चुराह सुरंग हादसा :नियमों को ताक पर रखकर आखिर कब तक माँ की गोद सूनी करेंगी ये विद्युत् परियोनाएं 

चुराह सुरंग हादसा :नियमों को ताक पर रखकर आखिर कब तक माँ की गोद सूनी करेंगी ये विद्युत् परियोनाएं 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 20 Mar, 2020 10:14 pm प्रादेशिक समाचार क्राईम/दुर्घटना सुनो सरकार लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा स्वस्थ जीवन

हिमाचल जनादेश,मोनु राष्ट्रवादी 

यूँ तो लोगों की दुर्घटना में  मौत होना आजकल एक आम बात हो चुकी है।  आये दिन लोग दुर्घटना का शिकार होते रहते हैं फिर चाहे वो भौगोलिक स्थितियों के कारन हो या इंसान की खुद की लापरवाही की वजह से लेकिन अगर किसी के यहाँ मजदूरी करते व्यक्ति की मौत हो तो ऐसे में उस व्यक्ति या संस्था की जबाबदेही बन जाती है जहाँ वह कामगार मजदूरी करता है। 

ऐसा ही एक हादसा जिला चम्बा के चुराह क्षेत्र में सामने आया जहाँ निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 4 मजदूर हादसे का शिकार हो गए जिनमें से एक की मौत हो गयी। बताया तो ये जा रहा है कि हादसा तब हुआ जब सुरंग में काम कर रहे इन मजदूरों पर मलबा आ गिरा जिसकी चपेट में ये बदनसीब आ गए। 

लेकिन इस हादसे के दूसरे पहलु को देखा जाये तो ऐसा प्रतीत होता है कि इस हादसे की जिम्मेदार कम्पनी है जो अपने मुनाफे और लापरवाही के चलते इन लोगों के हादसे का कारण बनी। यूँ तो कोई भी बड़ी कम्पनी जब किसी क्षेत्र में कार्य करती है तो उसे उस कार्य से सम्बंधित सभी मूलभूत औपचारिकताओं को पूरा करना होता है लेकिन अपने लाभ के लिए कम्पनी चंद रसूकदार लोगों और नेताओं को अपने पक्ष में करके नियमों की धज्जियाँ उड़ाती है जिस कारण कभी कभी बड़े हादसे पेश आते हैं। 

जिस निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना में ये हादसा हुआ है वे चुराह के चांजू क्षेत्र में काम कर रही है। 18 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना का कार्य पिछले तीन वर्षों से जारी है।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जो कम्पनी इस परियोजना का निर्माण कर रही है उनके तार केंद्र सरकार में बैठे कई अधिकारियों से हैं जिसकी धौंस दिखाकर वे मनमानी करते हैं। 

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इस कम्पनी की मनमानी के विरुद्ध स्थानीय लोगों ने कई बार मोर्चा खोला लेकिन उनके रसूक के आगे उनकी एक नहीं चली। सूत्रों की मानें तो इस कम्पनी का क्रशर प्लांट मापदंडों के खिलाफ है विस्फोटक का लाइसेंस संदेहास्पद है। लोगों की माने तो इस कम्पनी ने परियोजना के पावर हाउस के स्थान को तीन बार बदला है जो नियमों के विरुद्ध है। 

हिमाचल जनादेश ने इस कम्पनी के आला अधिकारियों से संपर्क साधा तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा , बहुत बार प्रयास करने के बाद कम्पनी के जीएम कहे जाने वाले सख्श दिनेश कुमार से बात हुई तो उन्होंने विस्फोटक लाइसेंस को लेकर अनभिग्यता जताई और कम्पनी के की किसी प्रियंक मित्तल से बात करवाने की बात कही लेकिन फ़िलहाल उनसे अभी तक सम्पर्क नहीं सधा है।  

कम्पनी के अधिकारियों का इस तरह का बर्ताब इनकी कार्यशैली पर कई अनकहे सवाल उठा रहा है। इतिहास गवाह है कि  लोगों को रोजगार देने के नाम पर शुरू होने वाली इन पनविद्युत परियोजनाओं से किसी गरीब की गरीबी तो अब तक दूर नहीं हुई लेकिन हाँ निर्माण कार्यों में होते इन हादसों ने कई माँ की गोद और कई औरतों के सुहाग जरूर उजाड़े हैं। 


 

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