बड़ी खबर:नागरिकता संशोधन विधेयक संसद में पारित, गुवाहाटी में कर्फ्यू, त्रिपुरा में सेना बुलायी गयी

बड़ी खबर:नागरिकता संशोधन विधेयक संसद में पारित, गुवाहाटी में कर्फ्यू, त्रिपुरा में सेना बुलायी गयी

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 11 Dec, 2019 10:22 pm राजनीतिक-हलचल क्राईम/दुर्घटना देश और दुनिया लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश,न्यूज़ डेस्क 

 नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच असम के गुवाहाटी में बुधवार को अनिश्चिकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया, जबकि त्रिपुरा में सेना बुलायी गयी है और असम में सेना की टुकड़ी को तैयार रहने को कहा गया है।  इस बीच, संसद ने इस विधेयक को पारित कर दिया।  लोकसभा में इसे सोमवार की देर रात पारित किये जाने के बाद बुधवार को राज्यसभा ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी। 

शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच असम के 10 जिलों में बुधवार की शाम सात बजे से 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी।  राज्य सरकार के अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि शांति भंग करने के लिए सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने और कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए इंटरनेट सेवाओं को स्थगित रखा जायेगा।  अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह और राजनीतिक विभाग) कुमार संजय कृष्णा द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार लखीमपुर, धेमाजी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कामरूप (मेट्रो) और कामरूप में इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। 

शरारती तत्वों के शांति को भंग करने के प्रयासों को विफल करने के लिए पूरे त्रिपुरा राज्य में भी मंगलवार की अपराह्र दो बजे से 48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं पहले से ही बंद हैं।  त्रिपुरा में इंटरनेट सेवाएं बुधवार को दूसरे दिन भी बंद रहीं।  अधिकारियों ने बताया कि इंटरनेट सेवाएं बृहस्पतिवार तक स्थगित रहेंगी.

उन्होंने बताया कि ट्रेन और बस सेवाएं भी रोकी गयी हैं।  शुरुआत में असम के पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने बताया था कि कर्फ्यू बृहस्पतिवार की सुबह सात बजे तक प्रभावी रहेगा।  हालांकि, उन्होंने बाद में बताया कि कर्फ्यू अनिश्चिकाल के लिए बढ़ा दिया गया है। 

शिलांग में सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि त्रिपुरा में बुधवार को सेना बुला ली गयी और असम में सेना की टुकड़ियों को तैनात कर दिया जायेग।  प्रवक्ता ने बताया कि सेना की एक-एक टुकड़ी को त्रिपुरा के कंचनपुर और मनु में तैनात किया गया है, जबकि गुवाहाटी में आज रात तक सेना तैनात हो जायेगी।  सेना के जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल पी खोंगसाई ने यह जानकारी दी।  उन्होंने कहा, सेना की दो टुकड़ियां तत्काल गुवाहाटी जा रही हैं और वे जल्द ही पहुंच जायेंगी।

 जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि ये टुकड़ियां शहर में पहुंचते ही तैनात कर दी जायेंगी और ये फ्लैग मार्च करेंगी।  हालांकि, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने अगरतला में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य के किसी भी स्थान पर सेना तैनात नहीं की गयी है।  उन्होंने बताया कि असम राइफल्स की टुकड़ियों को हिंसाग्रस्त धलाई जिले में तैनात रखा गया है, जबकि कुछ अन्य स्थानों पर बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवान सुरक्षा में तैनात हैं। 

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इस बीच कांग्रेस पार्टी ने बृहस्पतिवार को त्रिपुरा में बंद का आह्वान किया है।  नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी असम की सड़कों पर उतरे।  प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई और इससे राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा हो गयी है।  हालांकि किसी पार्टी या छात्र संगठन ने बंद का आह्वान नहीं किया है।  प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर छात्र शामिल हैं जिनकी सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई।  

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. कुछ छात्र नेताओं ने दावा किया कि सचिवालय के सामने पुलिस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गये।  गैर आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ तथा जोरहाट जैसे अन्य स्थानों पर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।  इसी तरह की घटनाएं त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से भी सामने आयी है। 

असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल शहर में नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ बड़े स्तर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच बुधवार को कुछ समय के लिए यहां लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फंस गये।  प्रदर्शनकारियों ने गुवाहाटी और राजधानी दिसपुर में टॉयर जलाकर लगभग हर सड़क को अवरुद्ध कर दिया जिससे कार्यालय जाने वाले लोग फंस गये।  कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के अखिल गोगोई ने इस विवादास्पद विधेयक के खिलाफ हड़ताल' का आह्वान किया है।  गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालयों ने सभी परीक्षाओं को 14 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया। 

नागरिकता संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आये गैर मुस्लिम शरणार्थी हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है। 

 

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