कल पक्का पता चल जाएगा कि इसरो के चंद्रयान का क्या हुआ

कल पक्का पता चल जाएगा कि इसरो के चंद्रयान का क्या हुआ

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 16 Sep, 2019 03:57 pm देश और दुनिया विज्ञान व प्रौद्योगिकी लाइफस्टाइल ताज़ा खबर स्लाइडर शिक्षा व करियर आधी दुनिया

हिमाचल जनादेश,न्यूज़ डेस्क 
अब इसरो के चंद्रयान को ढूंढने में लग गयी है। तारीख 17 सितम्बर दिन मंगलवार चांद के चक्कर काटता नासा का ऑर्बिटर उस जगह पहुंचेगा। जहां भारत के विक्रम लैंडर के मौजूद होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।उस जगह की तस्वीरें खींची जाएंगी और ये तस्वीरें नासा इसरो के साथ साझा करेगा।फिर पता चलेगा कि भारत का विक्रम लैंडर किसी स्थिति में है। 

लेकिन NASA का जो ऑर्बिटर विक्रम लैंडर को ढूंढेगा, उसकी ख़ासियत क्या है? इस ऑर्बिटर का नाम है Lunar Reconnaissance Orbiter को आज से दस साल पहले यानी 18 जून, 2009 को लॉन्च किया गया था।LRO का वजह 1916 किलो है। जब इसे लॉन्च किया गया था तो अंदाज़ लगाया गया था कि ये एक साल तक काम करेगा लेकिन हर बार LRO की स्थिति का अंदाज़ लगाने के बाद इसका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा और बढ़ाते-बढ़ाते ये अवधि दस साल तक चली आई।

LRO ने चांद की सतह का 3D नक्शा बनाया है और इसने चांद की सतह का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा कवर कर लिया है. इस हिस्से में चांद का दक्षिणी ध्रुव भी आता है जिस पर इस समय चंद्रयान के विक्रम लैंडर के होने की आशंका जताई जा रही है। LRO पर कुल 6 डिवाइस मौजूद हैं लेकिन इस पर मौजूद कैमरा सबसे ज्यादा रोचक अंग है. जिसकी मदद से विक्रम लैंडर को ढूंढने के प्रयास किये जाएंगे. कैसा है ये कैमरा?

LRO द्वारा भेजी गयी चांद की पहली तस्वीर 

हाई-रिजोल्यूशन कैमरा. अब तक ये कैमरा 70-100 टेराबाइट का डाटा भेज चुका है. और खासकर इस कैमरे की मदद से उन सारी थ्योरी का खंडन करने में मदद मिल रही है। जिसके बारे में कहा जाता है कि बज़ एल्ड्रिन और नील आर्मस्ट्रोंग चांद पर उतरे ही नहीं।बल्कि उनकी लैंडिंग किसी स्टूडियो के अन्दर शूट की गयी थी।

 

LRO द्वारा भेजी गयी चांद के दक्षिणी ध्रुव की तस्वीर जहां,चंद्रयान की लैंडिंग हुई है 


LRO इस बारे में कैसे मदद करता है? ये कई बार उस जगह से गुजरा है, जहां पर नासा के अपोलो यान की लैंडिंग हुई थी. इसने कई बार उस जगह की तस्वीरें भेजी हैं। तस्वीरों में यान के कुछ छूटे हुए हिस्से और अमरीका का झंडा दिख रहा है। एक तरह से LRO इस पूरे मामले में नासा के पक्ष को मजबूत करता है। 

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