हिमाचल जनादेश की पड़ताल:कहीं मिशन नमो अगेन पर भारी न पड़े विधायकों व उम्मीदवारों से नाराजगी

हिमाचल जनादेश की पड़ताल:कहीं मिशन नमो अगेन पर भारी न पड़े विधायकों व उम्मीदवारों से नाराजगी

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 09 May, 2019 06:22 pm प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर हमीरपुर काँगड़ा मण्डी शिमला

हिमाचल जनादेश(मोनु राष्ट्रवादी)

लोकसभा चुनाव 2019 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है ।19 मई को होने वाले आखरी चरण के चुनाव के साथ ही सभी सांसदों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी। हिमाचल प्रदेश में चुनाव अंतिम चरण में अर्थात 19 मई को होंगे।

दोनों पार्टियों द्वारा वोटरों को भुनाने की कोई कसर शेष नहीं छोड़ी जा रही। एक तरफ जहां कांग्रेस अपने कुनबे को समेटने में लगी हुई है तो दूसरी ओर भाजपा मोदी सरकार की 5 वर्ष की उपलब्धियों को भुनाने में लगी है ।

इसमें कोई दो राय नहीं कि भाजपा इस बार फिर मोदी नाम की माला को जपते हुए चारों सीटें जीतने का दावा कर रही है । लेकिन कांग्रेस का एकजुट होता कुनबा भाजपा की विजय रथ को रोकने में भी प्रयासरत है।

विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में "हिमाचल जनादेश" के द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के नतीजे भाजपा के लिए शुभ संकेत देते नजर नहीं आ रहे । इस बात से इनकार कर पाना मुमकिन नहीं है कि इस बार प्रदेश में लोकसभा के चुनाव को लेकर मतदाता जागरूक नजर आ रहा है। केंद्र में किस सरकार को लाना है इसे लेकर मतदाता खुलकर भी बोल रहा है ।

"हिमाचल जनादेश' के किए गए सर्वे में पाया गया कि लोग इस बार मोदी के नाम पर वोट देने वाले लेकिन भाजपा के अधिकतर कार्यकर्ता अपने - अपने विधानसभा क्षेत्र के नेतृत्व व उम्मीदवारों से भी नाखुश से नजर आ रहे हैं यहां तक कि कई कार्यकर्ता तो यह भी कह रहे हैं कि वे अपना वोट सिर्फ और सिर्फ मोदी के लिए दे रहे है।

"हिमाचल जनादेश" द्वारा यह पूछे जाने पर कि विधायक का डेढ़ वर्ष का कार्यकाल कैसा रहा तो उनका जवाब है कि विधायकों को 2022 में जवाब दिया जाएगा लेकिन इन विधायकों के कारण हम मोदी को नहीं खोना चाहते।

बात साफ है अधिकतर कार्यकर्ता अपने विधानसभा के नेतृत्व से नाखुश नजर आ रहे हैं यहां तक कि कई कार्यकर्ता तो उम्मीदवारों के चयन से भी इत्तिफ़ाक़ रखता नहीं दिख रहा। ऐसे में भाजपा का वोट प्रतिशत 2017 के मुकाबले गिर सकता है। कई विधानसभाओं में तो लोगों ने खुलकर यह भी स्वीकारा है कि उनकी विधानसभा से बढ़त तो भाजपा को ही मिलने वाली है लेकिन 2017 के मुकाबले वोट प्रतिशत में गिरावट आएगी।

हिमाचल प्रदेश में वर्तमान स्थिति देखी जाए तो शिमला को छोड़ बाकी तीन लोक सभा क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवारों की जीत संदेहास्पद नजर आ रही है क्योंकि इन लोकसभा क्षेत्रों में बीते कुछ दिनों से हो रही गतिविधियां भाजपा के हित में नजर नहीं आ रही।

गौरतलब हो हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र में पूर्व भाजपा सांसद सुरेश चंदेल द्वारा कांग्रेस का हाथ थामने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कांग्रेस ने सीमा रेखा पर एक ऐसा खिलाड़ी लगा दिया है जो अनुराग ठाकुर की जीत के चौके को रोक सकता है।

तो दूसरी ओर लोकसभा कांगड़ा में भाजपा प्रत्याशी को विधायकों और मंत्रियों के गृह क्षेत्र में लोगों द्वारा विरोध व गो बैक के नारे लगाना प्रत्याशी की जीत पर कई प्रश्न खड़े कर रहा है ।जबकि मंडी लोकसभा क्षेत्र में कई भाजपा नेताओं और पूर्व मंत्रियों की गैर हाजिरी भी खासी चर्चा में है।

शायद इस डर को अब शीर्ष नेतृत्व भी भाँप चुका है , यही कारण है कि अब भाजपा संगठन के लोग फेसबुक और व्हाट्सएप्प के माध्यम से मतदाताओं से अधिकाधिक वोट करने की अपील भी करते नजर आ रहे हैं। जबकि दूसरी ओर देखा जाए तो कांग्रेस के कार्यकर्ता एकजुट नजर आ रहे हैं और वे अपने - अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं।

पूर्व में चल रहे कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में इतनी खींचतान होने के बावजूद भी आज अधिकतर कांग्रेस नेतृत्व एक मंच पर आ चुका है जबकि भाजपा नेतृत्व "मोदी मद" में एक दूसरे को व कार्यकर्ताओं को महत्व देना भी जरूरी नहीं समझ रहा, जिसके प्रमाण बीते कुछ दिनों से स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं।

ऐसे में एक बात स्पष्ट निकल कर सामने आ रही है की भाजपा की ओर से एक तरफ जहां वोट प्रतिशत में कमी आएगी तो वहीं दूसरी ओर अपने-अपने विधायकों व उम्मीदवारों से नाखुश चल रहे कार्यकर्ता नोटा का साथ भी देने से गुरेज नहीं करेंगे ।

खैर 23 मई को चुनाव नतीजे सब के सामने होंगे लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विधायकों और उम्मीदवारों से असहमति हिमाचल में मिशन मोदी अगेन की उम्मीदों पर पानी फेर सकती है।

Comments

Leave a comment

What's on your mind regarding this news!

Your comment *

No comments yet. Be a first to comment on this.