गोहर : बासा में अश्व मित्र सम्मेलन आयोजित, अश्व पालकों को दी महत्वपूर्ण जानकारी

गोहर : बासा में अश्व मित्र सम्मेलन आयोजित, अश्व पालकों को दी महत्वपूर्ण जानकारी

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 25 Sep, 2019 08:23 pm प्रादेशिक समाचार विज्ञान व प्रौद्योगिकी लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर मण्डी आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश ,गोहर (राकेश कुमार )

अश्व पालकों का सामाजिक रूप से रिश्ता कायम करने के उद्देश्य से देश में काम कर रही ईरा व ब्रूक नामक संस्था ने जिला के अश्व पालकों के लिए गोहर के बासा कॉलेज के सभागार में एक अश्व मित्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। शिविर में दिल्ली से आये ब्रूक इंडिया संस्था के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी मार्तण्ड सिंह ने अश्व पलकों को समाज का सबसे पिछड़ा वर्ग बताया। उन्होंने कहा कि संस्था अश्व पलकों को आत्म निर्भर बनाना चाहती है ताकि अश्व पालक अपने आप को समाज में किसी भी प्रकार से हीनता महसूस न करें।

संस्था से जुड़कर अश्व पालक अश्व और मानव के बीच के रिश्ते को बेहतरीन तरीके से समझ रहे हैं। सम्मेलन में जिला पशु कल्याण अधिकारी मदन लाल पटियाल ने अश्व से सम्बंधित बीमारियों के लक्षण और उनके उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पालकों को विभाग की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताया। अश्व कल्याण इकाई चंबा और मंडी के निदेशक प्रदीप शर्मा ने बताया कि संस्था का उद्देश्य अश्व पलकों को मूल कार्य से जोड़ना है।

 

एक नजर इधर भी -अगर खो गया है वोटर आईडी कार्ड तो नही हों परेशान इस तरह बनवाये नया कार्ड

सही जानकारी के अभाव में अश्व पालक अपने अश्वों का लालन पालन सही तरीके से नहीं करते जिस कारण अश्व कई प्रकार की समस्या से ग्रस्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रूक व ईरा संस्था सरकार से अश्व बीमा सहित अश्व पलकों के लिए अश्व पालक कल्याण बोर्ड गठित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने अश्व पालकों से आहवान किया कि पालक विभाग के साथ सामंजस्य स्थापित करें और समस्याएं खुलकर बताएं।

इस मौके पर कृषि विभाग के प्रसार अधिकारी यादविंदर सैनी, वरिष्ठ पशु अधिकारी डॉ. नंद किशोर, प्रोजेक्ट मैनेजर बबलेश राणा, बीएसीएम पदम देव, परवेश, रेखा, सुरेंद्र बीओ विनोद राणा, सदर कलस्टर की सरकाघाट, नेर चौक, धर्मपुर, मझवाड़, सुराही खडड, पतरौण, स्योग, नौ मील, वीर नलोग, दाड़ी, गोहर, मौवीसेरी, दुगरॉई, रती, जोली, खुडला और कोट के अश्व पालक समूह से आए हुए नब्बे पालक मौजूद रहे।

कांगड़ा और मंडी में सबसे अधिक पालक

प्रदेश के कांगड़ा में सबसे अधिक 3781, मंडी में 2278, बिलासपुर में 101, चंबा में 1596, हमीरपुर में 207, किन्नौर 582, कुल्लू में 2178, शिमला में 1959, सिरमौर में 862, सोलन में 277 और ऊना में 267 अश्व पालक है। संस्था का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के इन पलकों को आपस में जोड़ना है। 

Comments

Leave a comment

What's on your mind regarding this news!

Your comment *

No comments yet. Be a first to comment on this.