प्रथम पुण्य तिथि विशेष:क्षितिज के पार अटल बिहारी बाजपेयी

प्रथम पुण्य तिथि विशेष:क्षितिज के पार अटल बिहारी बाजपेयी

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 16 Aug, 2019 09:39 am प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल देश और दुनिया लाइफस्टाइल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा

हिमाचल जनादेश,राजेन्द्र पालमपुरी

" हार नहीं मानूंगा रार नहीं ठानूंगा |  काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं ||  गीत नया गाता हूं || " 

 दिलों ,  दलों और दलदलों के पार एक पारंगत व्यक्तित्व का नाम अटल बिहारी बाजपेयी | नेता , कवि और राष्ट्र प्रेमी |  जिसे अपने देश की मिट्टी से इतना स्नेह कि निश्च्छल पहाड़ों के आंचल के तले ,  बस जाने की तमन्ना हमेशा रही |

अटल जी का हमेशा कविता भाव यही रहा - " मेरी कविता जंग का ऐलान है , पराजय की प्रस्तावना नहीं | यह हारे हुए सिपाही का नैराश्य  निनाद नहीं , जूझते हुए योद्धा का जय संकल्प है | बह निराशा का शब्द नहीं बल्कि आत्मविश्वास का जयघोष है | 

उत्तर प्रदेश के आगरा में पुरातन स्थान बटेश्वर के निवासी पंडित कृष्ण बिहारी बाजपेयी और मां कृष्णा बाजपेयी के घर 25 दिसंबर 1924 को अटल जी का जन्म हुआ | और फिर यही अटल हमारे देश भारत का ग्यारवीं पायदान का बह गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बना जिसने अपने कार्यकाल यानि 5 साल की संसदीय अवधि पूर्ण ही नहीं की बल्कि इस समय में आश्चर्यजनक उपलब्धियों के साथ ही हैरतअंगेज विकास और उन्नति की राह भी दिखाई समूचे राष्ट्र को | जबकि अटल बिहारी बाजपेयी के पिता ग्वालियर में शिक्षण कार्य तो करते ही थे साथ ही वे हिंदी और ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे |

कहना गलत न होगा कि वंशानुगत काव्यात्मक गुणों का संचार बाल अटल जी के में न होना हैरान करती बात नहीं है | महात्मा रामचंद्र वीर द्वारा रचित अमर कृति " विजय पताका " पढ़ने के बाद ही बालक अटल के जीवन में बदलाव आया | बाजपेयी  ने अपनी बी ए की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज ( अब लक्ष्मीबाई कालेज ) में हुई |

अटल  जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे | वे 1967 से 1973 तक इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे | सन 1955 में बाजपेयी जी ने प्रथम बार लोकसभा चुनाव लड़ा किंतु इन्हें हार का सामना करना पड़ा | फिर भी डटे रहे और सन्  1957 में बलरामपुर जिला गौंडा उत्तर प्रदेश से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा पहुंचे |

ततपश्चात सन् 1957 से 1977 तक और जनता पार्टी की स्थापना तक निरंतर जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे | अटल जी मोरारजी देसाई की सरकार में 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे और विदेशों में भारत की छवि को क्षितिज तक पहुंचाने में लगातार जी तोड़ कौशिशों में लगे रहे जिसमें उन्होंने बेहतरीन सफलताएं अर्जित भी कीं |

अपने देश भारत के ग्यारवें प्रधानमंत्री के तौर पर अटल बिहारी बाजपेयी जी 16 मई 1996 से 1 जून 1996 और फिर 19 मार्च 1997 से 22 मई 2004 तक विशाल लोकतंत्र भारत के प्रधानमंत्री रहे | भारतीय राजनीति में हमेशा सक्रीय रहे अटल जी हरदिल अजीज कवि , पत्रकार , और प्रखर वक्ता थे | उनकी यह पंक्तियां कि :

छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता |  टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता  || सदैव हमारी प्रेरणा स्रोत रहेंगी |   सन् 1950 में लखनऊ से प्रकाशित " दैनिक स्वदेश " के संपादक भी रहे अटल जी | और लखनऊ से ही प्रकाशित " राष्ट्र धर्म  " के पहले संपादक भी नियुक्त किये गए थे अटल बिहारी बाजपेयी जी |

सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के वक्त बाजपेयी जी को लगभग 23 दिन जेल में भी रहना पड़ा था |  सन् 1939 में केवल 15 साल की उम्र में ही अटल जी आर एस एस में शामिल हो गए थे | भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाने में भी विशेष योगदान रहा अटल जी का | दक्षिण के कई राज्यों के बीच काबेरी जल विवाद को सुलझाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी बाजपेयी जी ने |

पड़ोसी देश के आपसी व मित्रतापूर्ण संबंधों को लेकर भी बस से सीधे लाहौर पहुंचना भी बाजपेयी जी की ही  करामात थी | और फिर वर्ष 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में " कारगिल विजय " के लिये भी अटल बिहारी बाजपेयी जी को सदैव याद किया जाता रहेगा |

अटल जी ही भारत के 7 वें ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें भारत रत्न से अलंकृत किया गया | यही नहीं बल्कि हिंदुत्ववादी विचारधारा के बीच अटल जी की उदारवादी छवि ही रही | हैरत भरी बात यह भी रही कि कानून यानि बी ए एल एल बी की पढ़ाई अपने शिक्षक पिता पं० कृष्ण बिहारी बाजपेयी के साथ वहीं होस्टल में रहकर पूरी की | इन्हीं की लिखी यह  पंक्तियां कि :

" बाधाएं आती हैं आएं |

घिरें प्रलय की घोर घटाएं ||

पांव के नीचे अंगारे ,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं ||

निज हाथों से हंसते - हंसते , आग जलाकर जलना होगा |

कदम मिलाकर चलना होगा ||

जीवन संग्राम तो हर इंसान का हिस्सा हैं और ऐसा ही कुछ अटल जी के हिस्से में भी आया जब बाजपेयी जी को एम्ज में उनके स्वास्थ्य को लेकर देश और देश का मीडिया चिंतित रहा और फिर        11 जून 2018 से   ( AIIMS ) में भर्ती अटल जी के आगे मौत भी घुटने टेकती नजर आ रही थी किंतु बीते साल यानि 16/08/2018 को आखिर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को जिंदगी दगा दे ही गई जिसकी देश को कत्तई उम्मीद नहीं थी |

जब देशवासियों की दुआएं और देश के  चिकित्सकों की दवाएं नाकाम रह गईं | बेहद अफसोसनाक समाचार था यह समूचे राष्ट्र के लिये जिसकी कल्पना करना भी दुखदायी थी जब एक राजनैतिक , साहित्यिक और एक वंधुत्व के युग का अंत हो गया |

गत वर्ष आज ही के दिन समस्त भारत वासियों के साथ ही हिमाचल प्रदेश के मनाली वासियों के लिये भी यह खबर बेहद दुखदायी रही होगी क्योंकि साल 2006 के बाद यहां मनाली स्थित प्रीणी गांववासी अटल बिहारी बाजपेयी जी की निरंतर प्रतीक्षा करते रहे हैं जो अब शायद आते युगों तक रहेगी |

जबकि 16/08/2018 को देश के 93 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन का टैलीविजन पर यह  समाचार कि "  सांय  5 बजकर 5 मिंट पर अंतिम सांस ली अटल बिहारी बाजपेयी जी ने " कभी न पूर्ति होती क्षति है | देश स्तब्ध था | आज प्रथम पुण्य तिथि पर हरदिल अजीज अटल जी को श्रद्धा सुमन , हार्दिक नमन श्रद्धांजलि |

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