उपलब्धि:छात्र ने बनाई मशीन जिसके जरिए अंडे से जल्द निकल सकेगा चूजा

उपलब्धि:छात्र ने बनाई मशीन जिसके जरिए अंडे से जल्द निकल सकेगा चूजा

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 02 Jan, 2020 02:14 pm देश और दुनिया लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर शिक्षा व करियर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश ,न्यूज़ डेस्क 

छोटे और सीमांत किसान अब काफी सस्ती मशीन में अंडे से चूजा तैयार कर सकते हैं। यह मशीन बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर भागलपुर बीएयू सबौर के एक छात्र ने तैयार किया है।अंडे से चूजा तैयार करने में मुर्गी को अंडा सेवना पड़ता है। इसमें अंडे को एक निश्चित तापमान और आर्दता पर रखना होता है, लेकिन व्यवसायिक तौर पर अंडे से चूजा तैयार करने के लिए मशीन का इस्तेमाल करना होता है। इसी मशीन को इनक्यूबेटर मशीन कहते हैं।

बीएयू के छात्र की उपलब्धि-

बीएचयू सबौर के छात्र ने तीन फीट चौड़ा, लंबा और ऊंचा थर्मोकॉल के ढक्कन वाला डिब्बा लिया। डिब्बे में तापमान बनाए रखने के लिए दो बल्ब, एक छोटा पंखा, तापमान व आर्दता मापने के लिए 13 सौ रुपये की एक मशीन और आर्दता बनाए रखने के लिए 800 रुपये की मशीन का इस्तेमाल किया।

बिजली के माध्यम से बल्ब को जलाकर निश्चित तापमान बनाए रखा। कुछ दिनों तक इसमें अंडे को दिन में चार बार घुमाना पड़ता है।

व्यावसायिक मशीन की तरह 21 दिन में अंडा टूटकर उसमें से अपने आप चूजा बाहर निकल जाएगा। इस मशीन में एक बार में करीब 60 चूजे तैयार किए जा सकते हैं।

इस प्रोजेक्ट में डॉ. राजेश कुमार ने सहयोग किया। डॉ. रामदत्त ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को अहमदाबाद स्थित हनी बी नेटवर्क से जोड़ा है, ताकि देशभर के किसानों को इसका लाभ मिल सके।

25 सौ रुपये में होगा तैयार-

पश्चिम चंपारण निवासी और बीएयू सबौर स्नातक कृषि पांचवे सेमेस्टर के छात्र आदित्य कुमार ने बताया कि इस मिनी इनक्यूबेटर मशीन को तैयार करने में करीब 25 सौ रुपये लगेंगे, जबकि व्यवसायिक तौर पर काम करने वालों को यह मशीन 75 हजार से डेढ़ लाख में यह मशीन मिलती है। मिनी इनक्यूबेटर में एक साथ करीब 60 चूजे तैयार हो सकते हैं, जबकि व्यवसायिक मशीन में करीब 1000 चूजे। व्यवसायिक मशीन में काम करने के लिए एक प्रशिक्षित व्यक्ति की जरूरत होती है, जबकि इसमें ऐसा नहीं है। इस मशीन को और उन्नत किया जा रहा है, ताकि अंडे को मैनुअल रूप से न घुमाकर मशीन से घुमाया जा सके।

किसान जानेंगे बनाने का तरीका-

बीएयू के वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इस तकनीक को यू-ट्यूब और किसान मेला में प्रदर्शित किया जाएगा। किसानों को इसे बनाने की तकनीक बताई जाएगी, ताकि छोटे किसान खुद तैयार कर इससे अपना व्यवसाय कर सकें।

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डॉ. आरके सोहाने, निदेशक, प्रसार शिक्षा, बीएयू-

छात्र के प्रयास से छोटे किसानों को लाभ होगा। यह काफी खुशी की बात है। इस तकनीक को किसानों तक ले जाने के लिए विश्वविद्यालय प्रयास करेगा।

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