आखिर कब तक अपनी बेबसी पर रोयेगा भरमौर? चम्बा-भरमौर सड़क मार्ग ध्वस्त,25 हजार लोगों का दुनिया से कटा संपर्क 

आखिर कब तक अपनी बेबसी पर रोयेगा भरमौर? चम्बा-भरमौर सड़क मार्ग ध्वस्त,25 हजार लोगों का दुनिया से कटा संपर्क 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 18 Mar, 2020 11:01 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल क्राईम/दुर्घटना सुनो सरकार लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा स्वस्थ जीवन आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश,मोनु राष्ट्रवादी 

यूँ तो भरमौर की सड़कों की हालत किसी से छुपी नहीं है लेकिन प्रशासन की कमी और सरकार की अनदेखी का इतना खामियाजा भरमौर की भोलीभाली जनता को उठाना पड़ेगा शायद ये किसी ने सोचा तक नहीं था। एक छोटे से भूस्खलन ने पिछले 36 घंटों से भरमौर की 11 पंचायतों की करीब 25 हजार आबादी समूचे विश्व से संपर्क खो चुकी हैं और हालत ये कि जिस रफ़्तार से सड़क मार्ग खोलने का काम चला हुआ है इससे अगले 24 घंटों तक स्थिति यथा ही बनी रहने की संभावना है।

वो तो भला हो कि जनता के चहेते विधायक का जो कल अपने गृह क्षेत्र आने वाले हैं तो शायद विभाग और भरमौर प्रशासन उनकी खुशामदी में कल शाम तक वाहनों की आवाजाही दरुस्त करवा पाए लेकिन उनकी यात्रा किसी कारणवश स्थगित हो गयी तो भरमौर के लाचार और बीमार को लाहल में ही अपने प्राण त्यागने पड़ सकते हैं। 

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कहने को तो जिला चंबा जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर पूरे देश में हब बन चुका है। जिला भर में सैकड़ों लघु जल विद्युत परियोजनाओं के साथ साथ बड़ी पनबिजली परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। लेकिन शायद जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार इन योजनाओं में लगी मशीनरी से बे वाकिफ है। यही कारण है कि चंबा-भरमौर एनएच 54 लाहल के पास पिछले 2 दिन से बंद पड़े  मार्ग को खोलने के लिए अब तक क्षेत्र में चल रही बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं की मशीनरी को प्रयोग में नहीं लाया गया है। 

ऐसे में प्रश्न उठता है कि यह जल विद्युत परियोजनाएं मात्र लेबर कानून के लिए ही जिला में चल रही है या इन परियोजनाओं से मिलने वाले लाडा -साड़ा की धनराशि का भी लोगों की सहूलियत के लिए कोई प्रयोग किया जाना आवश्यक है,अथवा नही?

सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता तो सोशल पर भरमौर को शिखर की ओर पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे लेकिन क्या करें प्रकृति है जो सरकार विकास की पोल खोलने से बाज नहीं आ रही। पिछले वर्ष भी कुछ बुद्धिजीवियों ने समय रहते भरमौर की इस जीवन रेखा के सुधारीकरण का सुझाव दिया था लेकिन सोशल मीडिया में उन लोगों को विपक्षी कह कर उनकी आवाज बंद दी थी।

 इस साल फिर चार माह बाद प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा शुरू होने वाली  है।  अभी भी समय है कि सरकार को शिखर की ओर भरमौर के आडम्बर से बाहर आकर इस हालत को सुधारना चाहिए अन्यथा आने वाले वर्षों में मणिमहेश यात्रा अपने वजूद को खो देगी। 


दुःख इस बात का कि सरकार में बैठे लोक निर्माण और  जनजातीय विकास के प्रधान सचिव भी इसी विधानसभा से ताल्लुक रखते हैं लेकिन मजाल कि भरमौर की इस अबला हालत को सुधार सकें आखिर जनता कसूरवार ठहराए तो किसे........

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