनमें से कोई कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं पाया गया अन्यथा वापिस आये इन युवाओं में कोई एक भी संक्रमित पाया जाता तो वो पुरे गांव -मोहल्ले को संक्रमित कर देता जिस स्थिति को सँभालने के लिए हमारे साधन-संसाधन कम पड़ जाते। 

अब जब 14 अप्रैल तक कर्फ्यू है तो नए संक्रमण फैलने की सम्भावना लगभग नगण्य हो गयी है जो भी मरीज अब सामने आ रहे हैं वे कर्फ्यू से पूर्व संक्रमित हुए थे , एक तय समय में जब सारे संक्रमित लोग सामने आ जायेंगे तो उनको आइसोलेट कर इनके इलाज में आसानी होगी और कोरोना का ये राक्षस तीसरी स्टेज पर पहुँचने से पहले नष्ट हो जायेगा। 

सोशल मीडिया पर अर्धज्ञानि जनता द्वारा ये अफवाह फैलाई जा रही है कि इस कर्फ्यू की समय सीमा तीन महीनों तक बढ़ सकती है इसलिए वे  स्थानीय विधायक और नेता से बाहर फंसे क्षेत्र के युवाओं को घर वापिस बुलाने की रोज नित नयी गुहार लगा रहे हैं।

और अब ऐसे में इन विधायकों और नेताओं द्वारा फंसे हुए युवाओं को वापिस लाने की ये नासमझ मुहीम समाज का समूल नाश करने के लिए काफी है। हो सकता है कि जिन युवाओं के घर वापिसी की बात हो रही है उनमें से कोई भी कोरोना ग्रसित न हो लेकिन उनके वापिसी के सफर के दौरान वे जाने अनजाने में संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आ जाएँ फिर क्या होगा कल्पना नहीं की जा सकती। 

इसलिए सरकार को भी चाहिए कि बाकी राज्यों की तरह हिमाचल में भी कर्फ्यू का कड़ाई से पालन करें ताकि इस कोरोना के घातक परिणामों से देवभूमि सुरक्षित रहे।  साथ ही अपने-अपने घरों में रह रहे लोगों के बजाए उन प्रवासी लोगों की सुध लें जो आजीविका कमाने के लिए घरों से बाहर इस विकट हालत से जूझ रहे हैं फिर चाहे वो हिमाचल के हों या बाहरी। 
 

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