जवाली: शहीद तिलक राज की अंत्येष्टि में नहीं पहुँच पाए शांता, खराब रास्ता या उम्र का तकाजा

जवाली: शहीद तिलक राज की अंत्येष्टि में नहीं पहुँच पाए शांता, खराब रास्ता या उम्र का तकाजा

संवाददाता (हिमाचल जनादेश) 19 Feb, 2019 10:01 am प्रादेशिक समाचार राजनीतिक-हलचल क्राईम/दुर्घटना सुनो सरकार सम्पादकीय ताज़ा खबर स्लाइडर काँगड़ा स्वस्थ जीवन

हिमाचल जनादेश, नगरोटा सूरियां(प्रेमस्वरूप शर्मा)

शहीद तिलक राज के गांव धेवा जवाली उपमंडल में जहां सड़कों का बुरा हाल है। इस गांव में किसी का अंतिम संस्कार होता है वहां पर जाने के लिए रास्ता ही नहीं है आज भी लोग उबड़ खाबड़ रास्ते से वहां तक पहुंचते हैं।

आजादी के 71वर्ष हो गए हैं लेकिन आलम आज भी यह है कि आज भी श्मशान तक के रास्ते दरुस्त नहीं हो पाए। विकास के खोखले दावों की पोल तब खुली जब शहीद के अंतिम संस्कार के स्थान पर उबड़ खाबड़ रास्तों को देखते हुए सांसद शांता कुमार कठिन रास्ते को देखते हुए  वहां तक नहीं जा सके और शहीद के घर से उन्हें श्रद्धांजलि देकर चले गए ।

 जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा तथा प्रदेश के अन्य मंत्री विधायक विपक्ष में रहे विधायक  पूर्व मंत्री रहे चन्द्र कुंर सभी इस अंतिम यात्रा में साथ थे जो इस कठिन रास्ते से होकर श्मशान घाट तक पहुंचे ।

खराब रास्ता होने के कारण वापिसी समय में नेताओं को आने के लिए करीब तीन चार बार ब विश्राम करना पड़ा। जंगल के बीच टेढ़ा मेढ़ा व उबड़ खाबड़ रास्ता था शहीद के पार्थिव शरीर बड़ी मुश्किल से इस कठिन टेढ़े मेढ़े रास्ते से पहुंचाया गया ।

जब शहीद की शव यात्रा निकल रही थी तो  इस कठिन रास्ते से कई बार लोग गिरे। इस तरह आज भी प्रदेश में ऐसे कई गांव हैं जहां अंतिम संस्कार के लिए जाने के लिए रास्ते नहीं हैं।

 

वयोवृद्ध भाजपा नेता व सांसद के शहीद की अंत्येष्टि में शामिल न होने पर वहां उपस्थित लोगों की जुबां पर मोदी-शाह का 75 वर्ष आयु फार्मूला आ ही गया:

शहीद तिलक राज के दुख में क्षेत्र के हजारों लोग उसकी अंतिम यात्रा पर शामिल हुए लेकिन कांगड़ा-चंबा के सांसद शांता कुमार का अंत्येष्टि में शामिल ना होना, गमगीन जन समूह में मुख्य रूप से चर्चा का विषय बना रहा।

अंततः लोगों ने यह माना कि अमित शाह और मोदी का 75 वर्ष की आयु फार्मूला बिल्कुल सही है अगर वर्तमान सांसद 75 आयु से ज्यादा ना होते तो जरूर शहीद की अंत्येष्टि में शामिल होते । शायद बेचारे सांसद की बुढ़ापा ही मजबूरी रही होगी कि जिसके कारण पिछले 5 वर्षों में कहीं भी जनता के सुख दुख में शामिल नहीं हो सके।

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