धर्मशाला उपचुनाव विश्लेषण:भाजपा का खेवनहार कौन? आखिर कब तक शांता  के अड़ियलपन को झेलेगी भाजपा.....

धर्मशाला उपचुनाव विश्लेषण:भाजपा का खेवनहार कौन? आखिर कब तक शांता  के अड़ियलपन को झेलेगी भाजपा.....

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 22 Sep, 2019 08:54 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा शिक्षा व करियर

हिमाचल जनादेश ,मोनू राष्ट्रवादी 

 

● धर्मशाला उपचुनाव, फिर अड़े शांता कुमार


 ● क्या इस बार फिर वरिष्ठ नेता की हठधर्मिता के आगे झुकेगी भाजपा? 
 

जिला कांगड़ा के धर्मशाला में होने जा रहे उपचुनाव में जहां कांग्रेस खामोश नजर आ रही है, वहीं भाजपा में उम्मीदवार को लेकर पिक एंड चूज़ का दौर शुरू हो गया है। वहीं सूबे के मुख्यमंत्री का धर्मशाला उपचुनाव के लिए उम्मीदवार स्थानीय होने के दिए व्यान के बीच अंदर खाते से इस रण में पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपाई नेता शांता कुमार के कूदने से कशमकश बढ़ गई है । शांता कुमार की तगड़ी दस्तक ने धर्मशाला की शांत वादियों में भूचाल ला दिया है। इस भूचाल भाजपा भी आ गई है। 


" हिमाचल जनादेश " को पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शांता की एंट्री के बाद धर्मशाला उपचुनाव में   उम्मीदवार की दावेदारी को लेकर कोई भी नेता या संगठन का व्यक्ति अपनी राय देने से कन्नी काट रहा है । यही पुख्ता सूत्र बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार डॉ राजीव भारद्वाज की दावेदारी को लेकर अड़ गए हैं। जिस कारण कोई भी कार्यकर्ता अपनी राय देने से परहेज कर रहा है ।


हालांकि इन्ही कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर  खासा रोष है,कि आखिर शांता कुमार की मनमानी संगठन कब तक झेलता रहेगा?
 हालांकि यह बात जगजाहिर है शांता कुमार अपनी स्पष्टवादिता के चलते कई बार अपने ही संगठन और नेतृत्व पर भी उंगलियां उठा चुके हैं। जिस कारण कई बार वह भी आलोचना का शिकार भी हुए हैं। 


वरिष्ठ नेता शांता कुमार के संगठन व पार्टी के दिए गए बयानों की सूची भी काफी लंबी है। खैर आपको याद दिलाना चाहेंगे कि अप्रैल  2002 में rediff.com में शांत कुमार का एक साक्षात्कार छपा  था। यह उन दिनों की बात है जब वह तात्कालिक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में खाद्य मंत्री थे।


 rediff.com में छपे इंटरव्यू में  उन्होंने गुजरात के गोधरा कांड के बाद भड़की हिंसा को लेकर उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री व वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पद पर बने रहने को अमानवीय करार दिया था। इतना ही नही उन्होंने  तात्कालिक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पद तक छोड़ने की नसीहत दे डाली थी। 
हालांकि आरएसएस ने मोदी के इस्तीफे की मांग को गलत ठहराया था , और शांता कुमार की घोर निंदा भी की थी। लिहाजा उस समय के इस इंटरव्यू ने खासी सुर्खियां बटोरी थी।   click link:Shanta Kumar calls for Modi's resignation

 शांता कुमार की स्पष्टवादिता  उस समय भाजपा को भारी पड़ गई थी। अक्सर संगठन द्वारा उनकी बात न माने जाने पर वह इसी प्रकार विरोध करते हैं। उनकी हठधर्मिता के प्रमाण के रूप में है वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव है। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से उनकी तनातनी कुछ इस कदर बढ़ गई कि सारे सर्वेक्षणों में सरकार बनारही भाजपा को इस चुनाव में मुंह की खानी पड़ी थी। 


 वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के उपचुनावों के रिकॉर्ड को देखा जाए तो ज्ञात होता है कि भले ही कांग्रेस मुख्य चुनाव हारती है। लेकिन जब भी उपचुनाव हुए हैं कांग्रेस को भारी बहुमत से जीत मिली है। धर्मशाला में भी यदि कांग्रेस सुधीर शर्मा को पुनः अपना उम्मीदवार बनाती है तो स्मार्ट सिटी के तौर पर सुधीर शर्मा के द्वारा किए गए विकास को आज भी धर्मशाला की जनता भुला नहीं पाई है।

इसी विकास के दम पर सुधीर शर्मा खुद को विजयी उम्मीदवार बता रहे हैं। ऐसे में  भाजपा संगठन जमीनी तौर पर भौगोलिक स्थितियों को समझते हुए उम्मीदवार देगा अथवा एक बार फिर शांता कुमार के हठधर्मिता के आगे झुकेगा देखना दिलचस्प होगा।

हम फिलहाल  भाजपा को महाभारत के उस सुप्रसिद्ध स्लोग्न को भी याद दिलाना चाहते हैं कि "मैं समय हूँ" और आज का समय केंद्र में बैठे मोदी और प्रदेश की बागडोर संभाले जयराम का है जिनको देखते हुए जनता ने प्रदेश को मजबूत सरकार दी है और केंद्र को प्रचंड बहुमत दिया है। ऐसे में धर्मशाला को लेकर क्या तय किया जाना चाहिए ये निर्णय सूबे के मुख्यमंत्री और वर्तमान संगठन के शीर्ष नेतृत्व ही ले तो धर्मशाला के लिए बेहतर होगा।

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