दोस्ती को सलाम:दिव्यांग दोस्त की तकलीफें देख छात्र ने बना डाली ऑटोमेटिक ट्राई साइकिल

दोस्ती को सलाम:दिव्यांग दोस्त की तकलीफें देख छात्र ने बना डाली ऑटोमेटिक ट्राई साइकिल

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 18 Jan, 2020 01:01 pm देश और दुनिया लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर स्वस्थ जीवन शिक्षा व करियर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश ,न्यूज़ डेस्क 

 भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र ने दोस्ती की मिसाल कायम की है। इंजीनियरिंग के अंतिम सत्र के छात्र शशांक कुमार ने शोध के दौरान अपने दोस्त दिव्यांग गुलशन के लिए स्वचालित (चार्जेबल) ट्राई साइकिल बनायी है। पैर से दिव्यांग गुलशन इस ट्राई साइकिल पर पूरे कैंपस का चक्कर लगाता रहता है। शशांक ने इसका नाम गुलशन ट्राई साइकिल दिया है।गुलशन ने कहा कि नौकरी मिलते ही ऐसी पांच ट्राई साइकिल कैंपस को गिफ्ट करूंगा।

नालंदा के रहने वाले इलेक्ट्रिकल विभाग के अंतिम सत्र के छात्र शशांक कुमार ने बताया कि वह और सिविल विभाग के अंतिम सत्र के छात्र गुलशन एक साथ हॉस्टल में रहते हैं। दोनों का कमरा आसपास है। पहले गुलशन हाथ वाली ट्राई साइकिल चलाने के कारण अक्सर थका दिखता था। वह रात में अपने हाथ के दर्द होने की बात करता रहता था। शशांक ने बताया कि इस बीच जब अंतिम सत्र में शोध करने की बात आयी तो उसने सोचा कि क्यों न गुलशन के लिए ऐसी साइकिल बना दें, जिसे वह आसानी से चला सके। इसके बाद वह अपनी योजना पर काम करने लगे।

12-15 हजार रुपये खर्च कर मोटर और बैट्री से गुलशन की पहली वाली ट्राई साइकिल को स्वचालित ट्राई साइकिल बना दी। इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राध्यापक और प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर डॉ. देवनाथ ने बताया कि शशांक के इस शोध को विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग को भी भेजा गया है। उम्मीद है कि विभाग में इसका चयन हो जाएगा। प्राचार्य प्रो. मणिकांत मंडल ने बताया कि यह शोध अच्छा है। अगर विभाग से आगे निर्देश आता है तो दिव्यांगों के लिए यह ट्राई साइकिल बनाई जा सकती है।

चाबी से खुलती और एक्सीलेटर से चलती
ट्राई साइकिल की खासियत है कि यह चाबी से खुलती और बंद होती है। वहीं एक्सीलेटर से यह आगे बढ़ती है। इसकी गति को नियंत्रित किया जा सकता है। बिजली से एक बार चार्ज करने पर चार से पांच घंटे तक चल सकती है। करीब 10 किमी तक इसे चलाया जा सकता है। इसे सड़कों पर चलाकर देखा जा चुका है।

 

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जीपीएस और सोलर पैनल भी लगेगा
शशांक ने बताया कि इसमें आगे जीपीएस और सोलर पैनल भी लगाया जाएगा, ताकि बिजली पर निर्भरता कम रहे। एक से दो माह में इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। यह पूरी तरह से पॉल्यूशन फ्री है। रात में चलने के लिए इसके आगे-पीछे लाइट लगायी गयी है।

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