राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष:महान राष्ट्र संत एवं युवा सन्यासी.... स्वामी विवेकानन्द 

राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष:महान राष्ट्र संत एवं युवा सन्यासी.... स्वामी विवेकानन्द 

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 12 Jan, 2020 12:29 pm प्रादेशिक समाचार देश और दुनिया लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा आधी दुनिया

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प्रतिभा  जिनकी धरोहर होती है आदर्श जिनके अनुगामी होते हैं ज्ञान जिनका सहोदर होता है विवेक और संयम जिनकी पूजा करते हैं वह विनयशील व्यक्तित्व सब कुछ हो कर भी एक संत होता है।  उक्त पंक्तियां स्वामी विवेकानन्द के बारे में अक्षरशः चरितार्थ होती हैं। 

12 जनवरी 1863 को को जन्मे स्वामी विवेकानन्द भारतीय धर्म और संस्कृति का संदेश पाश्चात्य देशों तक पंहुचाने में सबसे अग्रणी है।  भारत की संस्कृति और अध्यात्म और विश्व बंधुत्व की भावना का संदेश देकर भारत का मस्तक ऊँचा किया। 

11सितम्बर 1893 को अमेरिका के शिकागो में हुए धर्म संसद में स्वामी जी ने भारत की संस्कृति और अध्यात्म का ऐसा अद्वितीय प्रस्तुति करण किया कि सारा संसार इस युवा सन्यासी की विद्वत्ता का कायल हो गया। 

विवेकानन्द महान राष्ट्रवादी  एवं महान कर्मयोगी थे, वे युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत थे, उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।  अपनी युवावस्था में ही उन्होने भारत के गौरव को पूरे विश्व में गौरवान्वित किया. देश वासियों के अंतर्मन में नई चेतना एवं ऊर्जा का संचार किया।  

विवेकानन्द का दर्शन सर्वथा व्यावहारिक है वे आसमान की बात न कर के जमीन की बात करते हैं।  उनका जीवन दर्शन आदर्श वादी एवं यथार्थ वादी है।  उनके उपदेश और शिक्षाएं आज भी सर्वथा प्रासंगिक हैं। स्वामी जी युवाओं के पथ प्रदर्शक एवं  प्रेरणास्रोत थे।
 
युवाओं का आह्वान करते हुए कहते हैं "सफलता के लिए भागीरथी धैर्य, प्रचण्ड इच्छा शक्ति चाहिए अध्यवसायी आत्मा कहती है, मैं समुद्र को पी जाऊंगी मेरे सामने पहाड़ भी पिघल जाएंगे।  इस प्रकार की इच्छा शक्ति, पराक्रम रखो और तुम लक्ष्य तक पंहुचोगे। 

 शिक्षा के उद्देश्य के बारे में स्वामी जी कहते हैं "शिक्षा मनुष्य में पहले से ही विद्यमान दैवी शक्ति का प्रत्यक्षीकरण है, हम सर्वत्र मनुष्य बनाने वाली शिक्षा चाहते हैं और यही सत्य की कसौटी है।  युवाओं के मन में आत्मविश्वास जगाते हुए स्वामी जी कहते हैं 'अपनी शक्ति को कम कर के मत आंको तुम ब्रह्मांड में हलचल मचा सकते हो।  अपनी प्रेरणादायक और ओजस्वी वाणी से उन्होने जनमानस के मन में स्वतंत्रता का शंखनाद किया। मातृभूमि के प्रति उनके मन में अटूट सम्मान था।  विवेकानन्द जी ने युवाओं को दृढ़इच्छाशक्ति से अपने लक्ष्य एवं कर्तव्य पथ पर अग्रसर होने का संदेश दिया। 
 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विवेकानन्द जी की शिक्षाएं और भी प्रासंगिक और व्यावहारिक हैं आवश्यकता है उनके विचारों को आत्मसात करके उनको व्यावहारिक रूप प्रदान करने की तभी "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक कहीं मत रुको " जैसा महान प्रेरणादायक संदेश चरितार्थ हो सकता है...... 

विक्रम जीत वर्मा.... प्रवक्ता. रा. व. मा विद्यालय छतराड़ी जिला चम्बा। 

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