कविता : लौहड़ी

कविता : लौहड़ी

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 12 Jan, 2020 03:32 pm प्रादेशिक समाचार धर्म-संस्कृति लाइफस्टाइल सम्पादकीय स्लाइडर काँगड़ा आधी दुनिया

 हिमाचल जनादेश,राजेन्द्र पालमपुरी

ल्या फिरी जी आई लौहड़ी  |
घरां घरां है गाई लौहड़ी     ||
सुंदरी मुंदरी याणयां दिक्खा |
हिरणैं खूब नचाई लौहड़ी    ||

रयोड़ी चिड़ुए सौग्गी खिचड़ु |
अम्मां मती बणाई लौहड़ी  ||
भ्यागा भ्यागा बिट्टियां वी है |
ग्राएं जाई सणाई लौहड़ी  ||

तिल मूंफळियां गुड़ चौळां दी |
सब्भनीं खूब है खाई लौहड़ी  ||
औआ सारे मिळी जुली नैं |
नच्चदे गांदे भाई लौहड़ी ||

निक्के याणें झौळुआं पकड़ी |
सुंदरी मुंदरी गाई लौहड़ी    ||
कोई दिंदा पैसे धेल्ले           |
कुसकी दित्ती मठयाई लौहड़ी ||

Comments

Leave a comment

What's on your mind regarding this news!

Your comment *

No comments yet. Be a first to comment on this.