कार्य संस्कृति की दरकार:उत्तरदायित्व एवं प्रतिबद्धता की भावना से संभव है समाज में समृद्धि एवं खुशहाली का आगाज

कार्य संस्कृति की दरकार:उत्तरदायित्व एवं प्रतिबद्धता की भावना से संभव है समाज में समृद्धि एवं खुशहाली का आगाज

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 29 Sep, 2019 02:40 pm प्रादेशिक समाचार लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर चम्बा आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश
 

 किसी भी समाज व राष्ट्र के विकास में कार्य संस्कृति का ही सबसे  महत्वपूर्ण योगदान होता है। बिना अनवरत कार्य के विकास के ऊँचे पायदानों की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जैसे एक परिवार में उत्तरदायित्व का वहन करने के लिए परिवार के सभी सदस्यों का मिलकर प्रयास करता अपरिहार्य होता है उसी प्रकार किसी  भी समाज व राष्ट्र  की प्रगति व विकास में वहां के नागरिका का ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। नागरिक जितने कर्मठ एवं उत्तरदायित्व की भावना से परिपूर्ण होंगे  विकास की गति उतनी ही तीव्र होती है।

 

हिमाचल जैसे छोटे एवं पहाड़ी राज्य में कार्य संस्कृति को बढ़ावा  देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिस राज्य में प्रकृति की मनोरम एवं अनमोल छटा  वरदान के रूप में मिली है, उसकी कद्र करना एवं सहेज कर रखना तथा विकास के साथ सकारात्मक सामंजस्य स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है।

 

विकासात्मक कार्यों में सरकारी योजनाओं को लागू करना और उन्हें कार्यान्वित करने में कार्यकारी लोगों का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है। क्षेत्र विशेष या राजकीय विभागों में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी सरकार की तथा राज्य की रीढ़ की हड्डी  होती है। जिनके बगैर विकास कार्यों को कल्पना नहीं की जा सकती हैं वशर्ते कि उक्त अधिकारी एवं कर्मचारी अपने कार्य के प्रति उत्तरदायित्व एवं प्रतिबद्धता की भावना से ओत-प्रोत है जिनमें अपने कार्य एवं कार्य से जुड़े सामान्य जन के दिल में एक सकारात्मक विश्वास पैदा करने की भावना हो जो अपने कर्तव्य को ही जीवन कार्य समझने का जज्बा रखते हों।

 

आमतौर पर यह देखा जाता है कि हमारे प्रदेश में कार्य से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों में कार्य के प्रति उदासीनता की भावना का विकास हो रहा है। निस्संदेह प्रतिबद्ध एवं उत्तरदायित्व से ओत-प्रोत लोग भी विद्यमान है परन्तु व नगण्य है,अधिकांश लोगों में सरकारी सेवा में होना ही जीवन का मकसद बन गया है। 
सेवा में आने पर उनकी प्रतिभा एवं क्षमता को महाग्रहण लग जाता है। यद्यपि इसके पास अन्य कारण भी हो सकता है परन्तु एक क्षमतावान एवं कर्मठ अधिकारी एवं कर्मचारी हमेशा समर्पण का भावना से कार्य करता है।

 

अधिकांश तौर पर यह देखा जाता है कि सामान्य जन के हित से जुड़े अथवा आम लोगों के व्यक्तिगत कार्यों को बिना किसी ठोस आधार के लम्बित रखना या बिलम्ब से करना एक परिपाटी सी बन गई है। छोटे-छोटे कार्यो के लिए बार-2 लोगों के चक्कर लगवाना जैसे कार्य की गरिमा एवं प्रतिष्ठा माना जाने लगा है। परिणाम स्वरूप सामान्य जन में अविश्वास की भावना पनप रही है और उन्हे मजबूर होकर अपने कार्य करवाने के लिए दूसरे रास्ते अपनाने पड़ते हैं जो कि एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था में उचित नहीं माना जा सकता है।

 

ऐसा कदाचित नहीं है कि सरकारी क्षेत्र में प्रतिभा सम्पन्न एवं क्षमतावान और कर्मठ लोगों की कमी है मगर आवश्यकता है उस क्षमता की कार्य रूप में परिणीत करने की । आवश्यकता है तो केवल अपने कार्यक्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाने की  जो व्यावहारिक रूप  में समाज के समक्ष झलके तभी प्रतिभा एवं क्षमता का उचित उपयोग हो सकता है।

 

र्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि सरकारी क्षेत्र से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लोगों में विश्वास की भावना विकसित करने का प्रयत्न करना चाहिए। कार्यालयों में अपने कार्यों  हेतु आने वाले सामान्य जन की भावनाओ का आदर करना चाहिए , उन्हें उचित सम्मान प्रदान करना चाहिए।


 कार्यों को बिना वजह लम्बित रखने की संस्कृति को दरकिनार करके कुशलता पूर्वक कार्यों को निपटाने की संस्कृति  अपनानी होगी ताकि लोगों का व्यवस्था में सकारात्मक विश्वास पनप सके और वे खुशी का अहसास कर सकें क्यूंकि आमजन समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और उन्हें नजरअंदाज कर कोई भी व्यवस्था, समाज विकास की मंजिली को हासिल नही कर सकता है।


अतः  आज आवश्यकता है सरकारी व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक  प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्य के प्रति अनुरण की  भावना उत्पन्न करने की , सामान्य जनमानस की भावनाओं को समझने की ताकि व्यवस्था के माध्यम से समाज में समृद्धि एवं खुशहाली का आगाज हो सके।  समाज में समृद्धि एवं खुशहाली निश्चय ही  विकास एवं उत्कृष्ट व्यवस्या का सूचक है।अतः आपसी  सहयोग व उत्तरदायित्व पूर्व कार्य संस्कृति के माध्यम से उत्कृष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकता है। 

विक्रम जीत वर्मा 
प्रवक्ता (एंग्लो भाषा)
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छतराड़ी,चम्बा। 

 

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